तीन जनवरी का दिन भारतीय इतिहास में विशेष महत्व रखता है। देश और दुनिया में इस तारीख को कई अहम घटनाएं दर्ज हैं, लेकिन भारत के लिए इसकी सबसे बड़ी पहचान भारत की पहली महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले का जन्मदिन है। उन्होंने उस दौर में शिक्षा की मशाल जलाई, जब महिलाओं को पढ़ने का अधिकार तक नहीं था।
3 जनवरी 1831 को जन्मीं सावित्रीबाई फुले भारत के पहले बालिका विद्यालय की पहली प्रधानाचार्या रहीं। उन्होंने न केवल लड़कियों के लिए स्कूल खोले, बल्कि देश का पहला किसान स्कूल स्थापित कर शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने का कार्य किया। सामाजिक विरोध, अपमान और कठिनाइयों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया।
सावित्रीबाई फुले ने शिक्षा को अपना मिशन बनाया और जीवन भर महिला शिक्षा, सामाजिक समानता और मानव गरिमा के लिए संघर्ष किया। उनका योगदान आज भी नारी सशक्तिकरण और सामाजिक सुधार की प्रेरणा है। 3 जनवरी का दिन केवल एक ऐतिहासिक तिथि नहीं, बल्कि शिक्षा और समानता की लड़ाई को याद करने का अवसर है।

