पटना। ज्ञान भवन, पटना में आयोजित बिहार सरस मेला ग्रामीण महिलाओं की बदलती तस्वीर और उनकी बढ़ती उद्यमशीलता की जीवंत झलक पेश कर रहा है। कभी घर की चारदीवारी तक सीमित रहने वाली महिलाएं आज स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर कारोबार कर रही हैं और अपने उत्पादों को राष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के तत्वावधान में बिहार ग्रामीण जीविकोपार्जन प्रोत्साहन समिति (जीविका) की ओर से आयोजित यह मेला 29 सितंबर तक चलेगा। इसमें 15 राज्यों के स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं 135 से अधिक स्टॉलों पर हस्तशिल्प, लोककला, पारंपरिक उत्पाद और विभिन्न राज्यों के मशहूर व्यंजन पेश कर रही हैं।मेले में लोगों की बढ़ती दिलचस्पी का अंदाजा बिक्री से लगाया जा सकता है। मंगलवार को मेले के तीसरे दिन 25.37 लाख रुपये से अधिक के उत्पादों और व्यंजनों की बिक्री हुई, जो अब तक की सबसे बड़ी दैनिक बिक्री है। वहीं, तीन दिनों में कुल कारोबार 68.56 लाख रुपये से अधिक पहुंच गया।

गुणवत्ता और ब्रांडिंग पर भी जोर
सरस मेले में खरीद-बिक्री के साथ उत्पादों की गुणवत्ता, पैकेजिंग, ब्रांडिंग, मूल्य निर्धारण और बाजार विस्तार को लेकर भी चर्चा हो रही है। प्रतिदिन क्रेता-विक्रेता संवाद आयोजित किया जा रहा है। बुधवार को जीविका और अर्न्स्ट एंड यंग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित संवाद सत्र में भूंजा, सत्तू, आटा, मखाना, मेज, मक्का, चायपत्ती, प्रोटीन बार और हस्तशिल्प उत्पादों की गुणवत्ता, उचित मूल्य, ब्रांडिंग और विपणन पर चर्चा हुई। सत्तुज, एनसीडीईएक्स लिमिटेड, एफपीसी और प्लेटफार्म इंडिया प्राइवेट लिमिटेड जैसी संस्थाओं ने भी इसमें भाग लिया।

अमृता देवी बनीं मिसाल
भागलपुर जिले के खरीक प्रखंड से आईं अमृता देवी महिला उद्यमिता की मिसाल बनी हुई हैं। उन्होंने महज तीन दिनों में ढाई लाख रुपये से अधिक के कॉटन और खादी के कपड़े बेचे हैं। वर्ष 2018 में चंदा जीविका महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्होंने जीविका के प्रोत्साहन और समूह से मिले ऋण के जरिए छोटे स्तर पर कारोबार शुरू किया था। मेहनत और हुनर के बल पर आज उन्होंने मिनी फैक्ट्री स्थापित कर ली है, जहां 24 से अधिक जीविका दीदियों और उनके परिजनों को रोजगार मिल रहा है।

सरस मेला ग्रामीण महिलाओं के उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराने के साथ यह संदेश भी दे रहा है कि अवसर और प्रोत्साहन मिलने पर महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के साथ अपने परिवार और समाज की दिशा बदलने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

