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Coal Shortage India:देश मे बिजली संकट गहराया, 38 सालों में सबसे ज्यादा डिमांड,inside story

नई दिल्ली:भारत में जैसे जैसे गर्मी का पारा चढ़ रहा है वैसे वैसे देश में बिजली संकट गहराता जा रहा है।देश में बिजली की डिमांड रिकॉर्ड स्तर को पार कर गई है।हालात ये हैं कि 85 पावर प्लांट में कोयला खत्म होने वाला है।भीषण गर्मी के बीच देश में बिजली संकट अब डराने लग गया है।देश में बिजली की डिमांड इतनी बढ़ गई कि मंगलवार को बिजली की मांग का एक नया रिकॉर्ड ही बन गया।एक दिन में बिजली की सबसे ज्यादा मांग मंगलवार को 201.066 गीगावॉट दर्ज की गई है।
भारत में इन दिनों बिजली संकट की खबरें प्रमुखता से देखने को मिल रही है। यह संकट बिजली की रिकॉर्ड मांग और बिजली संयंत्रों में कम कोयले की खपत वजह से उत्पन्न होने की आशंका है। खबरों के मुताबिक पिछले एक हफ्ते में भारत में बिजली की कमी 623 मिलियन यूनिट जान एम यू तक पहुंच चुकी है। यह कमी पिछले महीने मार्च के महीने में हुई कुल कमी से ज्यादा है। भारत के थर्मल पावर प्लांट ओं में कोयले के कम स्टॉक होने की वजह से अप्रैल के महीने में भारत के विभिन्न राज्यों जैसे झारखंड राजस्थान उत्तर प्रदेश पंजाब महाराष्ट्र मध्य प्रदेश बिहार आंध्र प्रदेश और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर सहित कई राज्यों में सरकारों ने बिजली कटौती करनी शुरू कर दी है।
क्या है वजह
मीडिया में आ रही खबरों के अनुसार पिछले 2 सालों में कोरोना मरीज की वजह से आय आर्थिक सुधार के कारण मांग के बढ़ने और आयात किए जाने वाले कोयला आधारित बिजली संयंत्रों से कम बिजली आपूर्ति के कारण घरेलू कोयले का उपयोग करने वाले ताप विद्युत संयंत्रों पर दबाव बढ़ गया है। मंत्रालय से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार यह संकट इसलिए भी खड़ा हुआ है क्योंकि कुछ राज्य द्वारा कोयला कंपनियों को भुगतान में देरी की जा रही है।
कितनी बढ़ी मांग
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत के बड़े हिस्से में भीषण गर्मी की वजह से पिछले एक-दो दिनों में बिजली की मांग में 200 गीगावाट को पार कर गई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इन दिनों में बिजली की मांग पूरी नहीं हो पा रही है।
खबरों के मुताबिक पिछले 1 सप्ताह में झारखंड को बिजली की कुल मांग का 17.3% कब मिला। उसी तरह जम्मू और कश्मीर और लद्दाख के केंद्र शासित प्रदेशों को 11.6% कम बिजली मिली जबकि राजस्थान में 9.6% कम बिजली मिली।
देशभर के पचासी पावर प्लांट में कोयला का संकट खड़ा होने के बाद आने वाले समय में देश में और भी बिजली कटौती के मामले बढ़ेंगे और संकट और बढ़ सकता है। इसका एक कारण पावर प्लांट की शिकायत है कि रेलवे की कमी की वजह से कोयला मिलने में देरी हो रही है।


थर्मल पावर प्लांट के हालात
वर्तमान समय में देश के प्रमुख थर्मल पावर प्लांट की बात करें तो कुल मिलाकर देश भर के पचासी थर्मल पावर प्लांट में कोयला खत्म होने की कगार पर है। यह पावर प्लांट राजस्थान में 7 में से 6 हैं। इसी तरह पश्चिम बंगाल के सभी 6 पावर प्लांट उत्तर प्रदेश के चार में से तीन मध्य प्रदेश के चार में से तीन महाराष्ट्र के सभी साथ और आंध्र प्रदेश के सभी 3 प्लांट में कोयले का स्टॉक फिजिकल कंडीशन में पहुंच चुका है। यह संकट आने वाले दिनों में और भी बन सकता है अगर इस ओर ध्यान नहीं दिया गया।
किस राज्य के पास कितना कोयला
मीडिया में आ रही खबरों के मुताबिक कोयला संकट का विभिन्न राज्यों पर गहरा असर पड़ने वाला है क्योंकि इन राज्यों में कोयले एक सीमित स्टॉक तक हैं जिनके खत्म होते ही बिजली की सप्लाई का भयानक संकट उत्पन्न हो सकता है। जानकारी के मुताबिक उत्तर प्रदेश के पास सिर्फ 7 दिनों का स्टॉक बचा है वही हरियाणा के पास 8 दिनों का स्टॉक बचा है जबकि राजस्थान के पास 17 दिनों का मध्य प्रदेश महाराष्ट्र गुजरात झारखंड और छत्तीसगढ़ में भी कोयले की स्टॉक की स्थिति इसी तरह है।
बिजली संकट की वजह
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत में बिजली संकट की एक वजह यह भी है कि भारत का 2000000 टन कोयला पोर्ट पर कई महीनों से फंसा हुआ है। खबरों के मुताबिक यह कोयला भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरी करने के लिए ऑस्ट्रेलिया से मंगवाया था। आपको बताते चलें कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरत को पूरा करने के लिए इंडोनेशिया ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका से भी कोयला आयात करता है। भारत में कुल आयातित होने वाले कोयले का 70 फ़ीसदी कोयला ऑस्ट्रेलिया के आता है। दक्षिण भारत के बिजलीघर झारखंड और छत्तीसगढ़ से कोयला मंगाने के बजाय ऑस्ट्रेलिया से कोयला मंगवाते हैं। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोल इम्पोर्टर भी है।

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कोयला सचिव ने किया बचाव
रविवार को कोयला सचिव एके जैन ने देश में गहराए बिजली संकट के लिए कोयले की कमी को वजह मानने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस बिजली संकट की प्रमुख वजह विभिन्न ईंधन स्त्रोतों से होने वाले बिजली उत्पादन में आई बड़ी गिरावट है। उन्होंने कहा कि ताप-विद्युत संयंत्रों के पास कोयले का कम स्टॉक होने के लिए कई कारक जिम्मेदार हैं। कोविड-19 के प्रकोप में कमी आने के बाद अर्थव्यवस्था में तेजी आई और बिजली की मांग बढ़ी, इसके अलावा इस साल जल्दी गर्मी शुरू हो जाना, गैस और आयातित कोयले की कीमतों में वृद्धि होना और तटीय ताप विद्युत संयंत्रों के बिजली उत्पादन का तेजी से गिरना जैसे कारक बिजली संकट के लिए जिम्मेदार हैं।
कोयला मंत्री का बड़ा दावा 
एक ओर जहां देश में बिजली संकट गहराया हुआ है, तो सरकार के मंत्री आंकड़े पेश करते हुए सरकार का बचाव कर रहे हैं। जहां कोयला सविव ने बिजली संकट के लिए कोयले की कमी को वजह मानने से इनकार कर दिया। वहीं कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी के बीते शनिवार को दिए बयान के मुताबिक, वर्तमान में 7.250 करोड़ टन कोयला सीआईएल, सिंगरेनी कोलियरीज कंपनी लिमिटेड (एससीसीएल) और कोल वाशरीज के विभिन्न स्रोतों में उपलब्ध है। इसके साथ ही उन्होंने ताप विद्युत संयंत्रों के पास 2.201 करोड़ टन कोयला उपलब्ध होने का भी दावा किया है।

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