बिहार सरकार शिक्षा और रोजगार को एक साथ मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य सरकार अब सरकारी प्राथमिक विद्यालयों में कक्षा 1 से 5 तक पढ़ने वाले बच्चों को यूनिफॉर्म सीधे उपलब्ध कराने की योजना पर विचार कर रही है। खास बात यह है कि इस व्यवस्था में यूनिफॉर्म सिलाई और वितरण की जिम्मेदारी जीविका दीदियों को सौंपी जा सकती है। ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने पटना में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान इसके संकेत दिए।
मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में शिक्षा विभाग बच्चों के यूनिफॉर्म के लिए नकद राशि देता है, लेकिन कई बार यह पैसा अन्य घरेलू जरूरतों में खर्च हो जाता है और बच्चे बिना ड्रेस के स्कूल पहुंचते हैं। नई योजना के तहत जीविका दीदियों द्वारा सिली यूनिफॉर्म सीधे बच्चों तक पहुंचाई जाएगी, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि हर छात्र सम्मान के साथ स्कूल आए। इस प्रस्ताव को लेकर शिक्षा विभाग के साथ जल्द उच्चस्तरीय बैठक होने की संभावना है।
सरकार का यह मॉडल पहले से आंगनबाड़ी स्तर पर सफल रहा है। फिलहाल बिहार में करीब 50 लाख आंगनबाड़ी बच्चों को जीविका समूहों के माध्यम से यूनिफॉर्म दी जा रही है। जीविका योजना से जुड़ी महिलाएं पहले ही सिलाई के काम से आत्मनिर्भर बन रही हैं। राज्य में 1,050 से अधिक सिलाई केंद्रों के जरिए लगभग एक लाख महिलाएं ड्रेस निर्माण से जुड़ी हैं, और आने वाले समय में यह संख्या तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।समाज कल्याण मंत्री मदन सहनी ने कहा कि यूनिफॉर्म, पोषण और समान सुविधाओं से बच्चों में बराबरी की भावना बढ़ी है। सरकार की यह पहल शिक्षा की गुणवत्ता के साथ-साथ ग्रामीण महिलाओं के रोजगार को भी नई दिशा देने वाली मानी जा रही है।

