Bihar Politics: बिहार की राजनीति एक बार फिर तीखी बयानबाज़ी के दौर में प्रवेश कर चुकी है। पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने सामाजिक समरसता को लेकर ऐसा बयान दिया है, जिसने जाति, आरक्षण और राजनीति—तीनों मोर्चों पर बहस छेड़ दी है। उन्होंने मंच से अपील की कि राजपूत, भूमिहार, कोइरी, कुर्मी और दलित समाज के युवक-युवतियां आपस में विवाह करें। उनका कहना था कि जब तक सामाजिक दीवारें नहीं टूटेंगी, तब तक बराबरी और एकता का सपना अधूरा रहेगा।
पप्पू यादव यहीं नहीं रुके। उन्होंने आरक्षण के मुद्दे पर भी बड़ा राजनीतिक दांव खेलते हुए 27 फीसदी एससी-एसटी और 17 फीसदी ईबीसी को मिलाकर कुल 67 फीसदी आरक्षण की मांग रख दी। समर्थक इसे सामाजिक न्याय की नई दिशा बता रहे हैं, जबकि विरोधी इसे सियासी स्टंट करार दे रहे हैं। सोशल मीडिया पर भी इस बयान को लेकर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
इस बीच पप्पू यादव और बीजेपी सांसद गिरिराज सिंह के बीच जुबानी जंग ने सियासी पारा और चढ़ा दिया है। गिरिराज सिंह के एक बयान के जवाब में पप्पू यादव की कड़ी टिप्पणी ने राजनीतिक मर्यादा पर सवाल खड़े कर दिए। जवाबी हमलों के चलते मुद्दों की जगह बयानबाज़ी सुर्खियों में आ गई है। पप्पू यादव के ताजा तेवर साफ संकेत दे रहे हैं कि वे सामाजिक न्याय और जातीय राजनीति के मुद्दे पर आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं। अब देखना यह होगा कि यह रणनीति समाज को जोड़ती है या सियासी खाई को और गहरा करती है।

