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26 मई को किसान आंदोलन के 6 माह पूरे होने पर मनाया जाएगा काला दिवस

किसान संघर्ष समन्वय समिति,पूर्णियाँ के संयोजक नियाज अहमद ने कहा कि फ़सल बचेगी – तभी नसल बचेगी, किसान बचेगा – तभी हिंदोस्तान बचेगा, उन्होंने केंद्र सरकार से अविलंब नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की।

 

पूर्णिया: किसान संघर्ष समन्वय समिति,पूर्णियाँ के संयोजक नियाज अहमद ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि 26 मई को किसान आंदोलन के 6 माह पूरे होने के अवसर पर पूरे देश में काला दिवस मनाया जाएगा साथ ही पूर्णियाँ मे भी किसान संघर्ष समन्वय समिति,पूर्णियाँ के सदस्यों द्वारा अपने अपने घरों मे काली पट्टी बांधकर विरोध प्रकट किया जाएगा।उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार किसानों की मांगों को टालते ही जा रही है ।22 जनवरी के बाद सरकार ने किसानों से चर्चा बंद कर दी है ।475 से अधिक किसान शहीद हो गए लेकिन सरकार ने कोई मानवीयता नहीं दिखाई है। नियाज अहमद ने कहा कि फ़सल बचेगी – तभी नसल बचेगी,किसान बचेगा – तभी हिंदोस्तान बचेगा, उन्होंने केंद्र सरकार से अविलंब नए कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग की।किसान संघर्ष समन्वय समिति के वर्किंग कमेटी के सदस्य राजद जिला अध्यक्ष मिथलेश दास ने कहा कि राजद समेत 12 अन्य राजनीतिक दल भी काला दिवस का समर्थन कर रही है। उन्होंने कहा कि दिल्ली बॉर्डर पर जो भी किसान पंहुचा है वह कहता है कि हमने संघर्ष में अपने 475 किसानों को खोया है इसलिए अब हम और संघर्ष तेज करेंगे, लड़ेंगे और जीत कर ही लौटेंगे। इतना दृढ़ संकल्प जब किसी आंदोलन का हो तो उसे कोई पीछे नही हटा सकता।काला दिवस को समर्थन सभी वामपंथी दलों सहित अखिल भारतीय किसान महासभा भी कर रही है किसान संघर्ष समन्वय समिति के वर्किंग कमेटी के सदस्य अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला अध्यक्ष मोहम्मद ईस्लामुद्दीन ने कहा कि ब्रिटिश गुलामी के समय भी किसानों का इतना सम्मान था कि किसान अपनी बात मनवा सकते थे। अंग्रेजों ने 1937 में जमींदारों के पक्ष में विधानसभा में बिल लाया था उसे सहजानंद सरस्वती के नेतृत्व में वापस कराया गया था लेकिन स्वतंत्र भारत में छह माह में 475 से अधिक किसानों की शहादत के बाद भी सरकार कानून रद्द नहीं करने पर अड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि कृषि बीमा सरकारी हाथों में था उसे निजी हाथों में सौंप दिया गया। जिसका लाभ किसानों को नहीं मिलता है बल्कि अरबों रुपए का प्रीमियम कारपोरेट के खजाने में जाता है।आज हालत ये हो गई है कि देश की 73% पूंजी 1% पूंजीपतियों के हाथ में केंद्रित हो गई है।वहीं किसान संघर्ष समन्वय समिति के वर्किंग कमेटी के सदस्य सीपीएम के राजीव सिंह ने कहा कि किसान आंदोलन, आंदोलन की पाठशाला की तरह चल रहा है। तमाम आरोपों के बावजूद आंदोलन अपनी जगह अडिग है। केंद्र सरकार अपनी योजनाओं के विफल होने पर षड्यंत्र पूर्वक लोगों का ध्यान भटकाने का भरपूर प्रयास कर रही है पर किसान आंदोलन नया इतिहास गढ़ रहा है।उन्होंने कहा कि यह आंदोलन देश के करोड़ों किसानोँ, मजदूरोँ एऊ युवाओं के अस्तित्व का आंदोलन है।

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