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उधार लिया हुआ मटका

एक स्त्री ने जरूरत पड़ने पर अपनी पड़ोसन से एक मटका उधार ले लिया। एक-दो दिन उसका प्रयोग करने के बाद वह मटका उसने लौटा दिया। परन्तु साथ ही उसने एक छोटा-सा मटका और भी लौटाया।”यह छोटा मटका मेरा नहीं है, बहन” पड़ोसन बोली ।”यह छोटा मटका तुम्हारा ही है। क्योंकि तुम्हारे बड़े मटके ने इसे जन्म दिया है” स्त्री ने कहा। अतः पड़ोसन अत्यन्त प्रसन्न हो गई और उसे पूरा विश्वास हो गया कि वह स्त्री बहुत ईमानदार है।

एक सप्ताह के बाद उस स्त्री ने उसी पड़ोसन से वही मटका फिर उधार लिया। परन्तु इस बार उसने मटका नहीं लौटाया । कुछ दिन प्रतीक्षा करने के बाद पड़ोसन अपना मटका मांगने।आयी तो स्त्री बोली, “आपका मटका तो मर चुका है।मटके भी कभी मरते हैं ? “पड़ोसन ने पूछा।” क्यों नहीं मरते ? जो मटका पुत्र को जन्म दे सकता है, वह मर क्यों नहीं सकता है, स्त्री ने उत्तर दिया।

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