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राजनीति

अग्निपथ,पूरे भारत के लिये बना ‘पानीपत’ का मैदान

पटना:बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी के प्रवक्ता एवं रिसर्च विभाग के अध्यक्ष आनन्द माधव ने एक बयान जारी कर कहा कि, सेना में भर्ती के लिये अग्निपथ योजना की घोषणा होते ही स्वतः स्फूर्त युवा सड़कों पर विरोध के लिये निकल आये। आज पूरे देश में आग लगी हुई है, कौन है इसका ज़िम्मेदार? अवकाश प्राप्त मेजर जेनरल शिओन सिंह का कहना है कि यह एक मूर्खतापूर्ण कदम है। पैसा बचाना तो अच्छा है पर सेना की क़ीमत पर नहीं।

दरअसल इस योजना को बहुत ही कमजोर ढंग से तैयार किया गया, जिसका ख़ामियाज़ा देश को भुगताना पड़ रहा है।युवाओं के किसी भी शंकाओं का कोई समाधान नहीं है इस योजना में:
चार साल के बाद ये अग्निवीर क्या करेंगे, इसकी कहीं कोई गारंटी नहीं है, मात्र आश्वासन है।समाज के सैन्यीकरण का एक बड़ा ख़तरा बना रहेगा। जिससे आंतरिक सुरक्षा को हमेशा ख़तरा बना रहेगा। हथियार चलानें में प्रशिक्षित बेरोज़गार समाज के लिये एक चुनौती बन सकते हैं और समाज में हिंसा को बढ़ावा मिलेगा।हमारी सेना एक परिपक्व सेना है. इस योजना के बाद भारतीय सेना में नौसिखिया जवानों की संख्या बल बढ़ जायेगी।सशस्त्रबल की सदियों पुरानी रेजिमेंटल संरचना इससे बाधित होगी।इस परियोजना का पहले पायलट क्यों नहीं हुआ?देश को युद्ध से अधिक आज घुसपैठियों से ख़तरा है जिससे एक परिपक्व सेना ही निबट सकती है।अब तक जहाँ दो, ढाई साल का सैन्य प्रशिक्षण हुआ करता था, क्या वह मात्र छ: महीने में पूरा हो पायेगा? अल्प प्रशिक्षित सैनिक, क्या इतनें काबिल होंगे जितनी आज हमारी सेना है?प्रथम दिन से ही अग्निवीरों को अपने भविष्य की चिंता रहेगी, जिसका नकारात्मक प्रभाव उनकी गुणवत्ता, प्रेरणा, दक्षता एवं प्रभावशीलता पर पड़ेगा ।सेना में भर्ती का मुख्य आकर्षण होता है, ख़ुशी, संतुष्टि, प्रेरणा एवं भविष्य की सुरक्षा, जिसका स्पष्ट रूप ये यहाँ अभाव दीखता है।

ठेके पर सैनिक लिये जा रहे, जो एक ग़लत निर्णय है।लोग सैनिक बनते हैं, भावना, नाम, नमक एवं निशान के लिये। क्या अग्निपथ यह दे पायेगा नहीं । इन अग्निवीरों को ना तो पेंशन मिलेगा और ना ही चिकित्सा सुविधा, यहाँ तक की आप इन्हें पूर्व सैनिक का दर्जा भी नहीं देंगे।पहले से ही करोड़ों लोग बेरोज़गार है, सिपाही चपरासी की भर्ती में बी ए, एम ए क़तारबद्ध रहते और आप हर वर्ष चालिस हज़ार नये बेरोज़गारों की फ़ौज खड़ी करेंगे। बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पहले से ही बेरोज़गारों की बाढ़ है, उद्योगों की घोर कमी है, फिर इन अग्निवीरों को नौकरी कहाँ मिलेगी? अधिकांश लोग जिस उम्र में नौकरी शुरू करते उस उम्र में ये अवकाश प्राप्त करेंगे। शार्ट सर्विस कमीशन में आठ वर्ष प्लस चार वर्ष का विस्तार मिलता है, उसी व्यवस्था को ही क्यों नहीं और मज़बूत किया जा सकता है?
अपनीं माँगो को मनवाने के लिये धरना प्रदर्शन जायज़ है, लेकिन वह शांतिपूर्ण ढंग से होना चाहिये। लेकिन सत्तारूढ़ दल का यह आरोप कि विपक्ष भड़का रहा है, सरासर ग़लत है। यह विरोध स्वतः है और बेरोज़गार ही सड़कों पर खड़े है।
श्री माधव ने कहा कि समय रहते सरकार को इस योजना को वापस ले लेना चाहिये, इससे पहले कि देर हो जाये। युवाओं एवं सेना के मामले में सरकार की ज़िद सही नहीं ।अग्निपथ पर पुनर्विचार हो।

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