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स्वास्थ्य

जयप्रभा मेदांता हाॅस्पिटल में कार्डियक अरेस्ट सर्वाइवर्स प्रोग्राम का सफल आयोजन

पटना: जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशिलिटी हाॅस्पिटल, पटना ने ‘कार्डियक अरेस्ट सर्वाइवर्स प्रोग्राम’ का आयोजन आज रविवार, 15 दिसम्बर को अस्पताल परिसर में किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य कार्डियक अरेस्ट की गंभीरता, तत्काल उपचार की आवश्यकता, और सर्वाइवर्स की प्रेरणादायक कहानियों को साझा करना था। कार्यक्रम में पटना के सिविल सर्जन डाॅ. मिथलीश्वर कुमार के साथ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा केंद्र (PHC) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के प्रतिनिधियों, राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल के प्रतिनिधियों के साथ-साथ पटना के विभिन्न अस्पतालों के अनुभवी कार्डिओलॉजिस्ट्स, हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स, और कार्डियक अरेस्ट सर्वाइवर्स ने भाग लिया और जीवन बचाने में समय पर सही कदम उठाने की महत्वपूर्ण भूमिका पर अपने अनुभव साझा किए। साथ में कार्डियक अरेस्ट में जीवन रक्षक सीपीआर (CPR) पर भी चर्चा और डेमोंस्ट्रेशन किया गया। हेल्थ रिपोर्ट्स बताती हैं कि अगर कार्डियक अरेस्ट के प्रारम्भिक क्षणों के अंदर सीपीआर दिया जाता है, तो मरीज क़े बचने की संभावना बढ़ जाती है। सीपीआर प्रभावी ढंग से ब्लड फ्लो को बनाए रखता है और हृदय, मस्तिष्क और अन्य जरूरी अंगों को ऑक्सीजन प्रदान करता है, जिससे पीड़ित को ठीक होने का बेहतर मौका मिलता है। एक आकलन के अनुसार सीपीआर देने से 10 में से 7 लोगों की जान बचाई जा सकती है, और भारत में केवल 2 प्रतिशत लोगों को ही सीपीआर देना आता है। इसलिए सीपीआर क़े प्रति लोगों क़े बीच जागरूकता जरुरी है और मेदांता पटना हमेशा ऐसे कार्यक्रम क़े द्वारा लोगों को जागरूक करता रहता है। बता दें की मेदांता के सीपीआर (CPR) प्रशिक्षण पर “मेदांता के साथ बनो जीवन रक्षक” अभियान के अंतर्गत जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशिलिटी हाॅस्पिटल ने अब तक 18,000+ लोगों को सीपीआर प्रशिक्षण देकर जीवन बचाने की तकनीक सिखाई है। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को सीपीआर की महत्ता और तुरंत चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता के बारे में जागरूक किया गया।

कार्यक्रम के मॉडरेटर और अस्पताल के हृदय रोग विशेषज्ञ डाॅ. शमशाद आलम ने कहा, “कार्डियक अरेस्ट एक ऐसी स्थिति है जो बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक हो सकती है और इसमें तुरंत एक्शन लेना अत्यंत आवश्यक होता है।” उन्होंने कहा, “यह कार्यक्रम मरीजों, उनके परिवारों और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को कार्डियक अरेस्ट की गंभीरता, सही अस्पताल के चयन और समय पर चिकित्सा प्रबंधन के महत्व को समझाने के लिए आयोजित किया गया है।”

डाॅ. अजय कुमार सिन्हा ने कहा, “सीपीआर (कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन) एक ऐसी जीवनरक्षक तकनीक है, जो कार्डियक अरेस्ट के दौरान किसी व्यक्ति की सांस और दिल की धड़कन को दोबारा चालू कर सकती है। यह तकनीक हर किसी को आनी चाहिए क्योंकि आपातकालीन स्थिति में यह जान बचाने का सबसे प्रभावी तरीका है।”

इस अवसर पर डाॅ. मिथलीश्वर कुमार, सिविल सर्जन, पटना ने कहा, “जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशिलिटी हाॅस्पिटल द्वारा आयोजित ‘कार्डियक अरेस्ट सर्वाइवर्स प्रोग्राम’ एक महत्वपूर्ण पहल है, जो आम जनता और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करता है। इस कार्यक्रम के माध्यम से सीपीआर प्रशिक्षण और कार्डियक अरेस्ट प्रबंधन की जानकारी देना एक प्रशंसनीय प्रयास है।मेदांता के आने के बाद कार्डिओलॉजी और कैंसर के मरीज जो मरीज बाहर जा रहे थे वो अब यही बेहतरीन इलाज प्राप्त कर रहे है। वैसे ही मेदांता में अन्य विभागों जैसे न्यूरोसर्जरी, यूरोलॉजी सहित अन्य सुपर स्पेशिलिटी के लिए भी उच्च स्तरीय सुविधा है। उम्मीद है की आगे बिहार से इन विभाग के मरीजों को यही मेदांता में सम्पूर्ण सुविधा प्राप्त होंगी और वह यही इलाज के लिए सोचे।”

प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डाॅ. प्रमोद कुमार ने कहा, “कार्डियक अरेस्ट के मामलों में जीवन बचाने में सबसे महत्वपूर्ण है समय पर सही मेडिकल सहायता प्राप्त करना। एक भरोसेमंद और उन्नत सुविधाओं वाले हार्ट कमांड सेंटर तक जल्दी पहुंचना जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकता है। जयप्रभा मेदांता सुपर स्पेशिलिटी हाॅस्पिटल का यह प्रयास कई जिंदगियां बचाने की दिशा में एक उल्लेखनीय कदम है।”

फैकल्टियों में पटना के सिविल सर्जन डाॅ. मिथलीश्वर कुमार, डाॅ. अजित प्रधान, आई जी आई एम एस के डायरेक्टर डाॅ बिंदे कुमार, एम्स के कार्डियक सर्जरी विभाग के एच ओ डी डाॅ. संजीव कुमार, डॉ विनीत कुमार और डॉ शिशिर कुमार शामिल थे।

जयप्रभा मेदांता के फैकल्टी में डाॅ. प्रमोद कुमार, डाॅ. अजय कुमार सिन्हा, डाॅ. विजय कुमार, डाॅ. पवन कुमार सिंह, डाॅ. सुवेन कुमार, डाॅ. श्रद्धा रंजन, डाॅ. सुशील कुमार, डाॅ. श्रेयस त्रिवेदी, डाॅ. मीतू कुमारी, डाॅ. सुभलेश कुमार तथा डाॅ. दीपाश्री शामिल थे। प्रोग्राम के दौरान प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञों ने पैनल डिस्कसन में हिस्सा लिया। इसके अलावा कई सफल रोगियों की कहानी सुनाई गई तथा सीपीआर की ट्रेनिंग पर चर्चा की गयी |

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