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स्वास्थ्य

गांव का डॉक्टर: डॉ. रमण किशोर की प्रेरणादायक कहानी

पटना:बिहार के ग्रामीण इलाकों में एक नाम गूंजता है—डॉ. रमण किशोर, जिन्हें लोग प्यार से “गांव का डॉक्टर” कहते हैं। एमबीबीएस और एमडी (एम्स, पटना) की डिग्री के साथ एक सरकारी डॉक्टर होने के बावजूद, डॉ. रमण ने अपनी जिंदगी का मकसद बनाया है गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना। पिछले पांच वर्षों में, उन्होंने अपने निजी वेतन से 254 से अधिक स्वास्थ्य शिविर आयोजित किए, जिनमें 37,000 से ज्यादा मरीजों को निःशुल्क चिकित्सा सुविधा दी।

 

डॉ. रमण की इस नेक यात्रा की शुरुआत एक दुखद घटना से हुई। उन्होंने अपनी मां को देर से इलाज मिलने की वजह से खो दिया था। इस त्रासदी ने उन्हें झकझोर दिया और उन्होंने ठान लिया कि कोई और इस दर्द से न गुजरे। इस नुकसान ने उन्हें गरीबों और ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए मुफ्त इलाज करने की प्रेरणा दी। तब से, उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और 36,000 से अधिक जरूरतमंद मरीजों को मुफ्त चिकित्सा सुविधा प्रदान की।

 

डॉ. रमण की खासियत यह है कि उन्होंने कभी निजी क्लिनिक नहीं खोला। जहां कई डॉक्टर निजी प्रैक्टिस के जरिए अतिरिक्त आय अर्जित करते हैं, वहीं डॉ. रमण ने अपनी कमाई को ग्रामीण स्वास्थ्य शिविरों में निवेश करना चुना। इन शिविरों में न केवल मुफ्त जांच और इलाज होता है, बल्कि मरीजों को दवाइयां और स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता भी प्रदान की जाती है। उनकी यह निःस्वार्थ सेवा ग्रामीण बिहार के लोगों के लिए वरदान साबित हुई है, जहां चिकित्सा सुविधाओं की कमी एक बड़ी चुनौती है।

डॉ. रमण का काम अब केवल चिकित्सा तक सीमित नहीं है; यह एक सामाजिक बदलाव का प्रतीक बन चुका है। ग्रामीण बिहार के लोग उन्हें “गांव का डॉक्टर” कहकर पुकारते हैं, क्योंकि वे उन दूर-दराज के क्षेत्रों में पहुंचते हैं जहां कोई और जाने की हिम्मत नहीं करता। उनकी मेहनत और समर्पण ने न केवल हजारों जिंदगियां बचाई हैं, बल्कि लोगों में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता भी बढ़ाई है।

 

डॉ. रमण किशोर जैसे लोग समाज के लिए एक मिसाल हैं। उनकी कहानी हमें सिखाती है कि एक व्यक्ति की मेहनत और निःस्वार्थ भावना से कितना बड़ा बदलाव लाया जा सकता है। हमें ऐसे लोगों को न केवल सम्मान देना चाहिए, बल्कि उनकी कहानियों को साझा करना चाहिए ताकि और लोग प्रेरित होकर समाज सेवा के लिए आगे आएं।

 

डॉ. रमण को धन्यवाद कहना सिर्फ एक औपचारिकता नहीं है; यह एक ऐसी भावना है जो हमें उनके जैसे और नायकों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रेरित करती है। उनके इस योगदान ने न केवल बिहार के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर किया है, बल्कि मानवता में विश्वास को भी मजबूत किया है।

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