वित्त वर्ष के नौ महीने बीत जाने के बावजूद सरकार कई बड़ी योजनाओं में आधा बजट भी खर्च नहीं कर पाई है। करीब 500 करोड़ रुपये के प्रावधान वाली कई योजनाओं में अब तक केवल 40 फीसदी राशि ही खर्च हो सकी है। केंद्र और राज्य सरकारों की साझा इन योजनाओं में जमीनी स्तर पर क्रियान्वयन की रफ्तार काफी धीमी रही है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना, अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक वजीफा योजना, मनरेगा और अनुसूचित जनजाति के छात्रों की पोस्ट-मैट्रिक स्कॉलरशिप जैसी अहम योजनाओं में भी खर्च सीमित रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक कुल 53 योजनाओं में से 6 योजनाओं पर 40 फीसदी से भी कम खर्च हुआ है, जबकि 4 योजनाओं में 40 से 50 फीसदी और 15 योजनाओं में 51 से 75 फीसदी तक बजट खर्च किया गया है। वहीं 10 योजनाओं में 90 से 100 फीसदी और 6 योजनाओं में 100 प्रतिशत बजट उपयोग हो चुका है। शेष 47 योजनाओं में रिवाइज्ड एस्टिमेट बजट अनुमान से कम रहा है। खास तौर पर प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना में स्थिति चिंताजनक है, जहां 850 करोड़ रुपये के बजट में से अब तक सिर्फ 150 करोड़ रुपये ही खर्च हो पाए हैं।
कुल मिलाकर 53 योजनाओं के लिए 5 लाख करोड़ रुपये के बजट का ऐलान किया गया था, जिसमें से 31 दिसंबर तक करीब 2 लाख करोड़ रुपये यानी 41.2 फीसदी राशि ही जारी की जा सकी है और अब तक लगभग 3.8 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। इसी बीच केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने बताया कि जल जीवन मिशन के तहत अब तक 16 करोड़ घरों में नल से जल पहुंचाया जा चुका है। इस योजना के लिए 67,300 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है और इसे वर्ष 2028 तक बढ़ाया गया है। अमृत सरोवर योजना के तहत देशभर में 69 हजार से अधिक सरोवर बनाए गए हैं, जिससे भूजल स्तर में सुधार हुआ है और करीब नौ करोड़ महिलाओं का 4.5 करोड़ घंटे का समय बच पाया है।

