Nationalist Bharat
विविध

क्या नाचने गाने को विवाह कहते हैं ?

नीलेन्द्र सिंह

क्या नाचने गाने को विवाह कहते हैं, क्या दारू पीकर हुल्लड़ मचाने को विवाह कहते हैं, क्या रिश्तेदारों और दोस्तों को इकट्ठा करके दारु की पार्टी को विवाह कहते हैं ? डीजे बजाने को विवाह कहते हैं, नाचते हुए लोगों पर  पैसा लुटाने को विवाह कहते हैं, घर में सात आठ दिन धूम मची रहे उसको विवाह कहते हैं? दारू की 20-25 पेटी लग जाए उसको विवाह कहते हैं ? किसको विवाह कहते हैं?विवाह उसे कहते हैं जो बेदी के ऊपर मंडप के नीचे पंडित जी मंत्रोच्चारण के साथ देवताओं का आवाहन करके विवाह की वैदिक रस्मों को कराने को विवाह कहते हैं।

लोग कहते हैं कि हम आठ 8 महीने से विवाह की तैयारी कर रहे हैं और पंडित जी जब सुपारी मांगते हैं तो कहते हैं अरे वह तो भूल गए जो सबसे जरूरी काम था वह आप भूल गए विवाह की सामग्री भूल गए और वैसे तुम 10 महीने से विवाह की कोनसी तैयारी कर रहे हैं।विवाह – नहीं साहब आप दिखावे की तैयारी कर रहे हो कर्जा ले लेकर दिखावा कर रहे हो हमारे ऋषियों ने कहा है जो जरूरी काम है वह करो । ठीक है अब तक लोगों की पार्टियां खाई है तो खिलानी भी पड़ेगी ठीक है समय के साथ रीति रिवाज बदल गए हैं मगर दिखावे से बचें।आज आप दिखावा करना चाहते हो करो खूब करो मगर जो असली काम है जिसे सही मायने में विवाह कहते हैं वह काम गौण ना हो जाऐ, 6 घंटे नाचने में लगा देंगे, 4 घंटे मेहमानो से मिलने में लगा देंगे’, 3 घंटे जयमाला में लगा देंगे, 4 घंटे फोटो खींचने में लगा देंगे और पंडित जी के सामने आते ही कहेंगे पंडितजी जी जल्दी करो जल्दी करो , पंडित जी भी बेचारे क्या करें वह भी कहते है सब स्वाहा स्वाहा जब तुम खुद ही बर्बाद होना चाहते हो तो पूरी रात जगना पंडित जी के लिए जरूरी है क्या उन्हें भी अपना कोई दूसरा काम ढूंढना है उन्हें भी अपनी जीविका चलानी है, मतलब असली काम के लिए आपके पास समय नहीं है। मेरा कहना यह है कि आप अपने सभी नाते, रिश्तेदार, दोस्त ,भाई, बंधुओं को कहो कि आप जो यह फेरों का काम है वह किसी मंदिर, गौशाला, आश्रम या धार्मिक स्थल पर किसी पवित्र स्थान पर करें ।

जहां दारू पी गई हों जहां हड्डियां फेंकी गई हों क्या उस मैरिज हाउस उह पैलेस कंपलेक्स मैं देवता आएंगे, आशीर्वाद देने के लिए, आप हृदय से सोचिए क्या देवता वहां आपको आशीर्वाद देने आऐंगे, आपको नाचना कूदना, खाना-पीना जो भी करना है वह विवाह वाले दिन से पहले या बाद में करे मगर विवाह का कोई एक मुहूर्त का दिन निश्चित करके उस दिन सिर्फ और सिर्फ विवाह से संबंधित रीति रिवाज होने चाहिए , और यह शुभ कार्य किसी पवित्र स्थान पर करें। जिस मै गुरु जन आवें, घर के बड़े बुजुर्गों का जिसमें आशीर्वाद मिले।

आप खुद विचार करिये हमारे घर में कोई मांगलिक कार्य है जिसमें सब आये और अपने ठाकुर को भूल जाऐं अपने भगवान को भूलजाऐं  अपने कुल देवताओं को भूलजाये।बेहतर हो कि विवाह नामकरण अन्य जो धार्मिक उत्सव है वह शराब के साथ संपन्न ना हो उन में उन विषय वस्तुओं को शामिल ना करें जो धार्मिक कार्यों में निषेध है

सरस मेला:महज तीन दिनों में खरीद-बिक्री का आंकड़ा एक करोड़ 60 लाख के पार

Nationalist Bharat Bureau

मेदांता हॉस्पिटल पटना में स्तन कैंसर की रोकथाम हेतु जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

Nationalist Bharat Bureau

पंजाब के DGP के दिशा निर्देश पर मोगा पुलिस ने आज पुरे जिले मे चलाया ऑपरेशन ईगल-II

cradmin

“स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन” – रोटरी पटना मिडटाउन और सवेरा कैंसर अस्पताल ने आयोजित किया ज़ुम्बा सत्र

Nationalist Bharat Bureau

India vs Australia: 180 के स्कोर पर सिमटा भारत

जीविका की कहानी:महिला सशक्तीकरण और स्मार्ट प्रीपेड मीटर से बदली कहानी को सुनेंगे प्रधानमंत्री

Nationalist Bharat Bureau

मंगलुरु के पृथ्वीराज ने थाईलैंड की मोंटाकन से मंदिर में सात फेरे लेकर शादी की

नव वर्ष 2026: देशभर के नेताओं की शुभकामनाएं, पर्यावरण और लोकतंत्र का संदेश

सरस मेला का समापन समारोह, कुशल महिला उद्यमी सम्मानित

Nationalist Bharat Bureau

जब कभी हालात बुरे देख कर निराश होने लगें तो यह कहानी पढ़ लेना 

Nationalist Bharat Bureau

Leave a Comment