नेशनल हेराल्ड मामले में अदालत के फैसले के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट द्वारा धन शोधन के आरोपों से जुड़े प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आरोपपत्र पर संज्ञान लेने से इनकार किए जाने के बाद कांग्रेस आक्रामक हो गई है। पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे केंद्र सरकार और जांच एजेंसियों के लिए बड़ा झटका करार देते हुए कहा कि यह फैसला साबित करता है कि गांधी परिवार के खिलाफ लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार थे। कांग्रेस का दावा है कि यह मामला शुरू से ही राजनीतिक प्रतिशोध और उत्पीड़न के इरादे से दर्ज कराया गया था।
खरगे ने इस फैसले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग की। उन्होंने कहा कि यह निर्णय मोदी और शाह के लिए करारा झटका है और उन्हें इसकी नैतिक जिम्मेदारी लेनी चाहिए। खरगे ने आरोप लगाया कि ईडी और अन्य जांच एजेंसियों का इस्तेमाल राजनीतिक विरोधियों को डराने और बदनाम करने के लिए किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि इस मामले में न तो कोई प्राथमिकी दर्ज थी और न ही किसी तरह के ठोस सबूत मौजूद थे, इसके बावजूद वर्षों तक गांधी परिवार को परेशान किया गया।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अभिषेक सिंघवी ने भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड मामला एजेंसियों के दुरुपयोग का जीता-जागता उदाहरण है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस केस में न तो किसी तरह का धन लेन-देन हुआ और न ही संपत्ति का कोई अवैध हस्तांतरण हुआ, ऐसे में धन शोधन का सवाल ही नहीं उठता। सिंघवी ने कहा कि अदालत का फैसला यह दिखाता है कि संविधान और कानून अंततः सत्ता के दबाव से ऊपर हैं। कांग्रेस का कहना है कि यह फैसला लोकतंत्र और न्यायपालिका की स्वतंत्रता की जीत है।

