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नीतीश कुमार विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं?

  • पटना:बिहार में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के महागठबंधन से अलग होकर एनडीए के साथ सरकार बनाने के बाद 12 फरवरी को सरकार को विश्वास मत हासिल करना है। विश्वास मत हासिल करने से पहले बिहार में जारी और राजनीतिक ड्रामेबाजी अपने शबाब पर हैं। ताज़ा बयान बाजी में राजद के नेता भाई वीरेंद्र ने अपने एक बयान से राजनीतिक हल्का में इस बात को बोल दे दिया है कि संभव है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 12 फरवरी को बिहार विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं।
    सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ओर से ‘खेला होने’ के दावे किए जा रहे हैं।इसी बीच राजद विधायक भाई वीरेंद्र के एक बयान ने खलबली मचा दी है।भाई वीरेंद्र ने दावा किया है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधानसभा भंग की तैयारी कर रहे हैं।उन्होंने कहा कि नई सरकार के पास पर्याप्त संख्याबल नहीं है।इसी कारण से नीतीश कुमार अब विधानसभा ही भंग करने वाले हैं. उन्होंने कहा कि वह ऐसा नहीं होने देंगे।राजद विधायक ने कहा कि हम विधानसभा नहीं भंग करने देंगे, हमारे पास आंकड़े हैं। उन्होंने हम समय पर अपनी संख्या बताएंगे।

एक तरफ कांग्रेस पार्टी ने जहां अपने 19 विधायकों को दिल्ली के बाद हैदराबाद शिफ्ट कर दिया था और ताजा समाचार यह है कि कांग्रेस के सभी विधायक राजधानी पटना पहुंच चुके हैं। दूसरी तरफ खुद को विश्व की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी होने का दावा करने वाली भारतीय जनता पार्टी भी बिहार की राजनीतिक खेल में बेबस नजर आई और उसे भी मजबूरन अपने विधायकों को गया में रखना पड़ा। खबर है कि भारतीय जनता पार्टी के विधायक भी 12 फरवरी को फ्लोर टेस्ट के दिन पटना पहुंचेंगे और फ्लोर टेस्ट में भाग लेंगे। तीसरी तरफ राष्ट्रीय जनता दल के विधायक भी पूर्व उपमुख्यमंत्री और रजत नेता तेजस्वी प्रसाद यादव के आवास पर मौज मस्ती कर रहे हैं और वहीं से कल फ्लोर टेस्ट के लिए विधानसभा पहुंचेंगे।

इस बीच बिहार के राजनीतिक हल्का में तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार गर्म है कोई नीतीश कुमार के द्वारा विश्वास का मत हासिल कर लेने की बात कह रहा है तो कोई खेल होने की बात कर रहा है। आंकड़ों के अनुसार एनडीए गठबंधन मजबूत स्थिति में है और बहुमत प्रशिक्षण में कामयाब होता हुआ दिखाई दे रहा है लेकिन राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी प्रसाद यादव की सक्रियता एनडीए सरकार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है और एनडीए सरकार भी घबराहट में है।
इन सब से इतर राजनीतिक पंडितों का मानना है कि 12 फरवरी का दिन बिहार की राजनीति के लिए अचंभित करने वाला भी साबित हो सकता है । ऐसा इसलिए क्योंकि अगर एनडीए सरकार बहुमत हासिल करने में नाकाम रही तो यह न सिर्फ एनडीए सरकार के लिए बल्कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के लिए भी परेशान करने वाला होगा। क्योंकि ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का राजनीतिक भविष्य पूरी तरह चौपट हो जाएगा।

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राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि जिस तरह की बयान बाजी हो रही है और खेल होने के जिस तरह के दावे किए जा रहे हैं उससे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भयभीत नजर आते हैं। इसकी झलक कल जदयू कोटे के मंत्री श्रवण कुमार के आवास पर  जदयू विधायकों के जुटान के मौके पर भी देखने को मिली थी जहां मुख्यमंत्री नीतीश कुमार 5 मिनट भी नहीं रुके और नाराज होते हुए वहां से निकल गए।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार श्रवण कुमार के आवास पर जदयू के सभी विधायकों के नहीं पहुंचने के कारण मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भारी गुस्से में नजर आए और इसी गुस्से में वह बाहर भी निकल गए।दरअसल, जेडीयू की ओर से अपने विधायकों की एकजुटता का संदेश देने के लिए शनिवार (10 फरवरी) को मंत्री श्रवण कुमार के घर पर भोज का आयोजन किया गया था।इस भोज में जेडीयू के सभी विधायकों को पहुंचना था। लेकिन पार्टी के तकरीबन 5 विधायक भोज में नहीं पहुंचे थे।सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, विधायकों के लापता होने की बात सुनकर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार काफी नाराज हुए थे और भोज को बीच में ही छोड़कर चले आए थे।

राजनीतिक पंडितों का मुताबिक मुख्यमंत्री की यह घबराहट और नाराजगी स्वाभाविक है और ऐसी स्थिति में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कोई अप्रत्याशित फैसला भी ले सकते हैं।यानी 12 फरवरी को फ्लोर टेस्ट के मौके पर अगर मुख्यमंत्री  नीतीश कुमार को जरा सा भी आभास होगा कि उनकी सरकार के साथ खेल होने वाला है तो ऐसी स्थिति में ज्यादा उम्मीद है कि नीतीश कुमार विधानसभा को भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं। बिहार के राजनीतिक हल्का में और मीडिया में भी इस बात की चर्चा जोरों पर है कि विधानसभा अध्यक्ष अवध बिहारी चौधरी ने जिस तरह का रुख अपनाया है उसे फ्लोर टेस्ट के दिन संवैधानिक संकट होना निश्चित है ऐसे में जाने वाला वक्त बताएगा के क्या एनडीए सरकार नीतीश कुमार के नेतृत्व में बहुमत का वोट हासिल करने में कामयाब होती है या फिर अपनी संभावित नाकामी को देखते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार विधानसभा को भंग करने की सिफारिश कर सकते हैं।

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