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सरस मेला:महज तीन दिनों में खरीद-बिक्री का आंकड़ा एक करोड़ 60 लाख के पार

पटना: रविवार का दिन सरस मेला के लिए खास रहा l सवा लाख से ज्यादा हस्तशिल्प, हुनर एवं व्यंजन के कद्रदान आये l मानो पटना की हर सड़क का रुख गाँधी मैदान की ओर ही था l ग्रामीण शिल्प और उत्पादों की खूब खरीद -बिक्री हुई l महज तीन दिनों में खरीद-बिक्री का आंकड़ा एक करोड़ 60 लाख पार कर गया l शनिवार को 85 लाख रुपये की खरीद-बिक्री हुई l रविवार को खरीद-बिक्री का आंकड़ा सवा करोड़ रुपये से ज्यादा होने की संभावना है l हर उम्र और आम से लेकर खास आये और मेला से अपने मनपसंद उत्पादों की खरीददारी की l साथ ही फ़ूड जोन में शुद्ध, स्वादिष्ट एवं पौष्टिक व्यंजनों के साथ ही लोक गीत, नृत्य एवं गजल का लुत्फ़ उठाया l

बिहार सरस मेला, ग्रामीण विकास विभाग के तत्वाधान में जीविका द्वारा 15 से 29 दिसंबर तक आयोजित है l बिहार सरस मेला में बिहार, झारखंड, हरियाणा, महाराष्ट्र, तेलंगाना, उड़ीसा, केरला, आसाम, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश, गुजरात, मणिपुर, मेघालय, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड , राजस्थान, मध्य प्रदेश एवम जम्मू कश्मीर की स्वयं सहायता समूह और स्वरोजगारी अपने शिल्प, कला एवं उत्पाद को लेकर उपस्थित हैं।

बिहार सरस मेला में महिला सशक्तिकरण की झलक देखते ही बन रही है l कल तक घर की चाहरदीवारी में कैद गाँव की महिलायें अब बाहर निकल कर अपने हुनर से बनाये गए उत्पादों द्वारा अपनी प्रतिभा और क्षमता से लोगों को न सिर्फ चकित कर रही हैं बल्कि महिला सशक्तिकरण की दिशा में नित नया आयाम स्थापित कर रही है. और इस तरह सरस मेला के आयोजन के उदेश्यों को वे उसके अंजाम तक पहुंचाने में भी अहम् भूमिका निभा रही है l इसकी बानगी मेला में देखने को मिल रही है l जीविका दीदियों द्वारा संचालित दीदी की रसोई के व्यंजन के प्रति भी आगंतुकों का आकर्षण देखते ही बन रहा है l

बिहार समेत देश के 20 राज्यों के हस्तशिल्प, लोककला और लोक शिल्प समावेशन इस सरस मेला में देखने को मिल रहा है l मधुबनी पेंटिंग, सुजनी कला, सिक्की कला, बम्बू आर्ट , बावन बुट्टी, एप्लिक, सिल्क एवं खादी आदि के परिधानों की खरीद-बिक्री ने लोक कलाओं को प्रोत्साहित तो किया ही है साथ ही उन्हें एक बाज़ार भी दिया है l इस सरस मेला रुपी बाज़ार से लाभान्वित होकर ग्रामीण महिलायें आर्थिक एवं सामाजिक तौर पर सशक्त होते हुए स्वावलंबन की राह पर बढ़ रही हैं l टेराकोटा , जूट से बने उत्पाद, घांस एवं बांस से बने उत्पाद, ड्राई फ्लावर, आर्टिफिशियल फ्लावर, सेरेमिक , हाथ से बुने हुए दरी- कालीन, लकड़ी के उत्पाद, फ़र्निचर, झूले , चीनी –मिटटी के उत्पाद आदि आगंतुकों को आकर्षित कर रहे हैं l सरस मेला में दस रुपये के कृत्रिम फूल से लेकर ढाई रूपये के दीवान तक की खरीद-बिक्री हो रही है l

फूड जोन में कतरनी चूड़ा, चावल, विभिन्न प्रदेशों के व्यंजन एवं मिठाइयों की सोंधी खुशबु और स्वाद आगंतुक चखे बिना नहीं रह पाते l वहीँ जीविका दीदियों द्वारा संचालित दीदी की रसोई पर बने देशी व्यंजन और पकवान के प्रति लोगों की दीवानगी देखते ही बन रही है l आम के चॉकलेट से लेकर चने का साग -मक्के की रोटी, लिट्टी-चोखा, बड़ा पाव, राजस्थानी वडा और चटपटे आचार, मशरूम के पकौड़े जैसे व्यंजन और फिर पांच रुपये का आयुर्वेदिक पाचक भी खाने के शौकिनो के लिए मौजूद है l

बिहार की लोककला, नृत्य एवं सोहर जैसे गीतों की प्रस्तुति से हमारी परम्पराएँ फिर से लोगों के जेहन में पुराने दिनों की याद ताजा कर रही हैं l सास्कृतिक मंच पर महिला विकास निगम के तत्वाधान में ठिठोली संस्था के कलाकारों ने “वाह बटोही वाह” लघु नाटक की प्रस्तुति दी l कला संस्कृति एवं युवा विभाग के तत्वाधान में लोक गीत एवं नृत्य की प्रस्तुति हुई l सुशीला श्री कला संस्था के द्वारा गजल की प्रस्तुति शक्ति कुमार पाठक एवं ममता सरगम ने दी l “किससे प्यार करना है सोचना जरुरी है” गजल पर लोग खूब झूमे l जट-जटीन की भी प्रस्तुति हुई l

सेमिनार हॉल में डिजिटल शिक्षा द्वारा सामुदायिक विकास विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई l वक्ताओं द्वारा ने एन.आई.ओ .एस और इग्न्यु द्वारा डिजिटल शिक्षा के माध्यम से शिक्षा को शुदृढ़ जगहों तक पहुचाना एवं ई -लाइब्रेरी के माध्यम से समुदाय में शिक्षा को सरल बनाने पर चर्चा की l दर्शकों की तरफ से आये सवालों का जवाब श्री पुष्पेन्द्र सिंह तिवारी , राज्य परियोजना प्रबंधक, , जीविका ने दिया l मंचासीन वक्ताओं में प्रो. श्रीधर, डी.एम्.आई , प्रो. विद्या , विमेंस कॉलेज , श्री श्रवण कुमार, आई सक्षम, श्री संजय कुमार, एन.आई.ओ .एस एवं प्रथम संस्था से श्री नैयर रहे l

सांस्कृतिक कार्यक्रम, समसामयिक विषयों पर परिचर्चा एवं लघु तथा नुक्कड़ नाटकों की प्रस्तुति मेला परिसर में प्रतिदिन हो रही है l बाइस्कोप हर उम्र के लोगों के लिए आकर्षण का खास केंद्र बना हुआ है l फन जोन में बच्चे पूरी आज़ादी से अपने बचपन का लुत्फ़ हठ रहे हैं l वही पालना घर में अपने बच्चे-बच्चियों को खेलने के लिए छोड़कर अभिभावक खरीददारी कर रहे हैं l मेला सुबह 10 बजे से शाम 8 बजे तक चलेगा l प्रवेश निःशुल्क है l

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