माटी महोत्सव के माध्यम से बिहार के गौरवशाली इतिहास और संस्कृति को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का मुख्यमंत्री ने आह्वान किया।
पूर्वांचल बिहार और उत्तर प्रदेश की साझा सांस्कृतिक विरासत है। दोनों राज्य मिलकर देश को विकसित बनाने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
‘माटी का फर्ज निभाना होगा, माटी का कर्ज लौटाना होगा इस पर हम सबको सोचना होगा।
पूर्वांचल की समृद्ध संस्कृति और प्रतिभाओं को सम्मान देने का सराहनीय प्रयास कर रही है माटी संस्था।
पटना: मुख्यमंत्री श्री सम्राट चौधरी ने आज ऊर्जा ऑडिटोरियम में ‘माटी’ संस्था द्वारा आयोजित 9वें माटी-पूर्वांचल महोत्सव में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने पूर्वांचल की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, कला, साहित्य, शिक्षा और सामाजिक योगदान को रेखांकित करते हुए माटी संस्था के प्रयासों की सराहना की।मुख्यमंत्री ने कहा कि 9वें माटी-पूर्वांचल महोत्सव में शामिल होने का अवसर मिलना उनके लिए गौरव की बात है। बिहार का इतिहास अत्यंत गौरवशाली और समृद्ध रहा है। बिहार में बज्जिका, मगही, मैथिली, भोजपुरी और अंगिका जैसी भाषाएँ बोली जाती हैं, जो राज्य की विविधतापूर्ण सांस्कृतिक पहचान को दर्शाती हैं। बिहार की धरती ने देश और दुनिया को अनेक महान व्यक्तित्व दिए हैं। श्री गुरु गोविंद सिंह जी की जन्मभूमि, भगवान महावीर की कर्मभूमि और भगवान बुद्ध के ज्ञान प्राप्ति से जुड़ी यह धरती अपनी समृद्ध आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक परंपरा के लिए जानी जाती है। मोहनदास करमचंद गांधी जी की महात्मा की उपाधि भी बिहार की धरती से जुड़ी रही है। उन्होंने कहा कि नालंदा जाकर देखें तो हजारों वर्ष पूर्व बिहार की शिक्षा और ज्ञान की समृद्ध परंपरा का प्रमाण मिलता है। नालंदा विश्वविद्यालय दुनिया के प्रमुख प्रमुख शिक्षा केंद्रों में शामिल था। बिहार की संस्कृति और ज्ञान परंपरा कितनी व्यवस्थित और समृद्ध रही है, इसका अंदाजा नालंदा के गौरवशाली इतिहास से लगाया जा सकता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे पूर्वांचल को बिहार और उत्तर प्रदेश, दोनों के संदर्भ में देखते हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश की बड़ी आबादी है। दोनों मिलकर देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। दोनों राज्यों की साझा सांस्कृतिक विरासत और मानवीय संसाधन देश को विकसित भारत बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में भी व्यापक स्तर पर कार्य कर रही है। ढाई हजार सहायक प्राध्यापकों कीनियुक्ति की गई है। 700 सरस्वती विद्या निकेतन मॉडल स्कूलों में आधुनिक शिक्षा व्यवस्था विकसित की जा रही है तथा लाइव क्लासेज की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक संसाधन उपलब्ध कराने के लिए ‘बिहार विद्या साथी’ ऐप की शुरूआत की गई है, जिससे विद्यार्थियों को काफी लाभ हो रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि माटी महोत्सव के माध्यम से बिहार के गौरवशाली इतिहास, संस्कृति और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का कार्य किया जाना चाहिए। हमें अपनी माटी का फर्ज निभाना है और अपनी माटी का ऋण लौटाना है। प्रधानमंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी के विकसित भारत के संकल्प और पूर्व मुख्यमंत्री आदरणीय श्री नीतीश कुमार जी के समृद्ध बिहार के सपने को साकार करने के लिए सभी को मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि माटी संस्था पूर्वांचल के लोगों, उनकी कला, संस्कृति और प्रतिभाओं को मंच देने का सराहनीय कार्य कर रही है। महोत्सव में पूर्वांचल का खान-पान, लोकगीत-संगीत, मिलना-मिलाना, परिचर्चा और ‘माटी सम्मान’ जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जो क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता को सामने लाता है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को सम्मानित किया। सम्मानित होनेवालों में लोक गायिका पद्मश्री श्रीमती मालिनी अवस्थी, पूर्व क्रिकेटर श्री सय्यद सबा करीम, ‘आज तक’ की सीनियर मैनेजिंग एडिटर श्रीमती श्वेता सिंह, बैंक ऑफ बड़ौदा के एम०डी० श्री ब्रजेश कुमार सिंह, पटना उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश श्री अरुण कुमार सिंह, पटना के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ० राजीव रंजन, देहात संस्था के संस्थापक एवं सी०ई०ओ० श्री शशांक कुमार तथा भारतीय फुटबॉल टीम की कोच एवं उप कप्तान श्रीमती मधु कुमारी शामिल हैं।कार्यक्रम में आयोजकों ने मुख्यमंत्री को अंगवस्त्र, पुष्प गुच्छ एवं प्रतीक चिन्ह भेंटकर स्वागत किया।
कार्यक्रम को कला एवं संस्कृति मंत्री डॉ० प्रमोद कुमार, सांसद एवं माटी संस्था के संरक्षक श्री जगदम्बिका पाल, माटी संस्था के संयोजक श्री आसिफ आज़मी तथा माटी संस्था से जुड़े श्री दानिश इकबाल ने संबोधित किया।इस अवसर पर मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, विभिन्न क्षेत्रों के प्रसिद्ध व्यक्ति, माटी संस्था से जुड़े हुये लोग एवं गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

