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जदयू नेत्री सुहेली मेहता का जदयू से त्यागपत्र, कहा:अब कुंठित लोगों की जमात है जदयू

पटना। जदयू की प्रदेश महासचिव व प्रवक्ता रही प्रो. सुहेली मेहता ने सोमवार को दल की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने राजधानी एक होटल में आयोजित प्रेस वार्ता में इसकी घोषणा की। इस दौरान प्रो. मेहता ने जदयू नेतृत्व पर कई आरोप लगाया और पार्टी में आम कार्यकर्ताओं की उपेक्षा की बात कही। उन्होंने कहा कि वे सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में पार्टी से जुड़कर काम करने आई थी। वर्षों तक पूरी इमानदारी से काम भी किया। लेकिन अब अफसोस है कि अब पार्टी में मुख्यमंत्री जी की नहीं चलती है। पार्टी एक ऐसे गिरोह के हाथ लग गयी है, जिसमें कुंठित लोगों की जमात है। ये कुंठा से ग्रसित लोग कार्यकर्ताओं को शर्तों से समझौता करने को मजबूर करते हैं। महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली पार्टी एक महिला को गिरे हुए लोगों के सामने घुटने टेकने के शर्त परप् पार्टी की राजनीति करने को कहते है । क्या यही है जदयू का असली महिला सशक्तिकरण ? ये लोग सिर्फ महिलाओं पर राजनीति करते हैं लेकिन महिलाओं को राजनीति नहीं करने देना चाहते।

 

प्रो. मेहता ने कहा कि मुख्यमंत्री अब बदल गए हैं। जिस अपराध और अपराधियों के खिलाफ मुहीम चलाने के लिए जनता ने बिहार की बागडोर उनके हाथ में दिया था। आज वहीं लोग अपराधियों को न जाने किस तरह के दबाब में जेल से निकालने के लिए दे रहे हैं और कानून बदल रहे हैं। अब तो महिलायें, जो एनडीए की सरकार में अपराधियों के खौफ से दूर थीं, इनके इस कदम से काफी चिंतित और आशंकित हैं। शराबबंदी की मुहीम भी जनता के साथ धोखा है। महिलाओं के नाम पर शराबबंदी लागू किया लेकिन हुआ क्या? आज माफिया डंके की चोट पर शराब की होम डिलीवरी करवा रहे हैं और बेचारे गरीब शराब की खाली बोतल रखने के जुर्म में भी जेल में बंद हैं। सरकारी विद्यालयों में सिर्फ वही बच्चे पढ़ रहे हैं जिनके अविभावक प्राइवेट स्कूल का खर्च बिलकुल नहीं उठा सकते। इसलिए उन्होंने जनता दल युनाईटेड का साथ छोड़ने का फैसला लिया है।

 

इससे पहले उन्होंने एक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए अपने पिता को याद करते हुए लिखा था कि बात तो सही है कि तब की राजनीति और अब की राजनीति के तौर तरीकों में बहुत फर्क आया है | पिताजी तब के राजनीतिज्ञ थे और उसी राजनीति से मैं प्रेरित हूँ | पिताजी कहा करते थे “जिस काम को जमीर स्वीकार न करे, नहीं करना चाहिए”| कहते थे…. “शान- सम्मान और स्वाभिमान से समझौता बुजदिल किया करते हैं”| ऐसे कई उदाहरण उनके राजनितिक निर्णय में दिखते भी थे | मैं अब की राजनीति में भी पिताजी के उन समाजवादी विचारों एवं सिद्धांतों को संजोकर रखना उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि समझती हूँ..!!

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