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कहानी पैथोलॉजी लैब के ग़लत रिपोर्ट की

पटना के वरिष्ठ पत्रकार ज्ञानेश्वर वात्स्यायन के अपनी फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट शेयर किया है।(पढ़ने के लिए क्लिक करें)।पोस्ट में ज्ञानेश्वर लिखते हैं कि पटना में एक मौर्या लैब है । कहीं राजेंद्र नगर में । लोग बता रहे, पैथोलॉजी में नाम भी बहुत है । लेकिन, इनकी रिपोर्ट कैसी होती है, अभी – अभी के एक हादसे से समझिए । मेरे एक मित्र हैं, बहुत ही करीबी । उनकी मां को कुछ परेशानी हुई । डॉक्टर ने कुछ टेस्ट लिखी ।
नाम बड़ा था, इसलिए मौर्या लैब गए । रिपोर्ट आई । फिर, तो तनाव का पहाड़ खड़ा हो गया । रिपोर्ट में मां को कैंसर बता दिया गया । समझ सकते हैं, इसके बाद परिवार की क्या स्थिति हुई होगी । लेकिन, अच्छी बात ये कि मेरे दोस्त के पास भगवान का दिया बहुत कुछ है । वे मां को लेकर सीधे मुंबई निकल गए । टाटा कैंसर संस्थान में पहुंचे ।
अब फिर से टेस्ट दर टेस्ट शुरु हुए । लेकिन, यहां टेस्ट की हर रिपोर्ट ने कहना शुरु किया – कैंसर तो है नहीं । फिर भी शक की कोई गुंजाईश नहीं छोड़नी थी । चार दिनों तक न जाने कितने टेस्ट हुए । सबसे बड़े टेस्ट की सबसे बड़ी रिपोर्ट भी आज आ गई । और, यह प्रमाणित हो गया कि मां को कैंसर नहीं है । परिवार को सुकून मिला ।
लेकिन, जरा ये सोचिए, हर कोई इतना सक्षम नहीं होता, जो तुरंत मुंबई जा सके । फिर चार दिनों तक पैसे की चिंता किए बिना शक की छोटी सी भी सूई को पकड़ने को इतने टेस्ट कराने की क्षमता नहीं रखता, तो पटना में क्या होता । तुरंत कैंसर का इलाज शुरु हो जाता, जो रोग था ही नहीं और कैंसर के डर से मां की उम्र भी घटती चली जाती । खैर, अभी हमने दोस्त को कहा है, भगवान को शुक्रिया अदा करो और पटना वापस आओ ।

 

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ज्ञानेश्वर की इस फेसबुक पोस्ट पर नरेश अग्रवाल अपने साथ हुए किसी वाक़या का ज़िक्र करते हुए किसी लैब का नाम लिए बिना लिखते हैं कि भैया कोई बड़ी बात नहीं ये तो लैब की बात है।कई सालो पहले मुझे पसीने के साथ चक्कर आया।पटना में सबसे बेस्ट कार्डियो को दिखाया गया।उन्होंने मुझे aims रेफर कर दिया ये कह के की आपके रिपोर्ट के अनुसार आपको पेस मेकर लगना है।जल्द दिल्ली की टिकट बना कर मेदांता गए।वहा कार्डियो के हेड डिपार्टमेंट से दिखाया।पहले तो उन्होंने साफ कह दिया की बिहार की एक भी रिपोर्ट पर इलाज नहीं करूंगा।सभी नए सिरे से।सारी रिपोर्ट फिर से करवाई।जब रिजल्ट आया तो डॉक्टर साहब माथा पकड़ कर बैठ गए।बोल की जब पटना में सेमिनार होता है तो सबसे ऊपर उनका स्थान होता है और इन्होंने ऐसा लिखा।आज तक मैं स्वस्थ हु कोई दिक्कत नही है।

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आशुतोष झा लिखते हैं कि मेरी मां के साथ भी यही हुआ था मां को डॉ विजय प्रकाश ने कैंसर बताया था और रिपोर्ट में भी कैंसर प्रमाणित कर दिया था लेकिन जब मैं उसे लेकर के दिल्ली गया तो जे बी पंत हॉस्पिटल के डॉक्टर अनिल अग्रवाल ने कहा कैंसर नाम कि कहीं कोई स्थान नहीं है इनके शरीर में डॉक्टर इस प्रकार के रैकेट चलाने वाले पैथोलॉजी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सरकार को करनी चाहिए।

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मनोज कुमार लिखते हैं कि यह स्थिति आज से लगभग 16 साल पहले मेरे साथ भी हुआ मेरे मामी का टेस्ट रिपोर्ट में सशपिस्न में कैंसर निकला फिर तो मानो हम सभी के पैरों तले जमीन खिसक गई , डा ए के गौर फिर दुबारा टेस्ट करवाने की सलाह दी दुसरे लैंब में जहां कैंसर जैसी बीमारी का जिक्र नहीं किया गया रिपोर्ट में ?

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