जीवन की शुरुआत अंधेरों से हुई थी। एक गरीब परिवार, जहां हर रोज की रोटी के लिए संघर्ष था। बचपन के वो पल आज भी आंखों के सामने तैर जाते हैं—जब रिश्तेदार नजरअंदाज करते थे, मुंह पर हंसी उड़ाते थे। पतली-दुबली लड़की को देखकर ताने मारते, “ऐसी रही तो शादी कैसे होगी?” ये शब्द कान में चुभते थे, लेकिन दिल में एक वादा जन्म लेता था कि एक दिन इनके मुंह में लगाम लगा दूंगी।
यह कहानी है जनता दल यूनाइटेड की सक्रिय कार्यकर्ता और सामाजिक कामों में बढ़-चढ़कर का हिस्सा लेने वाली भागलपुर की निवासी एवं भागलपुर जिला सुन्नी अवकाफ़ कमेटी की उप चेयरपरसन शबाना दाऊद की।उनका कहना है कि स्कूल-कॉलेज के दिन मुश्किल थे। शिक्षक भी कहते, “अगर यह लड़की जिंदगी में कुछ कर लेगी तो तलहटी पर घास जमा देगी।” ये बातें मजाक लगती थीं, लेकिन मेरे अंदर चिंगारी बनकर जलती रहीं। मैंने ठान लिया था कि मेहनत से कुछ बनकर दिखाऊंगी। मैट्रिक पास किया, इंटर किया, और फिर सोशियोलॉजी में ग्रेजुएशन पूरा किया। पढ़ाई के साथ-साथ सपने भी बड़े होते गए।2003 का साल मेरे लिए टर्निंग पॉइंट था। मैंने CDPO (चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोजेक्ट ऑफिसर) का फॉर्म भरा। छपरा जाकर एग्जाम दिया। मेरे पापा के दोस्त आजाद अंकल वहां BDO थे, उनके सरकारी आवास पर रुकी। RJD की सरकार थी उस समय। एग्जाम दिया, लेकिन रिजल्ट नहीं आया। कुछ दिनों बाद खबर मिली—एग्जाम कैंसल हो गया। लगा जैसे सब कुछ खत्म हो गया। चारों तरफ अंधेरा छा गया। लेकिन हार मानना मेरे स्वभाव में नहीं था।फिर मौका मिला PTN न्यूज चैनल में एंकरिंग का। कैमरे के सामने खड़ी होकर खबरें पढ़ना सीखा। लेकिन मन में एक बड़ी आग जल रही थी—मुझे बहुत आगे जाना है। मैंने सामाजिक कार्यों को अपना भविष्य चुना। गरीबों, महिलाओं, बच्चों के लिए काम शुरू किया। इसी दौरान तत्कालीन पुलिस DIG श्री बरुन कुमार सर से मुलाकात हुई। वे एक बड़े पामिस्ट भी थे। उन्होंने मेरी हथेली देखी और कहा, “तुम भविष्य में राजनीति में बहुत बड़ा मुकाम हासिल करोगी।” पहले लगा मजाक है, लेकिन धीरे-धीरे जिंदगी बदलने लगी।जीवन ने कई करवटें लीं। मजाक उड़ाने वाले खुद मजाक बन गए। मेरा विवाह इतना अचानक हुआ कि मुझे पता भी नहीं चला कि आज मेरी शादी हो गई। सब कुछ इतनी तेजी से बदला कि पहले के ताने, उपेक्षा, सब धुंधलाकर रह गए।
यह कहानी सिर्फ शबाना दाऊद की नहीं है। यह उन तमाम लड़कियों, महिलाओं और युवतियों की है जो आज भी गरीबी, तानों और समाज की उपेक्षा से जूझ रही हैं। सफलता पाने के लिए सबसे जरूरी है—चीजों को नजरअंदाज करना सीखना। जो लोग आपको नीचा दिखाते हैं, उनके शब्दों को दिल पर मत लो। उन्हें इग्नोर करो। उनकी बातों को ईंधन बनाओ। मेहनत करो, सपने देखो, और आगे बढ़ते रहो।
शबाना दाऊद का कहना है कि जब मैं पीछे मुड़कर देखती हूं, तो समझ आता है कि हर ताना, हर उपेक्षा, हर असफलता ने मुझे मजबूत बनाया। CDPO एग्जाम कैंसल होना एक झटका था, लेकिन उसने मुझे नया रास्ता दिखाया। सामाजिक कार्यों ने मुझे पहचान दी, DIG सर की भविष्यवाणी ने आत्मविश्वास दिया। आज मैं जहां हूं, वहां पहुंचने के लिए जो संघर्ष किया, वह सब इसके लायक था।युवतियों से मेरी अपील है कि अगर दुनिया आपको कमजोर समझती है, तो उसे गलत साबित करो। पढ़ाई करो, स्किल्स सीखो, सामाजिक काम करो, राजनीति हो या कोई भी क्षेत्र हो मेहनत से सब संभव है। ताने सुनकर रुक मत जाना। उन्हें इग्नोर करो, क्योंकि सफलता का रास्ता वही है जहां नजरअंदाज करने की कला आती है।जो लोग आज हंस रहे हैं, कल वे देखेंगे कि वही लड़की, जो कभी पतली-दुबली थी, आज कितनी मजबूत और कामयाब है। वादा पूरा हो चुका है कि लगाम लगा दी गई है। अब समय है दूसरों को प्रेरित करने का।चिंगारी से आग बनो। इग्नोर करो, मेहनत करो, जीतो।तुममें वो ताकत है—बस उसे जगाओ।
(ये लेख उनके एक सोशल मीडिया पोस्ट पर आधारित है)

