इंदौर के भागीरथपुरा इलाके में दूषित पानी के कारण हाल के दिनों में हालत गंभीर रूप से बिगड़ गई है, जिससे अब तक कम से कम 13 लोगों की मौत हो चुकी है और सैकड़ों लोग उल्टी-दस्त तथा पानी-बासी शिकायतों के साथ अस्पताल में भर्ती हैं। दूषित पानी के सेवन से बीमार पड़ी जनता का इलाज शहर भर के अस्पतालों में चल रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग ने व्यापक जांच और फील्ड सर्वे शुरू कर दिये हैं।
मध्य प्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि सरकार स्थिति पर लगातार नजर रखे हुए है और मरीजों के इलाज का पूरा खर्च वहन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आधिकारिक मौतों की संख्या विस्तृत चिकित्सीय जांच के बाद ही घोषित की जाएगी, और कुछ मौतों को ‘नेचुरल कारण’ से भी जोड़ा जा रहा है — जिसे विशेषज्ञों से परख की जरूरत है। दोषी अधिकारियों को बख्शा नहीं जाएगा, भले ही वे उच्च पद पर हों, इस बात का भी उन्होंने आश्वासन दिया।
स्थिति पर सामाजिक चिंता बढ़ती जा रही है, हाईकोर्ट ने भी जनहित याचिका के जवाब में संबंधित अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है और प्रशासन को पानी की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। स्थानीय लोग पानी की सप्लाई में गंदगी और गंध की शिकायत पहले से कर रहे थे, और अब यह संकट शहर में सार्वजनिक स्वास्थ्य और जल सुरक्षा की गंभीर समस्या बन गया है।

