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यू मिस्ड ए कॉल फ्रॉम विनोद दुआ…!

 

◆ डॉक्टर राकेश पाठक

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कभी कभी ज़िंदगी में एक मिस्ड कॉल किसी के साथ दिल के तार जोड़ देता है जो हमेशा झंकृत करते रहते हैं।ऐसा ही एक मिस्ड कॉल(असल में दो कॉल) विनोद दुआ सर के नाम से मेरे जेहन में दर्ज़ है। अब उनके जाने के बाद बार बार झनझना रहा है।बीते बरस अक्टूबर महीने की 19 तारीख़ थी। रात आठ बज कर चार मिनट और आठ बज कर पांच मिनट पर मेरे मैसेंजर पर दो नोटिफिकेशन चमके… यू मिस्ड ए कॉल फ्रॉम विनोद…।(शायद मैं किसी कॉल पर था इसलिए उनकी घंटी नहीं सुनाई दी।)देखा तो विनोद दुआ सर के मैसेंजर से कॉल थे।एक पल को हैरान रह गया। वे मेरी फ्रेंड लिस्ट में थे और यदाकदा किसी पोस्ट पर छोटा मोटा कमेंट करते थे।कोरोना काल में जब मैं फ़ेसबुक लाइव करता था तब वे ज़रूर मुझे सुनते थे।वैसे मेरी उनसे सिर्फ़ दो मुलाक़ातें थीं…एक दिल्ली में कांस्टीट्यूशन क्लब में आलोक तोमर स्मृति समारोह और दूसरी आईटीएम यूनिवर्सिटी के कार्यक्रम में। वे मुझे ज्यादा जानते भी हैं उस समय तक यह भी नहीं पता था।उनके दो दो मिस्ड कॉल देख कर फ़ौरन रिंग बैक किया।उधर से आवाज़ आई – राकेश जी मेरा नाम विनोद दुआ है…क्या मैं आपसे दो मिनट बात कर सकता हूँ?मैंने कहा ये मेरा सौभाग्य है कि आपने कॉल किया। आदेश कीजिये। क्या आप मुझे जानते हैं सर?उन्होंने कहा -मैं आपको बहुत दिनों से जानता हूँ ।आप लगातार और बहुत अच्छा लिख रहे हैं।मेरे लिये उनके ये शब्द किसी अवार्ड की तरह थे।विनोद सर ने कहा कि आपकी एक फ़ेसबुक पोस्ट का अपने शो में उपयोग करना चाहता हूं। क्या आप इसकी इजाज़त देंगे?मैं पहले ही निःशब्द और अब इस विनम्रता से सन्न रह गया।मैंने कहा- सर आपको कभी इजाज़त की ज़रूरत नहीं। ये तो मेरी ख़ुशकिस्मती है कि आपके शो में मेरा नाम और लिखे हुए का उल्लेख होगा।उसके बाद यह सिलसिला चलता रहा। फोन पर गाहे बगाहे बात होती रही।उन्होंने मेरी कई पोस्ट अपने शो में मेरी फोटो के साथ लगाईं।गज़ब ये कि हर बार फोन करके अनुमति लेते थे जबकि मैं हर बार यही कहता था कि आपका हक़ है।वे बेहद शालीन और विनम्र थे। बड़प्पन से भरे पूरे। जितने बड़े पत्रकार थे उससे कहीं बड़े इंसान थे। उसूलों पर डटे रहने वाले योद्धा थे विनोद सर।जब सुप्रीम कोर्ट ने उन पर दर्ज़ देशद्रोह का मुक़दमा ख़त्म किया तब मैंने उस पर वीडियो बनाया था।उन्हें उसे दिल खोल कर सराहा।विनोद दुआ सर भारत की पत्रकारिता में आप जैसा दूसरा कोई नहीं और न कभी होगा।बहुत याद आएंगे आप।अलविदा।

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