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पहली परीक्षा में ही बैकफुट पर PK! 4 में से दो विधानसभा सीटों पर उम्मीदवार बदले

पटना: बिहार में स्वच्छ और ईमानदार सरकार बनाने का दावा करने वाले प्रशांत किशोर की पहली राजनीतिक कोशिश को झटका लगा है। उन्होंने विधानसभा के 4 उपचुनावों में अपनी ताकत दिखाने की बात कही थी, लेकिन शुरुआत में ही स्थिति उलट गई है। प्रशांत किशोर को पहले तरारी विधानसभा क्षेत्र में अपना उम्मीदवार बदलना पड़ा और अब बेलागंज क्षेत्र में भी नामांकित उम्मीदवार ने चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया है। स्वच्छ राजनीति के दावे करने वाले प्रशांत किशोर ने बेलागंज से नए उम्मीदवार की घोषणा की है।

चार दिनों में बदला उम्मीदवार
बिहार की जिन चार विधानसभा सीटों पर उपचुनाव हो रहे हैं, उनमें गया जिले की दो सीटें—बेलागंज और इमामगंज—भी शामिल हैं। पिछले शनिवार को प्रशांत किशोर ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेलागंज से प्रो. खिलाफत हुसैन को उम्मीदवार घोषित किया था, लेकिन उसी दौरान हंगामा हो गया था, जिसमें जनसुराज पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने कुर्सियां फेंकी और जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। इसके बाद बुधवार को प्रशांत किशोर ने नए उम्मीदवार के तौर पर मो. अमजद का नाम घोषित किया। जनसुराज पार्टी के अनुसार, मो. अमजद पहले मुखिया रह चुके हैं और विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं।

तरारी से भी बदलना पड़ा उम्मीदवार
इससे पहले तरारी विधानसभा क्षेत्र में प्रशांत किशोर को अपने घोषित उम्मीदवार रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल कृष्ण सिंह को बदलना पड़ा था। यह पता चला कि कृष्ण सिंह बिहार के वोटर नहीं हैं, जबकि चुनावी नियमों के अनुसार, उम्मीदवार का उसी राज्य का वोटर होना आवश्यक है। इसके बाद जनसुराज पार्टी ने तरारी से किरण सिंह को नया उम्मीदवार घोषित किया।

बेलागंज में प्रशांत किशोर की सभा में हुआ था हंगामा:
आपको याद दिलाएं कि बेलागंज विधानसभा सीट को लेकर काफी बवाल खड़ा हुआ था. टिकट के दावेदारों ने प्रशांत किशोर की सभा में हंगामा किया था और कुर्सियां भी चली थी. जिस वजह से अमजद का टिकट कट गया था लेकिन खिलाफत हुसैन के इंकार के बाद अब पूर्व मुखिया मोहम्मद अमजद को मैदान में उतारा गया है. अमजद बेलागंज से 2005 और 2010 में विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं.

वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने पर प्रशांत ने दी सफाई
इस विवाद पर सफाई देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा था, ‘जिस आदमी की बिहार में अपनी जमीन है, बिजली बिल देता है और यहां का निवासी है, यदि केवल राज्य के वोटर लिस्ट में नाम नहीं है तो वह चुनाव नहीं लड़ सकता है, इस चीज को देखा जाएगा। उनकी लड़ाई माफिया से है और जन सुराज उनसे डरने वाला नहीं है। पीके ने आगे कहा था कि एक-दो दिनों में स्थिति साफ हो जाएगी। हम लोग कानूनी सलाह भी ले रहे हैं।

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