पटना, 3 अक्टूबर 2025: बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक बड़ा फैसला लिया गया। इस फैसले के तहत राज्य के करीब 1.5 करोड़ स्कूली विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति की राशि को दोगुना कर दिया गया है। शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव पर मुहर लगाते हुए कैबिनेट ने इस योजना के लिए 3 अरब रुपये की राशि को मंजूरी दी। इस घोषणा से न केवल विद्यार्थियों, बल्कि उनके अभिभावकों में भी खुशी की लहर है, जो आर्थिक परेशानियों के कारण बच्चों की पढ़ाई में आने वाली चुनौतियों से जूझते रहते हैं। यह निर्णय दर्शाता है कि सरकार शिक्षा के क्षेत्र में सुधार और कमजोर वर्ग के बच्चों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
इस फैसले के बाद, कक्षा 1 से 4 तक के विद्यार्थियों को अब ₹600 की जगह ₹1200, और कक्षा 5 से 6 तक के विद्यार्थियों को ₹1200 की जगह ₹2400 मिलेंगे। इसी तरह, कक्षा 7 से 8 के विद्यार्थियों को ₹1800 की जगह ₹3600 और कक्षा 9 से 10 के विद्यार्थियों को भी ₹1800 की जगह ₹3600 दिए जाएंगे। यह वृद्धि सभी वर्गों के विद्यार्थियों पर लागू होगी, जिसमें मुख्यमंत्री बालक/बालिका प्रोत्साहन योजना के तहत लाभ पाने वाले विद्यार्थी भी शामिल हैं। यह योजना विशेष रूप से उन बच्चों को वापस स्कूल लाने और उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित करने में सहायक होगी, जिन्हें आर्थिक तंगी के कारण बीच में ही पढ़ाई छोड़नी पड़ती है। इस योजना का उद्देश्य कमजोर वर्ग के बच्चों और परिवारों को शिक्षा के महत्व के प्रति जागरूक करना भी है।
यह निर्णय ऐसे समय में लिया गया है, जब बिहार में चुनाव का माहौल गरम है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला सरकार की तरफ से एक चुनावी दांव है, जबकि कई इसे शिक्षा के प्रति एक सकारात्मक कदम मान रहे हैं। जो भी हो, यह तय है कि इस फैसले से राज्य के लाखों विद्यार्थियों को फायदा होगा, जिनके खातों में डीबीटी के माध्यम से सीधे बढ़ी हुई राशि भेजी जाएगी। इस कदम से उम्मीद की जा रही है कि स्कूल छोड़ने वाले बच्चों की संख्या में कमी आएगी और शिक्षा के स्तर में सुधार होगा, जिससे बिहार के शैक्षिक विकास को एक नई दिशा मिलेगी। सरकार का यह कदम शिक्षा के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव लाने और भविष्य की पीढ़ी को बेहतर अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

