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नैतिकता खो चुकी बिहार सरकार, सूबे की जनता से माफी मांगे:आप

आम आदमी पार्टी बिहार के प्रदेश अध्यक्ष सुशील सिंह ने बताया कि प्रवासी मजदूर की बात तो छोड़िए, बिहार में रहकर रोजी रोटी कमाने वाले किसान- दिहाड़ी मजदुर, ऑटो चालक, रिक्शा- ठेला चालको एवं अन्य को बिहार सरकार ने फूटी कौड़ी तक नही दिया।

 

पटना:आम आदमी पार्टी बिहार के प्रदेश अध्यक्ष सुशील सिंह ने  बिहार सरकार के मंत्री संजय झा के बयान पर दपलटवार करते हुए कहा कि ये सच है कि दिल्ली सरकार ने बिहार सरकार को पत्र लिखा था जिसका बिहार सरकार ने कोई जवाब नहीं दिया।
सुशील ने कहा कि ये भी सच है कि दिल्ली सरकार ने अपने पैसे से बिहार के मुजफ्फरपुर के लिए 1200 प्रवासी मजदूरों के ट्रेन का भाड़ा दिया है। क्योंकि रेलवे यात्रा से पूर्व भुगतान मांगती है। दिल्ली सरकार ने 6 लाख 42 हजार का भुगतान 7 मई को रेल मंत्रालय को कर चुकी है। दिल्ली सरकार, बिहार आने वाले मजदूरों से रेल भाड़ा नहीं लिया है। यही नहीं उन्होने कहा कि दिल्ली सरकार ने बिहार समेत संबंधित राज्य सरकारों को चिट्ठी लिखी थी, लेकिन किसी भी सरकार ने भाड़ा को लेकर कोई जानकारी नहीं दी और न ही दिल्ली सरकार के चिट्ठी का कोई जवाब दिया।सुशील ने कहा कि संकट के इस घड़ी में बिहार सरकार हर मोर्चे पर पूरी तरह फेल हो चुकी है। जदयू के नेता, मंत्री सिर्फ ट्विटर पर चीं चीं चीं करते है। कोविड-19 जैसे महामारी से निपटने के लिए कोई योजना नही है।बिहार सरकार के मंत्री संजय झा कहते है कि, बिहार पहले से तय कर रखा है- दूसरे राज्यों से आने वालों मजदूरों को पहले दो हफ्ते कोरेंटाइन सेंटर में 14 दिनों का वनवास करना होगा उसके बाद हमारी सरकार, प्रवासी मजदूरों को रेल का भाड़ा और  पांच सौ रुपया देकर सुशोभित करेगी। बिहार सरकार का ये फैसला गरीब विरोधी है। उनके सम्मान के साथ मजाक है। शर्म आनी चाहिए सूबे की सरकार को जो लॉकडाउन में रोजी रोजगार खो चुके प्रवासी मजदूरों से रेल भाड़ा देकर यात्रा करने को कह रही है। ऐसे लोग भाड़ा के लिए पैसा कहाँ से लाएंगे ? सूबे में चल रहे कोरेंटाइन सेंटर भी भगवान भरोशे है। पूरी व्यवस्था बदहाल है। मजदूर सेंटर छोड़ कर भागने को मजबूर हैं ।सुशील ने बताया कि प्रवासी मजदूर की बात तो छोड़िए, बिहार में रहकर रोजी रोटी कमाने वाले किसान- दिहाड़ी मजदुर, ऑटो चालक, रिक्शा- ठेला चालको एवं अन्य को बिहार सरकार ने फूटी कौड़ी तक नही दिया। गरीब जरूरतमंद लोग भूख और पैसे के आर्थिक तंगी से परेशान हैं। बिहार सरकार, अपनी नैतिकता खो चुकी है, सूबे की जनता से माफी मांगनी चाहिए।

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