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राजनीति

मुर्गी पर काहे तोप चला रहे हैं नीतीश जी

संतोष सिंह

हाल ही में एक शादी समारोह के दौरान जदयू के कुछ नेताओं से मुलाकात हुई उस दौरान कुछ पत्रकार बंधु भी मौजूद थे स्वभाविक था जब राजनीतिज्ञ और पत्रकार एक साथ हो तो मुद्दा राजनीति ही होगी ।
चर्चा आरसीपी सिंह के घर को खाली कराने को लेकर हो रही थी जदयू और हमारे कुछ पत्रकार बंधु सरकार के इस निर्णय को लेकर तारीफ कर रहे थे लेकिन पता नहीं क्यों अचानक मेरी जुबान से निकल गया कि यह सही नहीं है और मुझे पता नहीं क्यों इस खेल में जो भी शामिल है वो जदयू का शुभचिंतक नहीं लगता है ,आरसीपी सिंह में लाख बुराई हो जनाधार शून्य हो फिर भी मुझे लगता है कि राज्यसभा नहीं भेजने का फैसला पार्टी का सही हो सकता है लेकिन घर खाली कराना सही नहीं है क्यों कि जदयू के निर्माण में आरसीपी सिंह की भी भूमिका रही है वही जदयू और नीतीश कुमार में वो बात नहीं रही तोड़ जोड़ कर सत्ता में बने हुए हैं ऐसे में इस तरह के विवाद से पार्टी को बचना चाहिए एक सप्ताह पहले तक राजद के साथ सरकार बनाने की तैयारी में लगे थे और जैसे ही बात बनी लालू प्रसाद को जन्मदिन तक की बधाई तक नहीं दिए ये भी कोई राजनीति होती है जिस दिन बीजेपी को यह भरोसा हो जाये कि राजद जदयू को साथ नहीं लेगा दूसरे दिन सरकार आपकी नहीं रहेगी ।

 

आप लोगों को यह समझना चाहिए कि मोदी और शाह राजनीतिक मजबूरी में नीतीश के साथ हैं जैसे ही मौका मिलेगा ऐसा पटकनी देगा जो आप लोग सोच नहीं सकते हैं इसलिए विभीषण पैदा मत करिए । वहां मौजूद जदयू के नेता और पत्रकार बंधु एक साथ बोल पड़े क्या संतोष जी आप भी ना आरसीपी सिंह का खेल खत्म हो चुका है बहुत उड़ रहा था उसकी क्या राजनीतिक हैसियत है आरसीपी सिंह के जाने से पार्टी मजबूत होगा ।

 

मैंने कहा ये हो सकता है ,मेरा बीट भी कभी जदयू नहीं रहा है इसलिए जदयू के अंदर क्या चल रहा है मुझे पता नहीं है लेकिन इतना जरूर पता है कि नीतीश कुमार के इस एक्शन से जदयू के एक दर्जन से अधिक विधायक नाराज जरुर होंगे जिनसे आरसीपी सिंह प्रकरण के दौरान मेरी लगातार बात हो रही थी लेकिन ये लोग कहां सुनने वाले थे अंत में मैंने यही कहा दिग्विजय सिंह, प्रभुनाथ सिंह, नरेन्द्र सिंह ,जार्ज साहब और शरद यादव जब सबके सब साथ थे उस समय का जदयू और आज का जदयू कहां खड़ा है और एक बात नीतीश कुमार अभी तक जीतने भी राजनीतिक फैसला लिए है उसमें उन्हें पटकनी ही खानी पड़ी है इतिहास पलट कर देख लीजिए इनकी जिद्द पार्टी को हमेशा नुकसान ही पहुंचाया है ।

 

अभी अभी खबर आ रही है कि जेडीयू ने पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता अजय आलोक ,प्रदेश महासचिव अनिल कुमार, प्रदेश महासचिव विपिन कुमार यादव और भंगी समाज सुधार सेनानी के प्रकोष्ठ अध्यक्ष जितेन्द्र नीरज को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है ये सारे के सारे आरसीपी सिंह के करीबी माने जाते हैं ।पहले टिकट नहीं दिये फिर आवास खाली करवा दिये और अब उसके समर्थकों को टारगेट लिया जा रहा है मतलब नीतीश चाहते हैं कि आरसीपी सिंह पार्टी छोड़ दे वैसे आरसीपी सिंह के खिलाफ पहली बार नीतीश नहीं हुए इससे पहले भी अजय आलोक सहित कई लोगों पर कार्यवाही हो चुकी है क्यों कि वो लोग आरसीपी सिंह के करीब थे फिर एक दौर आया जब आरसीपी सिंह पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी बनाये गये मंत्री भी बने इसलिए ललन सिंह ,संजय झा और आरसीपी सिंह मामले में नीतीश का दिल कब पिघल जाए कहना मुश्किल है वैसे देखना यह है कि इस कार्यवाही के बाद आरसीपी सिंह क्या करते हैं वैसे दोनों के बीच जो रिश्ता रहा है ऐसे में आरसीपी गाण्डीव उठायेंगे कहना मुश्किल है लेकिन इतना तय हो गया है बिहार की राजनीति दिलचस्प मोड़ पर आ खड़ा हुआ है ।

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