IRCTC घोटाला मामले में बिहार की राजनीति के दो बड़े नाम—राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके बेटे तेजस्वी यादव—की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। दिल्ली हाईकोर्ट में इस केस को लेकर 5 जनवरी को अहम सुनवाई होने जा रही है, जिसमें अदालत बड़ा फैसला सुना सकती है। लालू यादव ने निचली अदालत द्वारा तय किए गए भ्रष्टाचार और आपराधिक साजिश के आरोपों को चुनौती देते हुए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। इस याचिका पर सुनवाई न्यायमूर्ति स्वर्ण कांत शर्मा के समक्ष होगी।
यह मामला उस दौर से जुड़ा है जब लालू प्रसाद यादव 2004 से 2009 के बीच केंद्र में रेल मंत्री थे। अक्टूबर 2025 में राउज़ एवेन्यू कोर्ट ने IRCTC से जुड़े होटल टेंडर आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर लालू यादव के खिलाफ आरोप तय किए थे। अदालत ने माना था कि टेंडर प्रक्रिया में पात्रता शर्तों से छेड़छाड़ कर पसंदीदा लोगों को लाभ पहुंचाया गया, जिससे सरकारी खजाने को नुकसान हुआ। इस मामले में लालू यादव की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी तथा बेटे तेजस्वी यादव पर भी आपराधिक साजिश और धोखाधड़ी के आरोप हैं।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस केस में 2017 में एफआईआर दर्ज की थी। एजेंसी का आरोप है कि IRCTC के पटना और पुरी स्थित होटलों के टेंडर के बदले रिश्वत के तौर पर जमीन और शेयर हासिल किए गए। जांच पूरी होने के बाद सीबीआई ने लालू यादव समेत 11 अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। अब 5 जनवरी की सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं, क्योंकि हाईकोर्ट का फैसला बिहार की राजनीति में बड़ा असर डाल सकता है।

