पटना:अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू और रोज़माइन एजुकेशनल एंड चैरिटेबल ट्रस्ट की ओर से बांका में तालीमी बेदारी कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया, जिसमें काफी संख्या में छात्र-छात्राओं के साथ-साथ अभिभावक, सामाजिक कार्यकर्ता और अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू के पदाधिकारी तथा सदस्यों ने भाग लिया। यह कार्यक्रम सम्राट अशोक भवन, बांका में आयोजित हुआ। बिहार के विभिन्न जिलों में हाल ही में अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू बिहार के तत्वावधान में एक राज्यव्यापी तालीमी बेदारी कॉन्फ्रेंस चलाया गया, जिसका उद्देश्य जनता विशेष रूप से अल्पसंख्यक वर्ग, उर्दू भाषी परिवारों, ग्रामीण युवाओं और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को शिक्षा, उच्च शिक्षा और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के संबंध में जागरूक करना था।
इस तालीमी बेदारी कॉन्फ्रेंस के दौरान विभिन्न जिलों में जन सभाएं,बैठकें और प्रत्यक्ष संपर्क कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें छात्र, अभिभावक, शिक्षक और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाग लिया। अभियान के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि वर्तमान युग में शिक्षा ही प्रगति और उज्ज्वल भविष्य की नींव है और शिक्षा के बिना किसी भी समाज या राज्य की सर्वांगीण प्रगति संभव नहीं है। आज के प्रतिस्पर्धी दौर में छात्रों के लिए केवल पारंपरिक शिक्षा पर संतोष करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीकी कोर्स, पैरामेडिकल शिक्षा, मैनेजमेंट अध्ययन और कौशल आधारित प्रशिक्षण को अपनाना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता बन चुकी है, ताकि युवा बेहतर रोजगार प्राप्त कर आत्मनिर्भर बन सकें।

इस दौरान लोगों को यह भी आगाह किया गया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की नेतृत्व में राज्य बिहार में शिक्षा और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। स्कूलों और कॉलेजों की संख्या में वृद्धि की गई है, छात्रों के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं शुरू की गई हैं, सड़कों और बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाया गया है, कानून-व्यवस्था की स्थिति में सुधार आया है और विशेष रूप से लड़कियों की शिक्षा को विशेष प्रोत्साहन दिया गया है। इसके बावजूद समाज का एक बड़ा वर्ग अभी भी इन सुविधाओं और अवसरों से पूरी तरह परिचित नहीं है, इसी कमी को पूरा करने के लिए यह तालीमी बेदारी कॉन्फ्रेंस चलाया गया।
अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू बिहार की ओर से इस बात पर विशेष ध्यान दिया गया कि मुस्लिम युवाओं, उर्दू पृष्ठभूमि के छात्रों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों को शिक्षा से जोड़ा जाए, ताकि कोई भी बच्चा शिक्षण दौड़ में पीछे न रह जाए। इसी उद्देश्य के तहत मदरसों, मस्जिदों, स्कूलों और सामुदायिक हॉल में बैठकों का आयोजन किया गया, जहां अभिभावकों को इस बात की ताकीद की गई कि दीन और दुनिया, दोनों की शिक्षा साथ-साथ अत्यंत आवश्यक है।तालीमी बेदारी कॉन्फ्रेंस का एक महत्वपूर्ण लक्ष्य उच्च शिक्षा में प्रवेश की दर में वृद्धि करना है, क्योंकि जब छात्र शिक्षित होगा तो परिवार तरक्की करेगा, समाज मजबूत होगा और बिहार समग्र रूप से विकास की राह पर अग्रसर होगा। अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू का मानना है कि तालीमी बेदारी के बिना स्थायी विकास का विचार संभव नहीं।अंत में अंजुमन तरक़्क़ी उर्दू बिहार की ओर से राज्य के सभी नागरिकों से अपील की गई कि वे शिक्षा का समर्थन करें, विकास की प्रक्रिया में सकारात्मक भूमिका निभाएं, बिहार की खुशहाली के लिए दुआ करें और आपसी एकता व एकजुटता को बढ़ावा दें, ताकि संयुक्त प्रयासों से बिहार को देश की एक आदर्श शिक्षण राज्य बनाया जा सके।

