Nationalist Bharat
राजनीति

झारखंड की बदलती सियासत: एक मुख्यमंत्री ने गिरफ्तारी से पहले छोड़ी कुर्सी, दूसरे ने दल बदलने के बाद बनाई नई पहचान

चुनाव आयोग आज झारखंड विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान करेगा। इस राज्य की सियासत पिछले पांच सालों में बड़ी उठापटक से गुजरी है। इन वर्षों में दो अलग-अलग चेहरों ने तीन बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी के बाद चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया गया, लेकिन जेल से बाहर आने पर हेमंत सोरेन ने फिर से सत्ता संभाली। इस बीच, चंपई सोरेन सत्ता परिवर्तन से नाराज होकर विपक्षी भाजपा में शामिल हो गए।झारखंड में चुनावी बिगुल बजने वाला है, और जल्द ही चुनाव आयोग उपचुनाव की तारीखों का एलान करेगा। वर्तमान में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार सत्ता में है, जिसमें कांग्रेस, राजद, और भाकपा (माले) भी शामिल हैं। राज्य पिछले पांच सालों में कई राजनीतिक घटनाओं का गवाह रहा है, जहां दो नेताओं ने तीन बार मुख्यमंत्री पद संभाला, जिसमें एक ने गिरफ्तारी के कारण कुर्सी छोड़ी, जबकि दूसरे ने दल बदलकर विपक्ष में अपनी नई पहचान बनाई। इन घटनाओं के केंद्र में भूमि घोटाले का मामला था, जिसमें हेमंत सोरेन पर गंभीर आरोप लगे थे।

 

 पिछला विधानसभा चुनाव
2019 में झारखंड की 81 सदस्यीय विधानसभा के लिए पांच चरणों में चुनाव हुए थे। इसमें 65.18% मतदान हुआ, और नतीजे 23 दिसंबर को घोषित किए गए। झामुमो ने सबसे ज्यादा 30 सीटें जीतीं, जबकि भाजपा 25 सीटों पर सिमट गई। कांग्रेस के 16 विधायक जीते, जबकि अन्य दलों में झाविमो को तीन, आजसू को दो, और राजद, सीपीआई (एमएल) और एनसीपी को एक-एक सीट मिली।

 

 महागठबंधन की सरकार का गठन
चुनाव में हार के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री रघुबर दास ने इस्तीफा दिया। इसके बाद झामुमो के नेतृत्व में महागठबंधन की सरकार बनी, जिसमें कांग्रेस, राजद और अन्य दल शामिल हुए। झामुमो विधायक दल के नेता हेमंत सोरेन ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली।

 

बाबूलाल मरांडी की वापसी
फरवरी 2020 में झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने भाजपा में ‘घर वापसी’ की और अपनी पार्टी झाविमो का भाजपा में विलय कर दिया। इसके साथ ही दो झाविमो विधायक कांग्रेस में शामिल हो गए। बाबूलाल मरांडी अब झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष हैं।

 

 हेमंत सोरेन और खनन पट्टा मामला
हेमंत सोरेन का दूसरा कार्यकाल काफी चुनौतियों से भरा रहा। 2022 में चुनाव आयोग ने राज्यपाल को याचिका भेजी, जिसमें हेमंत सोरेन पर खुद को खनन पट्टा देने के आरोप में अयोग्य ठहराने की मांग की गई थी। हालांकि, इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद जनवरी 2024 में भूमि घोटाले के आरोपों में प्रवर्तन निदेशालय ने हेमंत सोरेन को गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने गिरफ्तारी से पहले पद से इस्तीफा दे दिया और चंपई सोरेन को मुख्यमंत्री बनाया गया।

 

जेल से बाहर आए हेमंत, फिर बने मुख्यमंत्री
हेमंत सोरेन को जून 2024 में जमानत मिल गई, और इसके बाद चंपई सोरेन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। 4 जुलाई 2024 को हेमंत सोरेन ने तीसरी बार मुख्यमंत्री पद संभाला। चंपई सोरेन को मंत्रिमंडल में कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया, लेकिन उनके असंतोष के कारण सियासी घटनाक्रम बदलने लगे।

 

चंपई सोरेन का दल बदल
हेमंत सोरेन के सत्ता में लौटने के बाद चंपई सोरेन ने भाजपा में शामिल होने का फैसला किया। अगस्त 2024 में चंपई ने झामुमो से इस्तीफा दे दिया और भाजपा में शामिल हो गए। उन्होंने झामुमो पर अपमानजनक व्यवहार का आरोप लगाया और अपने राजनीतिक भविष्य के लिए नई दिशा अपनाई।

 

झारखंड विधानसभा की वर्तमान स्थिति
वर्तमान में महागठबंधन के पास 44 विधायकों का समर्थन है, जिसमें झामुमो के 25, कांग्रेस के 17, और अन्य दल शामिल हैं। वहीं, विपक्षी एनडीए के पास 30 विधायकों का समर्थन है। साथ ही, सात विधानसभा सीटें खाली हैं, जिन पर आने वाले चुनावों में मुकाबला होगा।

पप्पू यादव का सामाजिक इंजीनियरिंग फॉर्मूला, सियासत में मचा घमासान

बिहार चुनाव 2025: दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने लखीसराय से शुरू किया भाजपा का चुनावी शंखनाद, महिलाओं और युवाओं पर रहेगा फोकस

देवेंद्र फडणवीस ने दो PA बने MLA

Nationalist Bharat Bureau

नीतीश सरकार शराबबंदी के विफलता का ठीकरा अब जीविका,आंगनबाड़ी जैसे स्कीम वर्करो व जनप्रतिनिधियों के माथे फोड़ना चाहती है:रणविजय कुमार

सांसद संजय सिंह की गिरफ्तारी सरकार द्वारा केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग:नियाज़ अहमद

लालगंज विधानसभा: शिवानी शुक्ला की राह हुई आसान, महागठबंधन में खत्म हुआ सियासी पेच

बीता वर्ष भारत की जनता के लिए धोखा एवं घाटे का वर्ष रहा:आनंद माधव

Nationalist Bharat Bureau

मालदा रैली में पीएम मोदी का दावा, भारतीय रेल बन रही आत्मनिर्भर

Nationalist Bharat Bureau

Nationalist Bharat Bureau

काँग्रेस सत्ता पाना तो दूर विपक्ष तक बनने को तैयार नहीं

Leave a Comment