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भगवान किसी लड़की को हैवानों के घर पैदा ना करे

आभा शुक्ला

आज ये खबर कहीं से प्राप्त हुई… मन बेहद व्यथित हो गया….हृदय में सुनामी आई है….ये मासूम आसमान से नहीं टपकी होगी… किसी माता और पिता ने इसको जन्म दिया होगा।फिर इसको ऐसे मरने को क्यों छोड़ दिया… दो ही वजह हो सकती हैं… या तो लड़के की चाह रखने वाले हैवानों के घर इसका लड़की बनकर आना.. या फिर दो लोगों की शारीरिक जरूरत का परिणाम होगी ये बच्ची।ऐसा करने के पीछे उनकी क्या मजबूरी या वज़ह रही होगी ये मुझे नहीं पता..परन्तु इतना जरुर पता है कि कोई भी समस्या कोई भी मजबूरी इसके जीवन से बड़ी नहीं होगी।सम्भव है कि ये वो बच्चा हो जिसे लोग नाजयज कहते हैं….यदि एक पल के लिए मैं ये मांन भी लूँ तो भी ये हैवानियत की हद है….देखिए जब लड़का और लड़की हाथ में हाथ डाल कर घूमते हैं…पार्क में इश्क़ फ़रमाते हैं तो कहा जाता है कि ये उनकी स्वतन्त्रता है…. उनकी निजता में ख़लल डालना ग़लत है… जी बिलकुल ग़लत है निजता में ख़लल डालना….वो इश्क़ फरमाने को स्वतन्त्रता हैं….और मुझे उनकी स्वतन्त्रता से कोई आपत्ति नहीं….परन्तु इस बच्ची को भी जीने की उतनी ही स्वतन्त्रता है जितनी इसके माँ बाप को..और अगर ये बच्ची मरने के लिए इसलिए फेंक दी गई क्योंकि ये लड़की थी तो भी.. तो भी ऐसे लोग जिनको सिर्फ लड़का ही चाहिए होता है वो संतानोत्तपत्ति का रिस्क क्यों लेते हैं.. लड़का गोद ले लिया करें… और जब रिस्क ले ही लिया है तो इस मासूम को भी जीने का हक होना चाहिए न… इसकी मां कहीं भी होगी, उसकी कोई भी मजबूरी होगी.. पर इस बच्ची के जीवन के आगे हर मजबूरी छोटी है… जान गंवा देने की कीमत पर भी इसकी मां को बगावत करनी ही चाहिए थी… एक मां खामोश कैसे रही और क्यों रही….आप सौ लोगों से सम्बंध बनाने को स्वतन्त्र हैं…. परन्तु इसके फलस्वरूप आपके गर्भ में आई संतान को भी दुनिया में आने और जीने का हक़ है….किसी का जीवन छीनने की स्वतन्त्रता आपको किसने दी?संविधान ने?कानून ने?समाज ने?नहीं।ये स्वतन्त्रता आपको आपके भीतर का मरा हुआ व्यक्ति देता है…. दिखावटी सामाजिक सम्मान देता है….आपके अन्दर का घिनौना इनसान देता है….शारीरिक सुख भोगना आनन्ददायक है…. क्या ये हत्या करना भी आनंददायक है?क्या किसी के दैहिक सुख की परिणीत किसी की मौत से होना जायज है….माफ़ करिए परन्तु मैं थूकती हूँ ऐसी स्वतन्त्रता पर…. ऐसे आचरण पर…. ऐसे माँ बाप पर….आपकी स्वतन्त्रता का दायरा किसी की हत्या का कारण नहीं बनना चाहिये।और यदि बनता है तो मेरी नज़र में आप खूनी हैं। कातिल हैं।आपको कोई हक़ नहीं ऐसा करने का।

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