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अमेरिका: राष्ट्रपति पद की दौड़ में भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी तेजी से उभरे

अमेरिका: राष्ट्रपति पद की दौड़ में भारतीय मूल के विवेक रामास्वामी तेजी से उभरे

वाशिंगटन, (वेब वार्ता)। अमेरिकी राष्ट्रपति पद की दौड़ (US Presidential Race) में भारतीयों की दिलचस्पी और बढ़ सकती है क्योंकि रिपब्लिकन पार्टी (Republican Party) के भीतर उम्मीदवारों की रेस में भारतीय मूल के अमेरिकी विवेक रामास्वामी (Vivek Ramaswamy) तेजी से आगे बढ़ते दिख रहे हैं. एक नए सर्वे में वह फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डिसेंटिस (Ron DeSantis) के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. एमर्सन कॉलेज सर्वे के मुताबिक डिसेंटिस और रामास्वामी 10-10 प्रतिशत के साथ बराबरी पर हैं. पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प (Donald Trump) 56 प्रतिशत समर्थन के साथ सबसे आगे हैं. एमर्सन के ताजा पोलिंग सर्वे को डिसेंटिस के लिए बुरी खबर की तरह देखा जा रहा है.

फ्लोरिडा के गवर्नर रॉन डिसेंटिस की लोकप्रियता जून में 21 प्रतिशत पर थी, जो कि अब 10 प्रतिशत पर है. वहीं रामास्वामी पहले के महज 2 प्रतिशत से बढ़कर अब 10 फीसदी की पसंद के साथ दूसरे स्थान पर पहुंच गए हैं. अमेरिकी वेबसाइट ‘द हिल’ की एक रिपोर्ट के अनुसार सर्वेक्षणकर्ताओं को रामास्वामी की तुलना में डिसेंटिस समर्थकों का समर्थन अस्थिर सा लगा. रामास्वामी समर्थकों में से लगभग आधे ने कहा कि वे निश्चित रूप से उन्हें वोट देंगे. जबकि डिसेंटिस समर्थकों में से सिर्फ एक-तिहाई ने ही ये भरोसा दिलाया. इस बीच 80 फीसदी से ज्यादा ट्रंप समर्थकों ने कहा कि वे निश्चित तौर पर पूर्व राष्ट्रपति को वोट देंगे.

रामास्वामी को  युवाओं का भी साथ
‘द हिल’ की रिपोर्ट के मुताबिक यह सर्वे तब जारी हुआ, जब डिसेंटिस की उम्मीदवारी का समर्थन करने वाले सुपर पीएसी का एक मेमो लीक हुआ. ‘नेवर बैक डाउन’ नाम की इस राजनीतिक समिति के मेमो में डेसेंटिस से रामास्वामी को “चूर-चूर” करने की बात कही गई थी. एमर्सन कॉलेज पोलिंग के कार्यकारी निदेशक स्पेंसर किमबॉल ने एक विज्ञप्ति में कहा कि रामास्वामी ने पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री वाले मतदाताओं का साथ हासिल किया है. उस समूह के 17 प्रतिशत और 35 साल से कम उम्र के 16 प्रतिशत मतदाताओं का भी समर्थन उनको हासिल हुआ है. वहीं डिसेंटिस का पोस्ट ग्रेजुएट वोटरों के बीच समर्थन जून में 38 प्रतिशत से घटकर अब महज 14 प्रतिशत हो गया है और 35 वर्ष से कम उम्र के मतदाताओं में से केवल 15 प्रतिशत ही उनके साथ बचे हैं.

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