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पत्रकारों के लिए प्रासांगिक है ‘विनोबा के साथ उनतालीस दिन’ पुस्तक : हरिवंश

नयी दिल्ली 28 अगस्त (वार्ता) विनोबा के साथ उनतालीस दिन’ पुस्तक नये पुराने सभी पत्रकारों के लिए प्रासांगिक है।

यह बात राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने रविवार को विनोबा दर्शन पुस्तक के लोकार्पण समारोह को गाजियाबाद के मेवाड़ शैक्षणिक संस्थान में संवोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि विनोबा के साथ उनतालिस दिन रहकर उसकी रिपोर्टिंग करना वरिष्ठ पत्रकार प्रभाष जोशी के करियर की बुनियाद है। उन्होंने उस दौरान जो रिपोर्ट लिखी वह कालजयी हो गई। राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि पत्रकारों को रिपोर्टिंग का गुर सीखने और सहज लेखन के लिए इस पुस्तक को जरूर पढ़ना चाहिए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वरिष्ठ पत्रकार व इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने कहा कि यह पुस्तक विनोबा दर्शन नहीं विनोबा दृष्टि है। यह जीवन जीने की दृष्टि है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के स्वराज के सपने को विनोबा भावे ने कैसे लागू करने का प्रयास किया और उस यात्रा को प्रभाष जोशी ने कैसे अपने रिपोर्टिंग के माध्यम से साकार किया यह पुस्तक उसका उत्कृष्ट उदाहरण है। इंदौर की इसी यात्रा के बाद विनोबा को लोगों ने बाबा कहना शुरु किया। उन्होंने दया धर्म का मूल है को उद्धृत करते हुए कहा कि भूदान आंदोलन विनोबा के करुणा का सर्वोत्तम उदाहरण है। गांधी के अधूरों कार्यों को विनोबा पूरा करना चाहते थे। यह पुस्तक हमें बताती है कि 1947 में जो स्वराज आया वह गांधी का स्वराज नहीं था। यह बात विनोबा ने कही थी। यह बात आज भी प्रासंगिक है। गांधी की कल्पना के स्वराज को लेकर विनोबा ने गांव-गांव यात्रा की।

कार्यक्रम को वरिष्ठ पत्रकार व प्रभाष परंपरा न्यास के अध्यक्ष बनवारी ने भी संबोधित किया। उन्होंने प्रभाष जोशी से जुड़े अपने संस्मरणों को सुनाते हुए कहा कि विनोबा भावे के साथ बिताये उनके उनतालीस दिनों ने उन्हें देश का चर्चित पत्रकार बना दिया। उन्होंने कहा कि विनोबा भावे का ठीक से मूल्यांकन होना अभी बाकी है। विनोबा ने राजनीतिक समस्या का सामाजिक ताकत से हल निकालने के लिए अपना जीवन खपाया और समाज को जोड़ने का काम किया।

वरिष्ठ पत्रकार संजीव कुमार ने कहा कि पत्रकारिता के विद्यार्थियों के लिए यह पुस्तक एक अनिवार्य पाठ है। इसलिए इसे पत्रकारिता के कोर्स में भी पढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस किताब को पढ़ते हुए आपको इस बात का एहसास होगा कि यह काम कोई जीनियस ही कर सकता है।

दिल्ली विश्वविद्यालय के प्राध्यापक राजीव रंजन गिरी ने कहा कि प्रभाष जोशी ने जो रिपोर्टिंग की वह अद्भुत है। पत्रकारिता के छात्रों और पत्रकारों के लिए इस पुस्तक को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि यह अकेली पुस्तक है जिसमें सबकुछ समाहित है। मनोज मिश्र ने पुस्तक का परिचय देते पुस्तक की रचना प्रक्रिया को लेकर अपने अनुभवों को साझा किया। मेवाड़ इंस्टीट्यूट की निदेशक अलका अग्रवाल ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन राकेश कुमार सिंह ने किया।

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