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ड्रोन स्टार्टअप आईपीओ ने 10 दिन में दोगुना किया पैसा:…

आने वाले दिनों में आपका ऑर्डर किया हुआ खाना, कपड़े और अन्य सामान ड्रोन के जरिए आप तक पहुंच जाएगा। दूर-दराज के इलाकों में ड्रोन से दवाएं पहुंचाई जाएंगी। बड़े पैमाने पर खेतों में कीटनाशकों के छिड़काव से लेकर बुवाई तक ड्रोन का इस्तेमाल किया जाएगा। सरकारी कार्यों की भी ड्रोन से निगरानी की जाएगी। यानी आने वाले दिनों में ड्रोन उद्योग तेजी से उभरता हुआ उद्योग होगा। इसी सेक्टर से जुड़ा एक स्टार्टअप है द्रोणाचार्य एरियल इनोवेशन। वह ऐसे ड्रोन पर काम कर रहा है। जिसकी तकनीक दुनिया की कुछ कंपनियों के पास है। यह एक ऐसा ड्रोन होगा जिसे दुनिया में कहीं से भी आसानी से ऑपरेट किया जा सकेगा।

शेयर 107 रुपये पर बंद हुआ
 कंपनी का आईपीओ आज बीएसई एसएमई एक्सचेंज में 102 रुपये प्रति शेयर पर लिस्ट हुआ, जो इसके इश्यू प्राइस 54 रुपये प्रति शेयर से करीब 90 फीसदी ज्यादा है। 102 रुपए पर लिस्ट होने के बाद शेयर की कीमत 5 फीसदी के अपर सर्किट के साथ 107.10 रुपए पर बंद हुई।
243.70 गुना सब्सक्राइब हुआ था
आईपीओ 13-15 दिसंबर के दौरान 62.9 लाख शेयरों के लिए आईपीओ खुला था। 34 करोड़ रुपये के इश्यू साइज के मुकाबले कंपनी को 243.70 गुना यानी 6,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की डिमांड मिली। बॉलीवुड अभिनेता आमिर खान और रणबीर कपूर ने भी इसके प्री-आईपीओ दौर में अल्पमत हिस्सेदारी खरीदी है।
ऐसे में हम कंपनी के बारे में जानेंगे। जिससे ड्रोन तकनीक दुनिया में क्रांति लाने जा रही है। भविष्य के उन्नत ड्रोन क्या करेंगे? क्या भारत 2030 तक ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग हब बन जाएगा? ड्रोन उद्योग में नौकरी की संभावनाएं क्या हैं? भारत में कौन से स्टार्टअप हैं जो ड्रोन तकनीक पर काम कर रहे हैं?
5 साल पहले शुरू हुआ स्टार्टअप
द्रोणाचार्य पुणे बेस्ड स्टार्टअप है और 5 साल से ज्यादा पुराना है। इसके संस्थापक प्रतीक श्रीवास्तव हैं और इसका मुख्य रूप से 3 प्रकार का व्यवसाय है:
1. ड्रोन पायलट प्रशिक्षण
2. सेवा
3. ड्रोन निर्माण
कंपनी ने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) से ड्रोन पायलट प्रशिक्षण के लिए लाइसेंस प्राप्त किया है। डीजीसीए सर्टिफाइड पायलट 25 किलो तक का कोई भी ड्रोन उड़ा सकता है। यह सर्टिफिकेट 10 साल के लिए होता है। एक अनुमान के मुताबिक आने वाले दिनों में देश में 1 लाख से ज्यादा ड्रोन पायलटों की जरूरत होगी।
सेवा ड्रोन उड़ाकर डेटा एकत्र करती है। इसके बाद ग्राहकों की मांग के अनुसार डेटा मॉडलिंग मुहैया कराई जाती है। ड्रोन द्वारा एकत्र किए गए डेटा में फसल वृद्धि, फसल स्वास्थ्य, सड़क निर्माण की प्रगति शामिल है। कंपनी कार्बन फाइनेंस पर विश्व बैंक की एक परियोजना पर भी काम कर रही है।
कंपनी अगले वित्त वर्ष से मैन्युफैक्चरिंग शुरू कर देगी। कंपनी फिलहाल एक ऐसे ड्रोन पर काम कर रही है जिसे दुनिया के किसी भी कोने से ऑपरेट किया जा सकता है। इसके अलावा ऐसे ड्रोन भी बनाए जाएंगे जो 24×7 हवा में रहकर लाइव फीड दे सकेंगे। कंपनी अंडरवाटर ड्रोन और अंडरग्राउंड ड्रोन पर भी काम कर रही है।
ड्रोन तकनीक क्रांतिकारी बदलाव लाएगी
ड्रोन के पास सबसे दूरस्थ क्षेत्रों तक पहुंचने की क्षमता है। यह कम जनशक्ति आवश्यकता के साथ काम कर सकता है। यह दुनिया भर में उनके गोद लेने के सबसे बड़े कारणों में से एक है, खासकर चार क्षेत्रों में: सैन्य, वाणिज्यिक, व्यक्तिगत और भविष्य की तकनीक। दुनिया में ड्रोन का सैन्य उपयोग तेजी से बढ़ा है।
ड्रोन सैन्य बलों का एक हिस्सा बन गए हैं, जिनका उपयोग लड़ाकू मिशनों, अनुसंधान और विकास और निगरानी के लिए लक्षित प्रलोभन के रूप में किया जाता है। आने वाले दिनों में कमर्शियल ड्रोन खेतों में बड़े पैमाने पर फर्टिलाइजेशन, ऑटोमेटेड बेसिस पर ट्रैफिक मॉनिटरिंग, रिमोट लोकेशंस का सर्वे करने और पिज्जा और दवा पहुंचाने जैसे काम करते नजर आएंगे। यह किसी क्रांति से कम नहीं होगा।
भारत को 1 लाख से अधिक ड्रोन पायलटों की जरूरत
उद्योग को ऐसे लोगों की जरूरत है जो ड्रोन विकसित और संचालित कर सकें। नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि देश को आने वाले दिनों में एक लाख ड्रोन पायलटों की जरूरत होगी। हमारे पास 2030 तक भारत को वैश्विक ड्रोन हब बनाने की क्षमता है। भारत जल्द ही ड्रोन इनोवेशन को अपनाने वाले बहुत सारे उद्योगों को देखेगा। यह अंततः क्रांति का कारण बनेगा।
ड्रोन मैन्युफैक्चरिंग, असेम्बलिंग, मेंटेनेंस और रिपेयर के अलावा यह सेक्टर सॉफ्टवेयर डेवलपर्स और ड्रोन-पायलट के रूप में देश में बड़ी संख्या में रोजगार सृजित करेगा। ड्रोन पायलटों के लिए प्रशिक्षण केंद्र भी खोले जा रहे हैं, जिससे कई लोगों को रोजगार मिलेगा। जैसे-जैसे उद्योग बढ़ेगा, वैसे-वैसे नौकरियों की संख्या भी बढ़ेगी। सिंधिया ने कहा कि ड्रोन पायलट प्रशिक्षण के 2-3 महीने के साथ एक व्यक्ति प्रति माह 30,000 रुपये तक कमा सकता है।
ड्रोन कितने प्रकार के होते हैं?
पंखों के प्रकार के अनुसार ड्रोन को चार श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है। जबकि भारत में ड्रोन के आकार के हिसाब से इसे 3 भागों में बांटा गया है।
नैनो ड्रोन : 250 ग्राम से कम या इसके बराबर वजन वाले ड्रोन इस श्रेणी में आते हैं। भारत में ऐसे ड्रोन उड़ाने के लिए किसी लाइसेंस या परमिट की जरूरत नहीं है।
माइक्रो और स्मॉल ड्रोन: माइक्रो ड्रोन का वजन 250 ग्राम से ज्यादा लेकिन 2 किलो से कम होता है। एक छोटे ड्रोन का वजन 2 किलो से ज्यादा लेकिन 25 किलो से कम होता है।
मध्यम और बड़े ड्रोन: मध्यम ड्रोन का वजन 25 किलोग्राम से अधिक लेकिन 150 किलोग्राम से कम होता है, जबकि बड़े ड्रोन का वजन 150 किलोग्राम से अधिक होता है।

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