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मुसलमान अपने विकास के मुद्दों पर वोट करें, किसी को हराने या जिताने के लिए नहीं:काशिफ यूनुस

मुस्लिम मुद्दों को चुनावी मुद्दा बनाने की उम्मीद और संघर्ष के साथ ‘बिहार मुस्लिम महापंचायत’ ने “मुस्लिम घोषणापत्र” जारी किया,कहा मुस्लिम घोषणा पत्र को लेकर बिहार मुस्लिम महापंचायत बिहार के सभी 243 विधानसभा क्षेत्र में जाएगा और वहां की जनता को इस बात पर सजग करेगा कि वह उन्हीं उम्मीदवारों और दलों को अपना वोट दें जो मुस्लिम घोषणापत्र के मुद्दों पर काम करने के लिए तैयार हों.

 

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पटना:भारतीय मुसलमानों की नुमाइंदगी करने वाली अग्रणी संस्था बिहार मुस्लिम महापंचायत ने आज विधान सभा चुनाव में मुसलमानों की भागीदारी और उसके हुक़ूक़ की बात करते हुए मुस्लिम मुद्दों को चुनावी मुद्दा बनाने की उम्मीद और संघर्ष के साथ “मुस्लिम घोषणापत्र” जारी किया।इस अवसर पर बिहार मुस्लिम महापंचायत के मुख्य संयोजक मोहम्मद काशिफ यूनुस ने विस्तृत तौर पर मुस्लिम घोषणापत्र के मुद्दों के बारे में जानकारी दी.उन्होंने कहा कि सत्ता और विपक्ष के राजनीतिक दलों के द्वारा समाज के पिछड़े तबके के मुद्दों पर बोलने में हिचकिचाहट देखी जाती है. समाज के पिछड़े हुए तबके जैसे मजदूर, महिला, SC की जातियां, झुग्गी में रहने वाले लोग, किसान , इन सबके मुद्दे चुनावी मुद्दा नहीं बन पाते हैं और पूरा चुनाव दो-तीन मुद्दों के आसपास भटक कर रह जाता है. कोई पाकिस्तान, तो कोई मंदिर-मस्जिद के मुद्दे पर चुनाव लड़ता रहता है और जन-सरोकार के मुद्दे पीछे छूट जाते हैं. इसलिए यह जरूरी है कि विशेष प्रयास से जन-सरोकार के मुद्दों को चुनावी मुद्दा बनाया जाए. इसके लिए सामाजिक संगठन समय-समय पर जन सरोकार के मुद्दों को इकट्ठा कर , अपना घोषणा पत्र जारी करते रहते हैं. इसी प्रयास को आगे बढ़ाते हुए मुस्लिम समाज के द्वारा आज एक “मुस्लिम घोषणापत्र” जारी किया गया है.सच्चर कमिटी की रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लिम समाज आज देश के एक बहुत ही पिछड़े हुए समाज में शामिल है. इसलिए यह जरूरी है कि इस समाज के विकास से जुड़े हुए मुद्दों को चुनावी मुद्दा बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं. इसी विशेष प्रयास का एक नाम “मुस्लिम घोषणापत्र” है.

 

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सच्चर कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक मुस्लिम समाज आज देश के एक बहुत ही पिछड़े हुए समाज में शामिल है. इसलिए यह जरूरी है कि इस समाज के विकास से जुड़े हुए मुद्दों को चुनावी मुद्दा बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जाएं. इसी विशेष प्रयास का एक नाम “मुस्लिम घोषणापत्र” है.

उन्होंने कहा कि मुस्लिम घोषणा पत्र को लेकर बिहार मुस्लिम महापंचायत बिहार के सभी 243 विधानसभा क्षेत्र में जाएगा और वहां की जनता को इस बात पर सजग करेगा कि वह उन्हीं उम्मीदवारों और दलों को अपना वोट दें जो मुस्लिम घोषणापत्र के मुद्दों पर काम करने के लिए तैयार हों.
इस अवसर पर मोहम्मद काशिफ के इलावा, प्रवक्ता जीशान महबूब, पत्रकार श्रीकांत, एडवोकेट अंजुम बारी, सामाजिक कार्यकर्ता रुपेश, कलीमुल्लाह, मोहम्मद इम्तियाज हैदर इत्यादि उपस्थित रहे और सभी ने प्रण लिया कि हमलोग मुस्लिम घोषणा पत्र को प्रचारित प्रसारित करने के लिए पूरे तन मन धन से काम करेंगे और इसे बिहार के सभी 243 विधानसभा की जनता के बीच ले जाएंगे.
मुस्लिम घोषणापत्र में कुल 18 मुद्दे दिए गए हैं. जिनमें कुछ महत्वपूर्ण मुद्दे इस प्रकार हैं.मुसलमानों और दलितों के प्रोटेक्शन के लिए विशेष कानून बनाना , CAA, एनआरसी के प्रदर्शनकारियों पर से मुकदमा वापस लेना, मुसलमानों को नौकरी और शिक्षा के क्षेत्र में 11% आरक्षण देना, मॉब लिंचिंग के केस में डीएम और एसपी पर जिम्मेदारी डाल कर उन्हें सस्पेंड करना, मदरसों का मॉडर्नाइजेशन, पांचवी क्लास तक मातृभाषा में शिक्षा, अल्पसंख्यक लड़कियों के लिए दलित लड़कियों के जैसा शिक्षा का इंतजाम करना , मुस्लिम युवाओं के लिए कोचिंग संस्थानों की स्थापना करना , सीमांचल के सभी जिलों में AIIMS पैटर्न का अस्पताल बनाना, शिया और सुन्नी वक्फ बोर्ड के कामकाज का सोशल ऑडिट करवाना ताकि वक्त संपत्तियों के संबंध में होने वाले भ्रष्टाचार पर काबू पाया जा सके, अल्पसंख्यक इसकीमो का बजट बढ़ाया जाना और इस बात को सुनिश्चित करना कि अल्पसंख्यक स्कीमों का पैसा वापस नहीं लौटे बल्कि पूरी तरह से खर्च हो, एवं दूसरे कई महत्वपूर्ण मुझे भी दिए गए हैं.

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