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अमित शाह का तीन दिवसीय बिहार दौरा: मिशन 2025 की रणनीति पर मंथन, भाजपा में नई ऊर्जा भरने की तैयारी

बिहार की सियासत इस समय चुनावी रंग में रंग चुकी है। विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सभी दलों ने अपनी-अपनी रणनीति को धार देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता अमित शाह का तीन दिवसीय बिहार दौरा सियासी हलचल का केंद्र बन गया है। शाह का यह दौरा सिर्फ औपचारिक नहीं, बल्कि भाजपा के “मिशन बिहार 2025” की रूपरेखा तय करने वाला माना जा रहा है। भाजपा ने हाल ही में अपनी अंतिम उम्मीदवार सूची जारी की है, जिसमें कई पुराने चेहरों की जगह नए उम्मीदवारों को मौका दिया गया है। शाह का उद्देश्य इन बदलावों के बाद पार्टी के कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा का संचार करना और जमीनी स्तर पर संगठन को सक्रिय करना बताया जा रहा है।

पहले दिन शाह ने गया से अपने कार्यक्रम की शुरुआत की, जहां उन्होंने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि “भाजपा अब किसी सहारे की राजनीति नहीं करेगी, बल्कि अपने दम पर बहुमत के साथ सरकार बनाएगी।” इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक जदयू के प्रति भाजपा के सख्त रुख के रूप में देख रहे हैं। गया में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन में शाह ने बूथ स्तर तक संगठन को मजबूत करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता महागठबंधन सरकार से परेशान है और भाजपा का लक्ष्य है “हर बूथ, हर घर तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विकास योजनाओं को पहुंचाना।” इसके बाद पटना पहुंचकर उन्होंने प्रदेश भाजपा कोर कमिटी और चुनाव संचालन समिति की बैठक ली। बैठक में सीट-वार समीक्षा, उम्मीदवारों के प्रदर्शन, और सोशल मीडिया कैंपेन की रणनीति पर चर्चा हुई।

दूसरे दिन शाह दरभंगा और पूर्णिया में जनसभाओं को संबोधित करेंगे। बताया जा रहा है कि इन जनसभाओं के माध्यम से वे सीमांचल इलाके में भाजपा की पकड़ मजबूत करना चाहते हैं, जहां परंपरागत रूप से अन्य दलों का प्रभाव रहा है। तीसरे दिन वे पटना में बुद्धिजीवी सम्मेलन और मीडिया प्रतिनिधियों के साथ संवाद करेंगे। शाह का यह बिहार दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब एनडीए के भीतर सीट बंटवारे और नेतृत्व को लेकर असंतोष की खबरें सामने आ रही हैं। जदयू के कुछ नेताओं ने भाजपा की रणनीति पर सवाल उठाए हैं, जबकि एलजेपी (रामविलास) के कुछ बयानों से भी गठबंधन में असहजता झलक रही है। इन परिस्थितियों में शाह का यह दौरा “डैमेज कंट्रोल” और संगठनात्मक एकजुटता का संदेश देने वाला माना जा रहा है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि अमित शाह का यह दौरा सिर्फ एक चुनावी तैयारी नहीं, बल्कि बिहार की सियासत में भाजपा की “आत्मनिर्भर रणनीति” की शुरुआत है। पिछले चुनावों में सहयोगी दलों पर निर्भर रहने वाली भाजपा अब स्वतंत्र रूप से अपने संगठन को मज़बूत करने पर जोर दे रही है। शाह के इस दौरे से पार्टी के भीतर जोश और आत्मविश्वास बढ़ा है। वहीं, विपक्षी दलों ने इसे “राजनीतिक स्टंट” बताया है। लेकिन एक बात स्पष्ट है — अमित शाह के इस दौरे ने बिहार की राजनीति को एक बार फिर गरमा दिया है और आने वाले हफ्तों में इसका असर पूरे चुनावी समीकरण पर देखने को मिलेगा।

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