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बिहार सरस मेला में हस्तशिल्प की भारी मांग

पटना:स्वयं सहायता समूह से जुड़कर ग्रामीण महिलायें स्वावलंबन एवं सशक्तिकरण की ओर अग्रसर हैं l इसकी बानगी गाँधी मैदान, पटना में आयोजित बिहार सरस मेला में प्रदर्शित हो रही है l जहाँ देश के उन्नीस राज्यों की ग्रामीण महिलाएं एक कुशम उद्धमी के रूप में ग्रामीण, शिल्प, हुनर, कला एवं व्यंजन को लेकर उपस्थित हैं l बिहार सरस मेला में बिहार, झारखंड, हरियाणा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, उड़ीसा, केरला, आसाम, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, मणिपुर, मेघालय, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड , राजस्थान, मध्य प्रदेश एवम जम्मू कश्मीर की स्वयं सहायता समूह और स्वरोजगारी अपने शिल्प, कला एवं उत्पाद को लेकर उपस्थित हैं। बिहार सरस मेला ग्रामीण विकास विकास विभाग के तत्वाधान में जीविका द्वारा 15 से 29 दिसंबर तक आयोजित है l ग्रामीण शिल्प को प्रोत्साहन देने एवं ग्रामीण महिलाओं और हुनरमंदों को सशक्त बनाने के उद्देश्य से आयोजित सरस मेला में ग्रामीण शिल्प, कला, उत्पाद और व्यंजनों के 489 स्टॉलों पर आगंतुकों के लिए आकर्षण के केंद्र बने हुए हैं l

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हस्तशिल्प की भारी मांग है और खरीददार अपने बजट के हिसाब से खरीददारी कर रहे हैं l बोरिंग रोड से आई सोनी बताती हैं कि घर के लिए हर उपयोग की सामान सरस मेला में मौजूद है l और जी चाहता है कि सब कुछ खरीद लूँ l वहीँ स्टॉल धारक भी सरस मेला के क्रेज और आगंतुकों के रुख को देखकर काफी खुश हैं l मणिपुर से आई नाउचा बिहार में हस्त शिल्प को मिल रहे प्रोत्साहन एवं उसकी बिक्री से काफी खुश हैं l नाउचा वाटर लिली के डंठल से डोलची, बैग, पर्स, दरी, कुषाण आदि घरेलु सजावट के सामान बनती हैं l वो बताती है कि बिहार में उनके उत्पाओं की बड़ी मांग है l सरस मेला के माध्यम से उनके उत्पाद आसानी से बिक जाते हैं l बिहार ने उन हे सशक्तिकरण की राह दिखाई है l पिछले 6 साल से नाउचा सरस मेला में अपने हस्तशिल्प को लेकर आ रही हैं l प्रति मेला वो पचास हजार कमा लेती हैं l इसके लिए वो जीविका को शुक्रिया भी अदा करती हैं l सरस मेला में 195 स्टॉल पर जीविका समूह की ग्रामीण उद्धमियों , 145 स्टॉल स्वरोजगारियों , 38 स्टॉल विभिन्न विभाग, बैंक, संस्थान एवं अन्य राज्यों के आजीविका मिशन के 68 स्टॉल पर उत्पाद प्रदर्शनी, एवं बिक्री के साथ ही आगंतुकों को जागरूक करने के उद्देश्य से लगाये गए हैं l स्टॉल और ओपन एरिया में आगंतुक ग्रामीण शिल्प और कलाकृतियों से रूबरू हो रहे हैं l

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मेला के तीसरे दिन शनिवार को आगंतुकों की संख्या में इजाफा हुआ l पचास हजार से ज्यादा लोग आये l आम से लेकर खास तक खरीददारी तो कर ही रहे हैं फूड जोन मे मशरूम का पकौड़ा , मकके की रोटी, चने की साग, खाजा , राजस्थानी कचौड़ी, बारा मिठाई , मशरूम के पकौड़े समेत कई तरह के वयंजनों के स्वाद ले रहे हैं l जीविका दीदियों द्वारा संचालित दीदी की रसोई के व्यंजन के प्रति भी आगंतुकों का आकर्षण देखते ही बन रहा है l कारपेट, टेरकोटा, ड्राई फ्लावर, फर्नीचर के साथ- साथ सजावट और शृंगार के सामानो की खरीद- बिक्री खूब हो रही है l

बिहार के लोक गीत एवं नृत्य से सरस मेला परिसर गुलजार है l दोपहर में सास्कृतिक मंच पर महिला विकास निगम के तत्वाधान में ठिठोली संस्था के लोक कलाकारों ने बाल विवाह एवं दहेज़ प्रथा पर आधारित नाटकों और गीत की प्रस्तुति की l तत्पश्चात संध्या काल में मुस्कान सांस्कृतिक मंच, पटना के लाल्केश्वर एवं राकेश कुमार ने पारम्परिक एवं देवी गीतों की प्रस्तुति की l इसके बाद कला संस्कृति एवं युवा विभाग के तत्वाधान में लोक गीत एवं नृत्य की प्रस्तुति हुई l इस कार्यक्रम के अंतर्गत जन जागरूकता कार्यक्रम के तहत एक बेटी और पिता के बीच के संवाद को गीत के माध्यम से गुडिया गिरी ने प्रस्तुत किया l प्रस्तुत गीत के तहत बेटी अपने पिता से कहती है कि पिता जी आपने इंटर और बी.ए तो करा दिया है इसलिए मेरी शादी भी पढ़े-लिखे घर में कीजियेगा l वहीँ प्रियंका, निहारिका , निशा एवं अनीता ने गोदना नृत्य पेश किया l

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सेमिनार हॉल में सामाजिक विकास विधा, जीविका द्वारा बदलते मौसम के कारण एवं उससे बचाव के तरीके, सोलर उर्जा का उपयोग से फायदे पर चर्चा की गई l इस सेमिनार में प्रबंधक, सामाजिक विकास, गया और नवादा तथा अमित कुमार, सलाहकार ने अपना विचार रखा l सेमिनार में स्वच्छ ऊर्जा जैसे सुर्य ऊर्जा, वायु ऊर्जा आदि का इस्तेमाल करने को लेकर दर्शकों को प्रोत्साहित किया गया। सरस मेला परिसर में स्वच्छता का खास ख्याल रखा गया है l मेला परिसर में प्लास्टिक प्रतिबंधित है l डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मेला में कैशलेश खरीददारी की व्यवस्था है l जीविका दीदियों द्वारा संचालित पांच ग्राहक केन्द्रों के स्टॉल से रुपये की जमा निकासी हो रही है l मेला परिसर में कई स्थानों का प्रबंधन जीविका दीदियों ने संभाल रखा है l बाइस्कोप , फन जोन और पालना घर आकर्षण के खास केंद्र हैं l मेला सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक चलेगा l प्रवेश निःशुल्क है l

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