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अमीर-ए-शरीयत का चुनाव इमारत के संविधान के मुताबिक फुलवारीशरीफ़ मुख्यालय में अतिशीघ्र हो:इमारत तहफ़्फ़ुज़ कमिटी

  • अमीर शरीअत के चुनाव की सरगर्मियां हुईं तेज़, इमारत तहफ़्फ़ुज़ कमिटी के प्रतिनिधिमंडल ने किया इमारत का दौरा,कई अहम तजवीज़ पेश की।
  • अमीर-ए-शरिया का चुनाव इमारत के मुख्यालय फ़ुलवारी शरीफ़ में हो।
  • इमारत की अरबाब हल-ओ-अक़द कमिटी जो अमीर-ए-शरीयत के चुनाव के लिए वोट करती है उसमें अगले अमीर के चुनाव तक सदस्यता अभियान चलाकर उन जगहों की जगह नए सदस्य नहीं बनाए जाएंगे जो सदस्यों की मौत से ख़ाली हो गई है।
  • प्रतिनिधिमंडल ने मौजूदा नायब अमीर-ए-शरीयत की नियुक्ति पर सवाल करते हुए उस पत्र की वैधता पर सवाल खड़े किए और उस पत्र को सार्वजनिक करने की मांग की जिसको नाज़िम ने सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा कि हम इमारत की कमिटियों को जवाब देने को बाध्य है हर आम-ख़ास को नहीं।
  • इमारत तहफ़्फ़ुज़ कमिटी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अमीर का चुनाव पूर्व में हुए सातों अमीर के तर्ज पर पूरे अमन शांति और ईमानदारी से कराया जाए। इसमें किसी प्रकार का भेदभाव और पक्षात से इमारत पर लोगों का विश्वास टूटेगा जिसको बिहार झारखंड-उड़ीसा के मुसलमान किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे

 

पटना:इमारत शरिया बिहार झारखंड ओडिशा के अमीर शरीअत मौलाना वली रहमानी के इंतकाल के बाद अमीर शरीअत के चुनाव के लिए विभिन्न धरों के द्वारा सरगर्मियां तेज़ हो गयी हैं।गुटबाज़ी में बंटे इमारत शरिया के अलग अलग लोगों के द्वारा अलग अलग तरीक़ों से अपने लोगों को इस पद पर बैठाने की कवायद भी तेज हो गयी है।इसी सिलसिले में गुरुवार एक जुलाई को इमारत तहफ़्फ़ुज़ कमिटी की बैठक हुई जिसमें बिहार के अलग अलग जिलों से आये उलेमा और दानिशवरों ने भाग लिया।इस आशय की जानकारी अपने फेसबुक एकाउंट पर साझा करते हुए तनवीर आलम अलीग जेनरल सेक्रेटरी इमारत तहफ़्फ़ुज़ कमिटी ने बताया कि सभा को संबोधित करते हुए कमिटी के अध्यक्ष मौलाना बदिउज़्ज़मा नदवी ने कहा कि इमारते शरिया बिहार- झारखंड-उड़ीसा के मुसलमानों का क़ीमती धरोहर है जिसको हमारे बुजुर्गों ने अपने ख़ून-पसीने से सींचा है जिसपर बिहार- झारखंड- उड़ीसा के मुसलमानों को फ़ख्र है। इमारते शरिया मुसलमानों की रूह है और उसकी हिफाज़त हर मुसलमान का मिल्ली फ़रीज़ा है।इस मीटिंग में बिहार के अलग अलग जिलों से आये आलिमों और बुद्धिजीवियों की साझा राय से इमारत तहफ़्फ़ुज़ कमिटी का 3 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल मौलाना बदिउज़्ज़मा क़ासमी, सदर इमारत तहफ़्फ़ुज़ कमिटी, मौलाना रियासतुल्लाह क़ासमी, नायब सदर इमारत तहफ़्फ़ुज़ कमिटी, तनवीर आलम अलीग, जेनरल सेक्रेटरी इमारत तहफ़्फ़ुज़ कमिटी ने इमारते शरिया के नाज़िम मौलाना मोहम्मद शिबली क़ासमी से समय लेकर मिलने इमारते शरिया के हेड ऑफिस, फ़ुलवारी शरीफ़ पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल ने मौलाना शिबली क़ासमी के सामने इमारत के अमीर के चुनाव और इमारत के दस्तूर से जुड़ी निम्नलिखित बातें रखीं-
1-अमीर-ए-शरिया का चुनाव इमारत के मुख्यालय फ़ुलवारी शरीफ़ में हो।
2-इमारत की अरबाब हल-ओ-अक़द कमिटी जो अमीर-ए-शरीयत के चुनाव के लिए वोट करती है उसमें अगले अमीर के चुनाव तक सदस्यता अभियान चलाकर उन जगहों की जगह नए सदस्य नहीं बनाए जाएंगे जो सदस्यों की मौत से ख़ाली हो गई है।
3-प्रतिनिधिमंडल ने मौजूदा नायब अमीर-ए-शरीयत की नियुक्ति पर सवाल करते हुए उस पत्र की वैधता पर सवाल खड़े किए और उस पत्र को सार्वजनिक करने की मांग की जिसको नाज़िम ने सिरे से ख़ारिज करते हुए कहा कि हम इमारत की कमिटियों को जवाब देने को बाध्य है हर आम-ख़ास को नहीं।
4-इमारत तहफ़्फ़ुज़ कमिटी प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अमीर का चुनाव पूर्व में हुए सातों अमीर के तर्ज पर पूरे अमन शांति और ईमानदारी से कराया जाए। इसमें किसी प्रकार का भेदभाव और पक्षात से इमारत पर लोगों का विश्वास टूटेगा जिसको बिहार झारखंड-उड़ीसा के मुसलमान किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे।इमारत तहफ़्फ़ुज़ कमिटी के प्रतिनिधि मंडल को जिसमें नाज़िम मोहम्मद शिबली क़ासमी के साथ मुफ़्ती सुहैल अहमद नदवी, मुफ़्ती सनाउल होदा क़ासमी, मौलाना अरशद रहमानी और मौलाना अहमद क़ासमी वैगरह ने यक़ीन दिलाया कि अमीर ए शरीयत का इंतखाब दस्तूर ए इमारत के दायरे में होगा।इमारत तहफ़्फ़ुज़ कमिटी की मीटिंग में जो लोग उपस्थित थे उनमें मौलाना रियासतुल्लाह क़ासमी, देवबंद, तनवीर आलम अलीग, सीतामढ़ी, नदीम, सालिक, ज़ाहिद, क़ारी अनवारुल हक़, हारून नगर, मौलाना मोहम्मद युसुफ क़ासमी, समस्तीपुर, अनवार आलम, फ़ुलवारी शरीफ़, मोहम्मद अतीकुर्रहमान, जमील अहमद, मौलाना नुरुल्लाह नोमानी, सहरसा, अशफ़ाक़ अहमद, चंपारण, मौलाना अब्दुस समद मज़ाहरी, मुज़फ़्फ़रपुर, मौलाना मोइनुररशिद नदवी, वैशाली, मौलाना मोहम्मद निज़ामुद्दीन, गिरिडीह, झारखंड, मौलाना मोहम्मद फ़िरोज़ मज़ाहरी, औरंगाबाद, क़ारी अनवर, फ़ुलवारीशरीफ, मुफ़्ती सादिक़ अहमद खां क़ासमी, मौलाना नेमतुल्लाह नदवी, दरभंगा वगैरह मुख्य थे।

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