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जवनिया पहुंचे दीपंकर भट्टाचार्य, गंगा से कटाव व राहत-बचाव का लिया जायजा

भोजपुर:भाकपा (माले) महासचिव का. दीपंकर भट्टाचार्य, राज्य सचिव कुणाल, आरा सांसद सुदामा प्रसाद, काराकाट विधायक अरुण सिंह, डुमरांव विधायक अजित कुमार सिंह और अगिआंव विधायक शिवप्रकाश रंजन के नेतृत्व में भाकपा (माले) की एक उच्चस्तरीय टीम आज भोजपुर जिले के जवइनिया, नौरंगा आदि गांव पहुंची। इस दौरान भाकपा (माले) के सैकड़ों कार्यकर्ता और स्थानीय नेता भी साथ रहे।ज्ञात हो कि इस बार गंगा की बाढ़ व कटाव से जवइनिया सहित आसपास के कई गांवों का बड़ा हिस्सा नदी में समा गया है। किसानों की उपजाऊ जमीन, गरीबों के घर, मवेशी और लोगों की जीवनभर की पूंजी सबकुछ बह गया है।नेताओं ने वहां कई घंटे बिताए और कटाव क्षेत्र का निरीक्षण करने के साथ-साथ जवइनिया व नौरंगा गांव तथा बांध पर रह रहे विस्थापितों से संवाद किया। उन्होंने पीड़ितों की समस्याओं को सुना और राहत-पुनर्वास की हकीकत का जायजा लिया।

का. दीपंकर भट्टाचार्य ने कहा कि यह हादसा प्राकृतिक नहीं बल्कि सरकार की लापरवाही और उपेक्षा का नतीजा है। उन्होंने कहा कि गंगा का कटाव कोई नई समस्या नहीं है, लेकिन सरकार ने समय रहते कोई ठोस उपाय नहीं किया। ढाई महीने बीत जाने के बावजूद अब तक न तो पीड़ितों की सूची पूरी हुई है और न ही मुआवजा व पुनर्वास की कोई समुचित व्यवस्था की गई है। उन्होंने कहा कि जो पहली सूची बनी थी उसमें भी सैकड़ों असली पीड़ितों के नाम काट दिए गए हैं। उन्होंने लोगों से कहा कि पूरी सूची को सार्वजनिक करवाना और सभी को उसका लाभ दिलवाना अब हमारी साझा लड़ाई है।उन्होंने यह भी कहा कि अब चुनाव आचार संहिता का बहाना बनाकर राहत शिविरों और लंगर को बंद करने की कोशिश की जाएगी, जिससे लोगों की स्थिति और खराब हो जाएगी। भाकपा (माले) की स्पष्ट मांग है कि लोगों को जमीन के बदले जमीन और मकान के बदले मकान मिले। पुनर्वास कोई दया नहीं, लोगों का अधिकार है।कहा कि इस आपदा के दौरान राज्य सरकार, केंद्र सरकार और जिला प्रशासन कृ तीनों नाकाम साबित हुए हैं। आरके सिंह यहां के सांसद रहे और केंद्र में लगातार मंत्री रहे, लेकिन उन्होंने कभी इस क्षेत्र के कटाव या राहत की चिंता नहीं की। यह ट्रिपल इंजन सरकार की नाकामी और जनविरोधी चरित्र को उजागर करता है।उन्होंने कहा कि इन इलाकों में स्वास्थ्य सेवा, बच्चों की शिक्षा, पीने का पानी, शौचालय और सुरक्षा की गारंटी सरकार को करनी चाहिए। इन सभी मांगों को पार्टी जिला, राज्य और केंद्र स्तर पर मजबूती से उठाएगी।

का. दीपंकर भट्टाचार्य ने अंत में कहा कि हम जाति, धर्म, वोटर या गैर-वोटर का फर्क नहीं करते। हम सभी पीड़ितों के साथ हैं। सबको जमीन मिलनी चाहिए, आवास मिलनी चाहिए और सबका पुनर्वास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें पूरी एकता बनाकर चलना है और अपनी मांगों को पूरा करवाने के लिए हर स्तर के आंदोलन के लिए तैयार रहना होगा।मौके पर सांसद सुदामा प्रसाद ने कहा कि नीतीश सरकार ने पहले जमीन देने का पर्चा बांटा और फिर उसे वापस ले लिया – यह एक तरह का अपमान है. उन्होंने कहा कि सरकार अभी भी कटाव रोकने के लिए कुछ नहीं कर रही है, जो बहुत बड़ा अपराध है। उन्होंने कोइलवर से बक्सर तक पक्का बांध बनाने की मांग की।संवाद के दौरान ग्रामीणों ने अपनी पीड़ा खुलकर रखी। सियाराम गोंड ने कहा कि राहत के नाम पर लूट मची हुई है और दलित-पिछड़े समुदाय के असली पीड़ितों को कुछ नहीं मिल रहा है। मिथिला देवी (पति आदेश तिवारी) ने कहा कि सबको जमीन दी जाए और सरकार की ओर से घर बनाकर दिया जाए। नारद चैधरी ने बताया कि पिछले साल 64 परिवारों को जमीन का पर्चा मिला था, लेकिन आज तक कब्जा नहीं मिला। आधार कार्ड, केवाईसी जैसे बहानों से लोगों को टाल दिया जा रहा है। लीलावती देवी (पति हरेंद्र यादव) ने बताया कि वे इलाज के लिए अस्पताल में थीं, तभी घर ढह गया, लेकिन अब तक मुआवजा सूची में उनका नाम नहीं जुड़ा है।

रामबरन चैधरी ने कहा कि नीतीश कुमार की सभा में बुलाकर जमीन देने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ। 8 सितंबर को इसी सवाल पर प्रदर्शन भी किया गया था, लेकिन गोंड समुदाय के कई लोगों का नाम आज तक सूची में नहीं जोड़ा गया। मुखिया सुभाष चैधरी ने बताया कि प्रारंभिक सूची में 226 लोगों के नाम थे, लेकिन सीओ ने केवल 187 नाम फाइनल किए, और उनमें से केवल 111 लोगों को पैसा मिला है। महज 70 लोगों को ही जमीन का पर्चा मिला है। वार्ड सदस्य मुकेश चैधरी (वार्ड-4) और विजय राय (वार्ड-8) ने कहा कि जो सूची बनी थी उसमें एक भी नाम गलत नहीं था, फिर भी नाम काटे गए। यह सीधा वादा खिलाफी है।

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