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चाय नाश्ते की दुकान चलाते हैं वार्ड पार्षद,जनता का काम भी करते हैं

सहरसा:बिहार के सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर में इन दिनों एक चाय-नाश्ते की दुकान चलाने वाले दुकानदार की चर्चा सोशल मीडिया पर जोर-शोर से हो रही है। इस दुकानदार का नाम दिनेश मालाकार है, जो लिट्टी और चाय की दुकान चलाते हैं। उनकी यह दुकान सिमरी बख्तियारपुर नगर परिषद क्षेत्र के रंगीनिया इलाके में स्थित है। खास बात यह है कि दिनेश मालाकार सिमरी बख्तियारपुर नगर परिषद के वार्ड नंबर 14 से वार्ड पार्षद भी हैं। चुनाव जीतने के बाद भी उन्होंने अपनी दुकान पर काम करना नहीं छोड़ा और आज भी अपने परिवार का भरण-पोषण उसी दुकान से कर रहे हैं। उनके इस समर्पण और सादगी की तारीफ हर जगह हो रही है।

दुकान सुबह 4 बजे से खुल जाती है
दिनेश मालाकार अपनी दुकान को हर रोज सुबह 4 बजे खोलते हैं। वे बताते हैं कि अपने परिवार को चलाने के लिए वे आज भी दुकान चलाते हैं, और इसमें उन्हें कोई शर्म महसूस नहीं होती, बल्कि गर्व होता है। उनके अनुसार, कई बार ग्राहक उन्हें सलाह देते हैं कि अब जब वे वार्ड पार्षद बन गए हैं, तो दुकान चलाने की जरूरत नहीं है। लेकिन दिनेश का मानना है कि वार्ड पार्षद का पद समाज सेवा के लिए है, न कि पैसे कमाने के लिए। इसलिए वे दुकानदारी को छोड़ने का कोई इरादा नहीं रखते।

दूसरी बार बने वार्ड पार्षद
दिनेश मालाकार दूसरी बार वार्ड पार्षद बने हैं। इससे पहले 2012 में भी वे नगर पंचायत में वार्ड पार्षद चुने गए थे। उनकी सादगी और ईमानदारी के कारण जनता ने उन्हें फिर से चुना है। दिनेश बताते हैं कि वे सुबह 4 बजे से दोपहर 12 बजे तक दुकान चलाते हैं और उसके बाद अपने वार्ड की सेवा में जुट जाते हैं। चाहे विकास कार्यों की निगरानी हो या कागजी काम करवाना, वे इसे अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। उन्होंने वार्ड में सड़कों और विद्यालय की चारदीवारी का निर्माण करवाया है, और अब छठ घाट के सौंदर्यीकरण के लिए काम कर रहे हैं।

बेटी की शादी के लिए जुटा रहे हैं पैसे
चाय-नाश्ते की दुकान चलाते हुए वार्ड पार्षद का काम करना बिहार में एक अनोखी मिसाल बन गया है। आम धारणा यह है कि वार्ड पार्षद बनने के बाद लोगों की जिंदगी बदल जाती है, लेकिन दिनेश मालाकार ने इस धारणा को तोड़ दिया है। वे बताते हैं कि उनकी दो बेटियां हैं, जिनमें से एक की शादी खगड़िया जिले के पसराहा में कर दी है। अब वे अपनी दूसरी बेटी की शादी धूमधाम से करने के लिए दुकानदारी से पैसे जुटा रहे हैं। उनका कहना है कि जब दूसरी बेटी की शादी हो जाएगी, तो वे निश्चिंत होकर समाज के विकास कार्यों में और भी अधिक योगदान देंगे।

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