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मुसलमान अपने धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगा: कारी सुहैब

पटना:वक्फ संशोधन कानून 2025 को लेकर बिहार में विरोध की लहर तेज हो गई है। बिहार विधान परिषद के सदस्य कारी सुहैब ने इस कानून को भारतीय संविधान की भावना और देश की लोकतांत्रिक पहचान के खिलाफ बताते हुए इसे अल्पसंख्यकों, खासकर मुसलमानों को निशाना बनाने की साजिश करार दिया। उन्होंने प्रेस को जारी अपने बयान में कहा कि यह कानून वक्फ की स्वायत्त स्थिति को खत्म कर इसे सरकारी नियंत्रण में लाने का प्रयास है, जो किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है।

कारी सुहैब ने जोर देकर कहा कि वक्फ संपत्तियां न तो किसी व्यक्ति की निजी संपत्ति हैं और न ही व्यक्तिगत संपदा, बल्कि यह अल्लाह की अमानत है। उन्होंने सरकारी हस्तक्षेप को संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता का खुला उल्लंघन बताया। उन्होंने जनता से अपील की कि वे 29 जून को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में आयोजित होने वाली ‘वक्फ बचाओ, संविधान बचाओ’ कॉन्फ्रेंस में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें। यह कॉन्फ्रेंस ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के प्रस्ताव और इमारत-ए-शरिया बिहार, ओडिशा व झारखंड के तत्वावधान में अमीर-ए-शरियत मौलाना सैयद अहमद वली फैसल रहमानी की अध्यक्षता में होगी।

कारी सुहैब ने कहा, “यह कॉन्फ्रेंस सरकार को स्पष्ट संदेश देगी कि मुसलमान अपने धार्मिक और संवैधानिक अधिकारों से कोई समझौता नहीं करेगा।” कारी सुहैब ने यह भी उल्लेख किया कि इमारत-ए-शरिया और अन्य मिल्ली संगठनों के नेतृत्व में पूरे राज्य में हुए विरोध प्रदर्शनों ने जनता में नई जागरूकता पैदा की है।उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि जिस तरह पटना की गलियों ने आजादी की लड़ाई को जन्म दिया, वैसे ही वक्फ के संरक्षण की यह जंग भी इतिहास में दर्ज होने जा रही है। उन्होंने इस मुद्दे को केवल वक्फ तक सीमित नहीं माना, बल्कि इसे देश के संवैधानिक ढांचे, धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यकों के अधिकारों से जोड़ा।यह कॉन्फ्रेंस और विरोध प्रदर्शन न केवल वक्फ संपत्तियों के संरक्षण के लिए, बल्कि भारत के लोकतांत्रिक और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए भी एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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