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सचेत रहें क्योंकि सत्ता,सनक और मूर्खता संवेदनहीन होती हैं

अगली सख्ती या पिंजरे गांव की ओर बढ़ते नजर आ सकते है, गांव की सामाजिक सोच बदल कर उन्हें भी ऐसा बनाया जा सकता है कि वो भी पड़ोसी का नाम न जानते हो।एक ऐसे भविष्य की कल्पना जहां पड़ोस का बच्चा बिना हिचक आंटी जी से एक कटोरी चीनी मांगने में शर्म महसूस करने लगे और पड़ोस की आंटी को उस बच्चे में करोना वायरस नजर आने लगे।व्यक्ति समूहों में बंट जाए और सब एक दूसरे के दुश्मन बना दिए जाएं फिर व्यक्ति सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के जीवित रहे तथा सेठजी की सेवा करता रहे।

 

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◆प्रमोद पहवा
क्या आपने कभी किसी पक्षी को बहुत छोटी उम्र में पाला है ?यदि हां तो अनुभव किया होगा कि उसमे उड़ने की कुदरती शक्ति समाप्त हो जाती है और जब वो दूसरे परिंदो को खुली हवा में उड़ते हुए देखता है तो उसे लगता है कि आसमान की ऊंचाइयों तक उसने वाले उसके जैसे परिंदो को कोई बीमारी लग गई है या किसी कुदरती कहर के कारण ये हवा में उड़ गए हैं जो जल्द ही गिर कर मर जाएंगे।कुछ सौ मरीजों के करोना वायरस से प्रभावित होने के समाचार के साथ ही नोटबंदी की तरह सिर्फ चार घंटे की अवधि में ताली बजा दी गई और भारत की सांसे रोक दी।पहले तो उम्मीद की गई कि शायद सायकल टूट जाएगा और जीवन पटरी पर लौट आएगा लेकिन ग्रे गवर्नमेंट ने आज्ञा नहीं दी क्योंकि अभी 90% अर्थव्यवस्था बर्बाद नहीं हुई थी।बर्बादी की लक्ष्य प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा भारत की ग्रामीण कृषि आधारित अर्थ व्यवस्था थी जो अपना पेट भरने लायक अन्न रखती हैं और मिलजुल कर दुख सुख बांट लेती है।यदि आप शहरों में रहते हैं तो साफ तौर से अनुभव किया होगा कि इन चंद दिनों में मीडिया तथा तंत्र के सहारे आपकी मानसिकता और सोच बदल दी गई है या आपको उड़ना भुला दिया गया है।कल प्रधान श्री ने कहा कि सरकार को गांव की भी चिंता है तथा वहां करोना से बचाव जरूरी है।अर्थात अगली सख्ती या पिंजरे गांव की ओर बढ़ते नजर आ सकते है, गांव की सामाजिक सोच बदल कर उन्हें भी ऐसा बनाया जा सकता है कि वो भी पड़ोसी का नाम न जानते हो।एक ऐसे भविष्य की कल्पना जहां पड़ोस का बच्चा बिना हिचक आंटी जी से एक कटोरी चीनी मांगने में शर्म महसूस करने लगे और पड़ोस की आंटी को उस बच्चे में करोना वायरस नजर आने लगे।व्यक्ति समूहों में बंट जाए और सब एक दूसरे के दुश्मन बना दिए जाएं फिर व्यक्ति सिर्फ अपने निजी स्वार्थ के जीवित रहे तथा सेठजी की सेवा करता रहे।यह विचार आरएसएस की बुनियादी सोच में तो कभी नहीं हो सकते, बेशक संघ की विचारधारा से हम सहमत नहीं हैं लेकिन संघी इतने स्वार्थी और एकाकी या समाज विरोधी नहीं हो सकते।या तो संघ के हैंडलर्स ने आदेश जारी किए हैं या स्वयं में आरएसएस भी हाई जेक हो गया है और भागवत ने मजबूरी में घुटने टेक दिए हैं।कल की वार्ता में मुख्यमंत्रियों की कितनी बात मानी गई अभी इसका विवरण नहीं आया है किन्तु सचिवों को साथ लेकर आने का आदेश और केंद्रीय सचिव द्वारा सीधे राज्यो के मुख्य सचिवों को आदेश जारी करना बताता है कि फ़ेडरल सिस्टम समाप्त हो चुका है। देश एक केंद्रीय शक्ति के आदेश पर अमल कर रहा है जिसका डरे दबे शब्दो में कुछ मुख्यमंत्रियों ने जिक्र भी कर दिया।एक नए इंडिया के लिए शुभकामनाएं, सचेत रहें क्योंकि सत्ता,सनक और मूर्खता संवेदनहीन होती हैं।
(लेख लेखक के फेसबुक पोस्ट से लिया गया है)

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