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ज़कात की रकम से बना 10 बेड का ICU सरकार के हवाले

मुसलमानों के ज़रिए की गई 10 बेड की यह मदद भले ही ज्यादा बड़ी नजर ना आ रही हो लेकिन यहां आईसीयू की सुविधा ही नहीं थी वहां के लिए यह मदद एक वरदान साबित हो सकती हैं।समुदाय द्वारा किये गया यह प्रयास और सबके लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनता हैं।

 

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मुम्बई:कोरोना काल में उतपन्न परिस्थितियों और ज़रूरतों को मूर्तरूप देते हुए भारतीय मुसलमानों ने एक अभूतपूर्व उदाहरण पेश करते हुए ज़कात के पैसे से 10 बेड वाला अस्पताल बनाकर सरकार को पेश किया है।खबरों के मुताबिक़ महाराष्ट्र के कोल्हापुर इलाके के इचलकरंजी शहर में मुसलमानों ने 36 लाख रुपये में निर्मित 10-बेड का आईसीयू दान किया है, जो उन्होंने समुदाय के सदस्यों के द्वारा रमजान में ज़कात की रकम के रूप में एकत्र किया था।इचलकरंजी शहर का पहला सरकारी अस्पताल बन गया है जहां अब आईसीयू की सुविधा उपलब्ध होगी।मुस्लिम समुदाय की तरफ से की गई 10 बेड की यह मदद भले ही ज्यादा बड़ी नजर ना आ रही हो लेकिन यहां आईसीयू की सुविधा ही नहीं थी वहां के लिए यह मदद एक वरदान साबित हो सकती हैं।समुदाय द्वारा किये गया यह प्रयास और सबके लिए प्रेरणा का स्त्रोत बनता हैं।यह शहर मुंबई से 380 किमी दूर है।

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ईद के दिन यानि 25 में को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इंदिरा गांधी मेमोरियल (IGM) सिविल अस्पताल के ICU खंड का उद्घाटन किया,कहा:इचलकरंजी में मुसलमानों ने देश में सभी के लिए रास्ता दिखाया है। मुस्लिम समुदाय ने त्योहार मनाने के तरीके पर एक उदाहरण पेश किया है

 

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खबरों के अनुसार ईद के दिन यानि 25 में को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने इंदिरा गांधी मेमोरियल (IGM) सिविल अस्पताल के ICU खंड का उद्घाटन किया था।वीडियो कांफ्रेंसिंग के द्वारा उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ठाकरे ने समुदाय के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि इचलकरंजी में मुसलमानों ने देश में सभी के लिए रास्ता दिखाया है। मुस्लिम समुदाय ने त्योहार मनाने के तरीके पर एक उदाहरण पेश किया है। ”खबरों के मुताबिक इचलकरंजी में एक मुस्लिम संगठन सामस्त मुस्लिम समाज (एसएमएस) ने रमजान के दौरान शहर के एकमात्र सरकारी अस्पताल में 10-बेड के आईसीयू की सुविधा के लिए निर्णय लिया, क्योंकि पहले आईसीयू सुविधा की आवश्यकता वाले मरीजों को कोल्हापुर और सोलापुर जैसे शहरों में भेजा जाता था।अंग्रेज़ी अख़बार TOI ने IGM सिविल अस्पताल से जुड़े सर्जन डॉ जावेद बागवान के हवाले से कहा, “यह इस कस्बे के मुसलमानों का एक बड़ा इशारा है। मुझे नहीं लगता कि भारत में कहीं भी एक पूरे कस्बे के मुसलमानों ने ज़कात के पैसे का इस्तेमाल इस तरह की सुविधा के लिए किया है। इससे हमें कोरोनावायरस से लड़ने में मदद मिलेगी। ”विदित हो कि इचलकरनजी महाराष्ट्र के के कोल्हापुर जिला मे, पंचगंगा नदी के पास, कोल्हापुर नगर से 27 किमी दूर, जिले का दूसरा बड़ा नगर है।इचलकरंजी शहर की कुल तीन लाख आबादी में से मुसलमान 15% बताये जाते हैं।

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