मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में दूषित पेयजल ने तबाही मचा दी है। भागीरथपुरा इलाके में जहरीले पानी की आपूर्ति से अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 200 से अधिक लोग बीमार हैं। सबसे ज्यादा प्रभावित पान वाली गली और आसपास की बस्तियां हैं, जहां एक महीने से नलों से गंदा पानी सप्लाई हो रहा था। मेडिकल जांच में पानी में खतरनाक बैक्टीरिया पाए गए हैं, जिसके बाद स्वास्थ्य विभाग ने हैजा फैलने की आशंका जताई है।
इस त्रासदी ने कई हंसते-खेलते परिवार उजाड़ दिए। किसी ने मां खो दी, तो किसी की गोद से नवजात छिन गया। पांच माह के मासूम अव्यान साहू की मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। वहीं, संजय यादव की मां की जहरीला पानी पीने से मौत हो गई और उनका बेटा अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की।
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि वे इस घटना के लिए खुद को भी जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि दूषित पानी की शिकायतें पहले से मिल रही थीं। नगर निगम आयुक्त ने भी पुष्टि की है कि जांच रिपोर्ट में पानी पीने योग्य नहीं पाया गया। फिलहाल नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार सैंपल जांच, मरीजों का इलाज और क्षेत्र में निगरानी बढ़ाई गई है, लेकिन सवाल अब भी कायम है— इन मौतों का जिम्मेदार आखिर कौन है?
मंत्री विजयवर्गीय ने कहा- इस घटना के लिए मैं खुद जिम्मेदार मानता हूं
विजयवर्गीय ने कहा कि वे इस शहर के जनप्रतिनिधि हैं। इस घटना के लिए वे खुद को भी जिम्मेदार मानते हैं। उन्होंने कहा रहवासी कई दिनों से गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे कि भागीरथपुरा के पार्षद ने निगमायुक्त को इसकी शिकायत की थी। इसकी एक कॉपी उन्होंने मुझे दी थी। उसे भी मैंने निगमायुक्त को भेज दिया था। विजयवर्गीय ने कहा कि हमारी सरकार है। गलती हमारे अधिकारी की है तो उसे हम भी अपनी जिम्मेदारी मानेंगे।

