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बोचहां:राजद की जीत में भूमिहार की भूमिका गढ़ने की तैयारी

पटना:बिहार की बोचहां विधानसभा उपचुनाव की जीत को मीडिया के एक बड़े वर्ग ने भूमिहार के राजद के साथ देने की वजह से बताना शुरू कर दिया है।ये दरअसल घुसपैठ के माध्यम से हर एक राजनीतिक दल में अपनी मजबूत स्थिति बनाये रखने की सटीक चालबाज़ी है।मीडिया के एक बड़े वर्ग को ये एहसास हो चला है कि बिहार में यादव मुस्लिम समीकरण लालू राबड़ी के शासनकाल की तरह ही गोलबंद हो गया है ऐसे में अगर इस बात को नहीं थोपा गया कि राजद की जीत में सवर्णों का भी किरदार है तो ऐसी स्थिति में स्वर्ण समाज राजद की तज़ार में हाशिये पर चला जाएगा जो कहीं से भी समाज के लिए अच्छा नहीं है।मीडिया का एक बड़ा वर्ग ये बख़ूबी जानता है कि भविष्य में राजद नित गठबंधन सरकार के आने की प्रबल संभावना है ऐसे में अगर उस सरकार में भी सवर्णों की भूमिका बनाये रखने के लिए इस तरह की प्लांटेड खबरें तैयार करके मुस्लिम यादव समीकरण के सहारे जीत हासिल करने वाली राजद पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की कोशिशें जारी हैं।35 हज़ार भूमिहार वाले इस सीट पर 20 से ज्यादा मुसलमान हैं तो यादव भी 35 हज़ार हैं ।इसके अलावा सहनी वोट यहां सबसे ज़्यादा 60 लाख के आसपास है।दूसरी तरफ ये सर्व विदित है कि भूमिहार भाजपा का परंपरागत वोट बैंक रहा है।परिस्थितियां जो भी रहे वो भाजपा को ही वोट देता है।हर बार की तरह इस बार भी भूमिहार भाजपा के खाते में गया लेकिन मीडिया का एक बड़ा धरा राजद की जीत में भूमिहारों की भूमिका बनाकर अपना उल्लू सीधा करने की जुगत में दिखाई दे रहा है।
दरअसल यहां भाजपा की हार की पटकथा 60 हज़ार आबादी वाले सहनी वोटरों ने लिखी है।जिस तरह से भाजपा ने अपनी सहयोगी विकास शील इंसान पार्टी और उसके मुखिया मुकेश सहनी को बेइज़्ज़त करके पहले उसके विधायकों को अपनी पार्टी में किया,फिर मुकेश सहनी को मंत्री मंडल से बाहर किया वैसी सूरत में बोचहां के सहनी वोटरों ने अपनी नाराजगी का इज़हार करते हुए पिछले चुनाव के मुकाबले इसबार अपना हाथ और साथ खींच लिया जिसका नतीजा है कि आज बोचहां से भाजपा की हार हुई है।वरना भाजपा ने अपना पूरा शाम,दाम दण्ड भेद इन्हीं छोटी जातियों को अपनी ओर खींचने में लगा रखा था।वो ये मानकर चल रही थी कि भूमिहारों का वोट तो उसे किसी भी हाल में मिलेगा ही।और हक़ीक़त भी है कि जो भी वोट भाजपा प्रत्याशी बेबी कुमारी को मिले हैं वो इन्हीं सवर्णों के हैं जो परंपरागत तौर पर इन्हें मिलते रहे हैं।ऐसे में ये कहना कि भूमिहार वोट राजद को मिला है ये महज़ मीडिया के एक वर्ग का प्रोपेगेंडा भर है।

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