Bihar Crime: बिहार में गरीबों के लिए चलाई जा रही जन वितरण प्रणाली एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गई है। लखीसराय जिले से सामने आए मामले ने सरकारी दावों और निगरानी व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। सहकारिता विभाग, बिहार सरकार के प्रधान सचिव को भेजी गई शिकायत में आरोप लगाया गया है कि PACS अध्यक्षों, स्थानीय राइस मिल मालिकों और सहकारिता विभाग के अधिकारियों की कथित मिलीभगत से सड़ा-गला और बदबूदार चावल पीडीएस के जरिए गरीब परिवारों तक पहुंचाया जा रहा है।
शिकायतकर्ताओं कमल किशोर सिंह और सतीश प्रसाद सिंह ने आरोप लगाया है कि धान अधिप्राप्ति के बाद गुणवत्ता मानकों की अनदेखी कर जानबूझकर डिग्रेडेड और खाने योग्य न रहने वाला चावल गोदामों में जमा कराया जाता है। यही चावल बाद में जन वितरण प्रणाली की दुकानों तक भेज दिया जाता है, जिससे लाभुकों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। आरोप है कि बिना किसी सैंपल जांच या गुणवत्ता परीक्षण के ही खराब चावल को पास कर दिया जाता है।
मामले में जिला सहकारिता पदाधिकारी और प्रखंड सहकारिता पदाधिकारी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। शिकायत में कहा गया है कि स्थानीय स्तर पर बार-बार शिकायतों के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई, जिससे पूरे तंत्र की निष्पक्षता संदेह के घेरे में आ गई है। शिकायत की प्रति जिलाधिकारी लखीसराय को भी सौंपी गई है। शिकायतकर्ताओं ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय विजिलेंस जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त विभागीय व कानूनी कार्रवाई की मांग की है। अब देखना होगा कि प्रशासन इस गंभीर आरोप पर क्या कदम उठाता है।

