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राजनीति

अशोक गहलोत ने सचिन पायलट को गद्दार बताया,सियासत के साथ कांग्रेस के भीतर भी खलबली मची

 नई दिल्ली। राजस्थान में राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के प्रवेश से दो हफ्ते पहले ही मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट को गद्दार बता न केवल सूबे की सियासत को गरमा दिया है बल्कि कांग्रेस के भीतर भी अंदरूनी खलबली मचा दी है। पायलट को मुख्यमंत्री बनाने की किसी कोशिश को स्वीकार नहीं करने का साफ संदेश देते हुए गहलोत ने कांग्रेस हाईकमान के लिए भी इस बयान के जरिए परोक्ष लक्ष्मण रेखा खींच दी है।

समाधान ऐसा निकाला जाएगा, जिससे पार्टी होगी मजबूत: कांग्रेस

गहलोत के इन आक्रामक तेवरों ने कांग्रेस नेतृत्व को भी भौंचक कर दिया है मगर सूबे की सियासत पार्टी के लिए बेकाबू न हो जाए इसके मद्देनजर पार्टी ने मामले को ठंडा करने की कोशिश शुरू कर दी है। पार्टी ने गहलोत के तेवरों को नरम करने के लिए उन्हें अनुभवी और वरिष्ठ नेता बताते हुए कहा है कि पायलट के साथ विवाद का ऐसा समाधान निकाला जाएगा जिसे कांग्रेस मजबूत होगी। गहलोत ने सचिन पायलट के साथ 18 विधायकों के करीब ढ़ाई साल पहले किए गए विद्रोह की घटना को लेकर यह हमला तब बोला है जब राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन का दबाव बनाने की पार्टी की गलियारों में सियासी हलचल शुरू हुई है।

प्रियंका के साथ सचिन की मौजूदगी ने गहलोत खेमे को किया परेशान

राजस्थान के प्रभारी कांग्रेस महासचिव अजय माकन का अपने पद से पिछले हफ्ते इस्तीफा देना इस दिशा में सबसे बड़ी राजनीतिक हलचल थी। इसी बीच भारत जोड़ो यात्रा के मध्यप्रदेश में प्रवेश के दौरान सचिन पायलट की राहुल गांधी के साथ मौजूदगी ने भी पार्टी के अंदर का सियासी पारा बढ़ाया। इसी दरम्यान यात्रा में प्रियंका गांधी वाड्रा की मौजूदगी ने भी गहलोत खेमे को सियासी रेड अलर्ट कर दिया। राहुल और प्रियंका के साथ सचिन पायलट की निकटता पार्टी में सबको मालूम है और पायलट को विद्रोह के मुहाने से वापस लाने में प्रियंका की अहम भूमिका रही थी।पार्टी में अंदरखाने यह स्वीकार किया जा रहा कि गहलोत जैसे नरम प्रकृति वाले नेता ने पायलट को लेकर जिस तरह की आक्रामकता दिखाई है उसका संदेश साफ है कि वह सबसे पहले राजस्थान में नेतृत्व परिवर्तन की संभावना को रोकने में अपनी तरफ से कोई कसर नहीं छोड़ेंगे। इतना ही नहीं कांग्रेस और गांधी परिवार की खातिर ऐसी किसी संभावना के लिए अगर राजी होने को तैयार होंगे भी तो गहलोत यह सुनिश्चित करेंगे कि पायलट किसी सूरत में मुख्यमंत्री न बन पाएं।पायलट को किसी कीमत पर स्वीकार नहीं करने के गहलोत के खुले ऐलान के बाद राजस्थान कांग्रेस की सियासत फिर से डांवाडोल न हो जाए पार्टी नेतृत्व को इसकी भी चिंता है। इसीलिए गहलोत के बयानों पर किसी तरह की सख्त टिप्पणी से पार्टी नेतृत्व ने न केवल परहेज किया बल्कि उन्हें अनुभवी और वरिष्ठ बता नरम करने की कोशिश की।

अशोक गहलोत एक वरिष्ठ और अनुभवी राजनीतिक नेता: जयराम रमेश

कांग्रेस के संचार महासचिव जयराम रमेश का पायलट पर हमले से गरमाई सियासत पर जारी बयान पार्टी की इस सतर्कता को जाहिर करता है। जयराम ने कहा ‘अशोक गहलोत एक वरिष्ठ और अनुभवी राजनीतिक नेता हैं। उन्होंने अपने छोटे सहयोगी सचिन पायलट के साथ जो भी मतभेद व्यक्त किए हैं, उन्हें इस तरह से सुलझाया जाएगा जिससे कांग्रेस पार्टी मजबूत हो। अभी यह प्रत्येक कांग्रेसजनों का कर्तव्य है कि अब तक बेहद सफल भारत जोड़ो यात्रा को उत्तर भारतीय राज्यों में और ज्यादा कामयाब बनाएं।

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