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आरक्षण की सीमा 80% होना चाहिए: मुस्लिम मोर्चा

  1. पिछड़ों हेतु आरक्षण की सीमा को आबादी के अनुसार 80_85% किया जाए।
  2. निजी क्षेत्रों एवं न्याय पालिका में आरक्षण दिया जाए।
  3. संविधान की धारा 341 से 1950 का राष्ट्रपति अध्यादेश वापस लिया जाए।
  4. 2021का जनगणना जातिय आधार पर कराया जाए।

पटना:युनाइटेड मुस्लिम मोर्चा के बैनर तले आई एम ए हौल, पटना में “भारत में निजीकरण का दौर और आरक्षण व्यवस्था” विषय पर विचार गोष्ठी (सेमीनार) मोर्चा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व प्रवक्ता कमाल अशरफ राईन की अध्यक्षता में आयोजित की गई, जिसका संचालन मो जमील अख्तर अंसारी ने किया।
इस अवसर पर कमाल अशरफ ने कहा कि भारत सरकार सब कुछ प्राइवेट करने पर आमादा है और निजी क्षेत्रों में आरक्षण का प्रावधान नहीं है,O.B.C. को सिर्फ सरकारी शिक्षा व रोजगार में आरक्षण का प्रावधान है,ऐसी हालत में आरक्षण का मतलब क्या है?उन्होंने कहा कि जातिगत आधार पर आखिरी जनगणना 1931 में हुई थी। 1948 में पण्डित जवाहरलाल नेहरू ने जनगणना अधिनियम से जातीय कालम को हटा दिया। उसके बाद प्रत्येक दस वर्षों में होने वाली जनगणना जातीय आधार पर नहीं होती चली आ रही है। इससे सरकारी सुविधाएं समाज के निचले स्तर तक नहीं पहुंच पातीं है।
उन्होंने कहा कि विगत पंद्रह वर्षों में बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने पालिटिकल जस्टिस के अनेकों काम किए हैं, लेकिन पंचायत चुनावों में आरक्षण का प्रावधान नीतीश सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है।
श्री अशरफ ने कहा कि तामिलनाडु की तरह मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार को भी चाहिए कि आरक्षण की सीमा को 49.5% से बढाकर 80% तक यहां कर दें।यह ऐतिहासिक कदम होगा और स्वर्गीय कर्पुरी ठाकुर, मुंगेरी लाल,बी पी मण्डल,बी पी सिंह की तरह श्री कुमार भी ऐतिहासिक पुरुष हो जाएंगे और आनेवाली नस्लें इन्हें याद रखेंगी।
पटना हाईकोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता श्री अरुण कुमार कुशवाहा ने कहा कि सरकारें हमारे मसलों को नजरंदाज करतीं हैं, न्यायालय की आड़ में उलझाती है एवं हमारे समाज के नेताओं को कानूनी दांव- पेंच में फंसा देती हैं। इंसाफ़ दिलाने वाले पदों पर हमारे समाज का व्यक्ति रहेगा ही नहीं तो ऐसी हालत में हमें इंसाफ मिलना तो दूर की बात है इस आड़ में हमें आगे भी क्रश किया जाता रहेगा। इसलिए न्याय पालिका में आरक्षण अति आवश्यक है।
श्री माहेश्वर हजारी, विधायक व पूर्व मंत्री ने कहा कि बाबा साहेब डा भीमराव अम्बेडकर का मैं और हमारा समाज ऋणी है , अगर बाबा साहेब ने हमारे समाज को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य एवं सियासत आदि में आरक्षण नहीं दिलाई होती तो आज हम जहां हैं वहां नहीं होते। उन्होंने कहा कि 1950 में भारत का संविधान लागू हुआ और 1956 में बाबा साहेब का निधन हो गया जिससे हमारे और आपके समाज को बहुत बड़ी क्षति हो गई, अगर बाबा साहेब को खुदा ने कुछ वर्ष और दिया होता तो और बहुत कुछ हुआ होता।

ओरिएंटल कौलेज के पूर्व प्राचार्य व सर्विस कमीशन के मेम्बर रहे प्रो शफायत हुसैन ने कहा कि आरक्षण तो देश की आजादी के साथ-साथ लागू हुआ पर इस पर ईमानदारी से अम्ल नहीं हुआ जितने भी युनिवर्सिटी हैं और स्कूल एवं कालेज हैं वहां पढ़ाने और काम करने वालों में ओ०बी०सी० एवं दलित वर्गों की उचित भागीदारी नहीं है।
पत्रकार व लेखक श्री फिरोज मंसूरी ने कहा कि पूर्व केन्द्रीय मानव संसाधन मंत्री रहे श्री अर्जुन सिंह ने उच्च शिक्षा और शिक्षण संस्थानों में भी मण्डल कमीशन को लागू करने की कोशिश की तब दिल्ली के मौजूदा मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल ने ने उस समय पर्दे के पीछे से इसका विरोध किया था। वैसे भी कांग्रेसियों का इतिहास रहा है जब कोई मांग उठती है तो आयोग बनाकर मुद्दे को ठण्डे बस्ते में डाल देती है। उन्होंने कहा कि काका कालेलकर, गोपाल सिंह कमीशन, मण्डल कमीशन, राजेंद्र सच्चर और रंगनाथ मिश्रा आदि आयोग कांग्रेस ने ज़रूर बनाया पर उसकी रिपोर्ट के अनुसार काम नहीं किया।
समाजिक कार्यकर्ता व नेता श्री संतोष कुमार ने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी धार्मिक समुदायों के पिछड़े-दलित व आदिवासी वर्गों के लोग एकजुट हो जाएं वरना बाबा साहेब का संविधान भी नहीं बचेगा और जो साजिशें शुरू हैं हमारा समाज पुनः मनुवादियों और सामंतवादियों का गुलाम होकर रह जाएगा।
पूर्व पार्षद श्री अर्जुन यादव ने कहा कि निजीकरण का हमें एकजुट होकर विरोध करना चाहिए,सब कुछ निजी हो जाएगा तो फिर आम जनता पिछड़े व दलित का क्या होगा?
पूर्व जिला परिषद चेयरमैन (मोहनिया)प्रो मो अकरम उर्फ असलम ने कहा कि अगड़ों को अलग से दस प्रतिशत आर्थिक आरक्षण देने में किसी तरह की कानूनी दिक्कतें नहीं हुई पर 49.5% आरक्षण की सीमा बढ़ाने में कानून का आड़ लिया जाता है।

पाटलिपुत्र लोकसभा से बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार रहे मो करीमुल्लाह (रंगरेज) ने कहा कि हमें राजनीतिक न्याय मिलनी चाहिए। फुलवारी शरीफ पटना में हम रहते हैं दलित मुसलमान होते हुए भी हम फुलवारी शरीफ से चुनाव नहीं लड सकते हैं।
मोर्चा के सचिव मो मुश्ताक आजाद ने कहा कि मोर्चा के संस्थापक व राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद डॉ एजाज अली ने 1994 में बैक्वड मुस्लिम मोर्चा के नाम से आन्दोलन शुरू किया था जिसे बाद में युनाइटेड मुस्लिम मोर्चा कर दिया हमारा मानना है कि हमें अपनी पहचान को बनाए रखनी चाहिए और युनाइटेड की जगह हमारे संस्था का नाम फिर से बैक्वड मुस्लिम मोर्चा ही कर देना चाहिए।
सेमीनार को मुख्य रूप से प्रो अकरम,जमील अख्तर अंसारी,प्रवेज आलम,मो शाहनवाज हलीम,मो अशरफ हुसैन, डॉ शराफ़त हुसैन अंसारी,मो शबीब आलम मंसूरी,मो सेराज,मो संजर,मो मोख्तार आलम राइन,मो शाकिर मंसूरी, वार्ड पार्षद,मो अख्तर अंसारी,मो जावेद, अकबर खान,आलीम कुरैशी,मो आफताब आलम,मो सलाउद्दीन आदि ने संबोधित किया।

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