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राजनीति

फ्री की सुख सुविधा अब सिर्फ राजनेताओं को मिलेगी क्योंकि कि वे जनता के पालनहार हैं

नई दिल्ली: केंद्र की मोदी सरकार के द्वारा रेलवे में सीनियर सिटीजन अर्थात बुजुर्ग मुसाफिरों को मिलने वाली रियायत को बंद करने का ऐलान कर दिया है। इस आशय की जानकारी रेल मंत्री वैष्णव ने लोकसभा में एक लिखित बयान में दिया है। मंत्री ने कहा के सीनियर सिटीजन को दिए जाने वाले लाभ की वजह से रेलवे को घाटा हो रहा है इसीलिए अब इस व्यवस्था को कायम रखना घाटे का सौदा होगा। रेल मंत्री के इस घोषणा के साथ ही सोशल मीडिया पर एक भूचाल मच गया और लोगों ने तरह तरह से इस पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए अपनी भड़ास निकाली साथी साथ केंद्र की मोदी सरकार को खरी खोटी सुनाई। लोगों ने सोशल मीडिया पर लिखा की देश में आम आदमी को किसी भी प्रकार की मिली छूट अब नहीं मिलेगी  जनता को फ्री का कल्चर बीजेपी राज में खत्म होगा इसकी सुख सुविधा अब सिर्फ राजनेताओं को मिलेगी क्योंकि कि वे जनता के पालनहार हैं।

घीसू लाल जोशी लिखते हैं कि अच्छे दिन आ गये,अभी थोडा ओर इन्तजार करो।सारी सुविधाएं केवल नेताओ के लिए होगी।मध्यम परिवार सडक पर भीख मांगेगा।
श्रीनारायण झा लिखते हैं कि रेलवे से यही आशा थी। वैसे भी वर्तमान सरकार वरिष्ट नागरिक विरोधी ही प्रतीत होती है।हो सकता है कुछ दिनों के बाद सीनियर सीटीजन को रेल यात्रा करने पर डबल किराया भरने का आदेश जारी हो जाये।
सुमित कुमार शर्मा लिखते हैं कि देश के citizens को थोरा छुट दिया तो रेलवे घटा मै चल गया ओर नेता लोग पूरी पूरी रेलवे फ़्री कर दिये है तो रेलवे पूरी तरह profit मै चलने लगेगा।
चौधरी सत्य प्रकाश वर्मा लिखते हैं कि रेलवे के इस ऐतिहासिक फैसले से , भारत की जनता सरकार और रेलवे की हमेशा ऋणी रहेगी इसी क्रम में बीजेपी की अच्छे दिन की यादें और ताजा कर रही है।
वंदना गोला नामक यूजर लिखती हैं कि आम आदमी को मनचाहे तरीके से लूटने के बाद भी देश की हालत खराब है।
यही तो है अच्छे दिन।अभी तो और अच्छे दिन बाकी है।।
भीकम जैन ने लिखा कि सीनियर सिटिजन को दिये जाने वाली छुट एक सीनियर सिटिजन को दिया जाने वाला मान सम्मान था जिसके वो हकदार भी है पर सरकार तो सिर्फ लाओ लाओ में लग गयी है क्योंकि सरकारी पूंजी तो अंधाधुंध सरकारी खर्चे में सलट गई।

सोशल मीडिया पर दी गयी प्रतिक्रिया का स्क्रीन शॉट

विजय शंकर झा लिखते हैं कि अंग्रेज जब भारत में आया था ,तो लोगौं को ऎसे ही लग रहा था, अंग्रेज बिज़्नेश करने आया हैँ, भारत को फ़ायदा पहुचाँने आया हैँ, उसके बाद परिणाम पूरे दुनिया देखा, ऎसे ही रास्ता अपनाएं हुए आदरणीय फेंकू जी, धीरे धीरे लोग समझदार तो हो रहें हैँ, लेक़िन तब तक शायद देश pvt ltd ना हो जाय।
अमर सिंह पाल लिखते हैं कि बच्चों का हाफ टिकट बंद हो गया, वरिष्ठ नागरिकों को रियायत नही मिलेगी।लेकिन भरष्ट नेताओ  और उनके पूरे परिवार को सारी मुफ्त की सुविधाएं मिलती रहेंगी। धन्य हो बेशर्म नेताओं।
ओवैस रज़ा लिखते हैं कि ये सरकार कितना भी कुछ करले कितना भी टैक्स बढ़ा दे और छूट समाप्त करदे परन्तु फिर भी ये देश की आर्थिक स्तिथि को संभाल में में अक्षम ही रहेगी क्यूंकि जो ये रास्ते सरकार निकल रही है ना ये वो विकल्प हैं जो इनको अयोग्यता को उजागर करते हैं और दर्शाते हैं कि सरकार निकम्मी है जिस किसी को भी शक है स्क्रीन शॉट ले ले वो 2 वर्सों बाद देश की आर्थिक स्तिथि और भी गंभीर होगी
और सरकार को यह भली भांति पता है कि इन मुद्दों से जनता का ध्यान कैसे हटाना है।

क्या कहा अश्विनी वैष्णव ने: 

केंद्रीय रेल मंत्री ने लोकसभा में एम आरिफ के एक प्रश्न के लिखित जवाब में कहा, ‘‘भारतीय रेल पहले से ही वरिष्ठ नागरिकों समेत यात्रियों के लिए यात्रा लागत पर 50 प्रतिशत से अधिक का खर्च पहले से वहन कर रही है। इसके अलावा, कोविड-19 के कारण पिछले दो वर्षों की रेलवे की कमाई 2019-20 की तुलना में कम रही। इसका रेलवे की वित्तीय सेहत पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा।’’ वैष्णव ने कहा कि इसी कारण सीनियर सिटीजन समेत कई श्रेणियों के किराये में छूट का दायरा बढ़ाना ठीक नहीं है।

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