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किसान दिवस के रूप में मनाई गई स्वामी सहजानन्द सरस्वती की जयंती

अखिल भारतीय किसान महासभा एंव भाकपा (माले) द्वारा पूर्णियाँ के इंदिरा गांधी स्टेडियम से गिरजा चौक होते हुए आर.एन.शाह चौक तक पैदल मार्च निकाला गया,आर.एन.शाह चौक पहुंच कर शहीद अजीत सरकार की प्रतिमा के सामने हुई सभा में स्वामी सहजानन्द सरस्वती को श्रद्धांजलि दी गई तथा उपस्थित लोगों ने किसानों के हित में अपनी बात रखी

पूर्णियाँ:गुरूवार को अखिल भारतीय किसान महासभा एंव भाकपा (माले) द्वारा भारत में किसान आन्दोलन के महानायक स्वामी सहजानन्द सरस्वती की जयंती को किसान दिवस के रूप में मनाया गया।इस अवसर पर पूर्णियाँ के इंदिरा गांधी स्टेडियम से गिरजा चौक होते हुए आर.एन.शाह चौक तक पैदल मार्च निकाला गया। आर.एन.शाह चौक पहुंच कर शहीद अजीत सरकार की प्रतिमा के सामने हुई सभा में स्वामी सहजानन्द सरस्वती को श्रद्धांजलि दी गई तथा उपस्थित लोगों ने किसानों के हित में अपनी बात रखी।इस अवसर पर अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष काॅमरेड मोहम्मद ईस्लामुद्दीन ने सरकार से निम्नलिखित मांग की…जो अन्य वस्तु उपजाएगा अब सो कानून बनाएगा। भारतवर्ष उसी का है अब शासन वही चलाएगा। किसान विरोधी तीनों कृषि कानून वापस लेना होगा। बिहार की तमाम कृषि बाजार समिति और एपीएमसी एक्ट को पुनः बहाल करो। प्रधानमंत्री किसान सम्मान योजना में भूमिहीन बटाईदार किसानों को शामिल करना होगा। खेत- खेती किसान बचाओ कारपोरेट लूट का राज मिटाओ। खेत- खेती किसान की न कि काॅर्पोरेट बेईमान की। देश में कंपनी राज लाने की साजिश बंद करो। न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान मक्का सहित तमाम फसलों की सरकारी खरीद की गारंटी करना होगा।इस अवसर पर उपस्थित किसान संघर्ष समन्वय समिति के संयोजक नियाज अहमद ने कहा कि स्वामी जी किसानों दलितों एवं मजदूरों के प्राण थे । उन्होंने एक सन्यासी के रूप में जमींदारों के खिलाफ 1928 में पश्चिमी पटना किसान सभा,1929 में बिहार राज्य किसान सभा एवं 1936 में अखिल भारतीय किसान सभा का गठन कर किसानों के आजादी के आंदोलन से जुड़ने का कार्य किया । वे जीवन पर्यंत किसानों के मसीहा के रूप में कार्यरत रहे। उनके आंदोलन के कारण बिहार में सबसे पहले जमींदारी प्रथा का अंत हुआ। इसके लिए वे हमेशा याद किए जाएंगें।मौके पर उपस्थित यमुना प्रसाद मुरमुर ने कहा कि स्वामीजी के किसान आंदोलन की प्रेरणा से देश में ऐतिहासिक किसान आंदोलन छिड़ा हुआ है और देश की राजधानी दिल्ली के बॉर्डर पर लाखों किसान तीन कृषि कानूनों की वापसी के लिए धरना दे रहे हैं । इस दौरान में 200 से ज्यादा किसान शहीद हो गए हैं। स्वामी जी को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम अपने यहां किसान आंदोलन को तीव्र कर केंद्र सरकार को तीनों कानून वापस करने को मजबूर करें।इस अवसर पर जिला सचिव भाकपा माले पूर्णिया कॉमरेड विजय कुमार , किसान नेता कॉमरेड अविनाश पासवान , कॉमरेड जमुना प्रसाद मुर्मू, कॉमरेड चतुरी पासवान , काॅमरेड डी एन राॅय,कॉमरेड चंद किशोर शर्मा, कॉमरेड छोटा इस्लाम, कॉमरेड जोहाक अली आदि उपस्थित थे।

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