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राजनीति

ममता बनर्जी की तुनक मिज़ाजी

सुश्री ममता बनर्जी की तुनक मिज़ाजी व ज़िद का एक क़िस्सा ।वर्ष 2011 में सुश्री ममता बनर्जी बंगाल की मुख्यमंत्री बन गई थी । इससे पहले वह यूपीए सरकार में रेल मन्त्री के पद पर थी।यूपीए सरकार मे टीएमसी के कोटे से रेल मन्त्री बनना था तो श्री दिनेश त्रिवेदी को जुलाई 2011 में रेल मन्त्री पद की शपथ दिलाई गई । श्री त्रिवेदी एक उच्च शिक्षित, खुले विचारों वाले , अनुभवी व बेहद सुलझे हुऐ नेता थे । मार्च 2012 में उन्होंने अपना पहला रेल बजट संसद में प्रस्तुत किया था । बजट में उन्होंने रेलवे के चहुमुखी विकास और उसे आत्म निर्भर बनाने के लिये कई योजनाऐ रखी थी । रेलवे किराये को तय करने के लिये उन्होंने ‘ रेल रेगुलेटर’ बनाने का सुझाव रखा था ।रेलवे बोर्ड को भी पूरी तरह तर्क संगत व जवाबदेह बनाना चाहते थे । उनका प्रस्ताव था कि रेलवे खुद अपने संसाधनों को विकसित करे व केंद्रीय बजट के भरोसे न रहे । श्री त्रिवेदी का यह मानना था कि रेलवे को स्वायत्त व हर तरह की राजनीति से दूर रखा जाये । श्री त्रिवेदी ने बजट में इसी के दृष्टिगत रेल किराये में मामूली वृद्धि का प्रस्ताव रखा था । श्री त्रिवेदी के रेल बजट की आम जनता, मीडीया, उद्योग जगत व रेलवे की सभी पॉचो यूनियनों ने सराहना की थी ।

 

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सुश्री ममता बनर्जी जो तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष भी थी को यह बजट बिल्कुल पसंद नहीं आया और इतनी नाराज़ हुई कि श्री त्रिवेदी से तत्काल रेल मन्त्री के पद से इस्तीफ़ा देने को कह दिया तथा प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह जी को भी पत्र लिखा कि वह श्री त्रिवेदी को रेल मन्त्री के पद से बर्खास्त कर दे। प्रधानमंत्री श्री मनमोहन सिंह इसके लिये तैयार नहीं हुऐ क्योंकि रेलवे बजट को संसद में रखने से पहले उनकी पूरी कैबिनेट ने इसकी स्वीकृति दी थी ।सुश्री ममता बनर्जी ने इसे अपनी प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया था और इस बात पर वह यूपीए सरकार से समर्थन वापस लेने तक को तैयार हो गई थी पर तब श्री त्रिवेदी ने रेल मन्त्री पद से स्वयं इस्तीफ़ा देते हुऐ कहा था कि वह इसलिए इस्तीफ़ा दे रहे है ताकि यूपीए सरकार को इस कारण किसी असुविधा जनक स्थिति का सामना न करना पड़े।

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सुश्री ममता बनर्जी कीं तुनक मिज़ाजी, अनावश्यक ज़िद और किसी अन्य की लोकप्रियता को बर्दाश्त न करने की आदत के कारण देश ने एक बेहतरीन रेल मन्त्री तो खो ही दिया था साथ ही सुश्री ममता बनर्जी महोदया के अहंकार, ईर्ष्या और उनकी क्षुद्र मानसिकता को भी उजागर किया था।

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