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राजनीति

वो भारत के विपरीत परिस्थितियों का पप्पू है

शिवेंद्र श्रीवास्तव

हम एक ऐसे दौर में जी रहे है जहां एक ओर कई लोग नए भारत के नाम पर खुद की फर्जी ब्रांडिंग में करोड़ों उड़ा रहे है तो दूसरी तरफ एक नेता है जो चुप-चाप अपना काम कर रहा है, खुद को समझने के लिए इस देश को समय दे रहा है, लड़ रहा है, जूझ रहा है, हार रहा है और लगातार सीख रहा है..!दो रेखाओं में बंटे इस देश में एक तरफ वो अकेला है, अपने खिलाफ़ फैलाए गए झूठ, चुटकुलों और जुमलों पर शायद ही उसने कभी ध्यान दिया होगा, और ध्यान दिया भी तो कभी नकारत्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। उसके नाना ने आजाद भारत की नींव रखी थी, इस देश की अखंडता के लिए उसने अपनी दादी को खून से लथपथ देखा है, चिथड़ो में बंटे पिता के शरीर को मुखाग्नि दी है, मां ने दो बार प्रधानमंत्री बनने के प्रस्ताव को ठुकराया है.. लेकिन फिर भी वो सभ्य है, शालीन है, शानदार है, अटल है..! बिना किसी अहंकार के सारी चुनौतियों का डटकर सामना कर रहा है।

वो हार्वर्ड का पढ़ा है, सुरक्षा घेरे में अपने बचपन को तपाया है, लेकिन आज जब वो सड़क पर निकलता है तो कोई सुरक्षा घेरा उसे अपने लोगों से मिलने से नहीं रोक पाता। वो बाकी सबसे अलग है, एक प्रेरणा है, एक उम्मीद है जो हर बार कुछ नया करता है। कभी छोटी बच्चियों से मिलने के लिए अपना काफिला रोक देता है तो कभी मछुआरों के हौसलाफजाई के लिए उनके साथ बीच समंदर में गोते लगाने चला जाता है।वो चुनावी सभा में महिला सशक्तिकरण पर थेसिस देने के बजाए महिलाओं को असल जीवन में सशक्त बनने की प्रेरणा देता है, सेमिनार करता है, उनसे वन टू वन बातें करता है। देश के जहीन मुद्दों पर वो अर्थशास्त्रियों से संवाद करता है, सरकार को सबसे पहले आगाह करता है। वो सबकुछ करता है जो इस देश को चहिए…. लेकिन फिर भी वो पप्पू है।

 

वो भारत के विपरीत परिस्थितियों का पप्पू है..! वो एक षड्यंत्र का पप्पू है। देश के लोकतंत्र को एक नाजुक डोर से बांधने वाला पप्पू है। लेकिन वो ही इस देश का एकमात्र मज़बूत विकल्प है, सुनहरे भविष्य की परिकल्पना है। उसका संघर्ष महज कांग्रेस के लिए नही है, बल्कि पूरे देश के लिए है।इसीलिए लिख के रख लीजिए.. वो दिन अब दूर नहीं जब इस देश की सारी संस्थाओं को नीलाम कर के अर्थव्यस्था का खंडहर बना दिया जाएगा, वो दिन भी दूर नहीं जब देश का किसान और युवा अपने हक के लिए एक इंच भी पीछे हटना मंजूर नहीं करेगा..जब दम तोड़ती हुई सारी भ्रांतियां अप्रासंगिक हो जाएंगी, जब नफ़रत मुह छुपाए भटकेगा.. तब भारत की बेसब्र आबादी केवल उस एक इंसान के पीछे भागेगी, उसका इंतज़ार करेगी। वो ही असल में नए भारत का नेता बनेगा। उसकी मासूमियत उसे महान प्रशासक बनाएगी। इतिहास उसके साथ जरूर न्याय करेगा..!

(ये लेखक के निजी विचार हैं,लेख उनके फेसबुक पेज से लिया गया है।मूल लेख पढ़ने के लिए click करें।)

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